IGMC में हड़ताल पर डॉक्टर, मरीज हो रहे परेशान, कई बिना इलाज के लौटे घर
आईजीएमसी में रेजिडेंट डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : December 28, 2025 at 11:18 AM IST
|Updated : December 28, 2025 at 1:12 PM IST
शिमला: आईजीएमसी शिमला में शुरू हुआ डॉक्टर और मरीज के बीच मारपीट मामले पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) शिमला में रेजिडेंट डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं. रेजिडेंट डॉक्टरों द्वारा डॉ. राघव नरूला की सेवा समाप्ति का विरोध किया जा रहा है और डॉ. राघव का टर्मिनेशन रद्द करने की मांग उठा रहे हैं. हालांकि शुक्रवार को रेजिडेंट डॉक्टरों की मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात हुई थी, लेकिन बातचीत का कोई संतोषजनक नतीजा नहीं निकला. जिसके कारण डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं. जिसके चलते शनिवार को मेडिसिन ओपीडी में एसोसिएट प्रोफेसर मरीजों का चेकअप करते नजर आए. जबकि बाकी रेजिडेंट डॉक्टर हड़ताल के चलते ओपीडी से नरादर रहे.
डॉक्टरों की हड़ताल, मरीज परेशान
वहीं, डॉक्टरों की हड़ताल के चलते मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. खासकर प्रदेश के दूरदराज क्षेत्र से आए मरीजों और तीमारदारों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है. आईजीएमसी में शनिवार को हाल बेहाल रहा. अस्पताल में कम मरीज पहुंचे. आईजीएमसी और डीडीयू अस्पताल में शनिवार को ओपीडी सेवाएं बाधित रहीं. इसके अलावा कई बड़े ऑपरेशन भी नहीं हुए. हालांकि आईजीएमसी में सीनियर डॉक्टरों ने ओपीडी में सेवाएं दीं, लेकिन भारी भीड़ के चलते मरीजों को घंटों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा. वहीं, डीडीयू अस्पताल में ओपीडी सेवाएं पूरी तरह ठप रहीं. इसके अलावा जिलेभर में भी प्राथमिक स्वास्थ्य केद्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बंद रही.
'न डॉक्टर मिल रहे, न इलाज'
आईजीएमसी में इलाज करवाने पहुंची मीरा देवी ने बताया कि वो दो दिन पहले ही यहां पर पहुंची थी. यहां पहुंचकर उन्हें बहुत दिक्कत आ रही है. डॉक्टरों की उपलब्धता न होने के चलते उन्हें भारी परेशानी हो रही है. उन्होंने बताया कि वो डॉक्टर से भी मिले, लेकिन उन्होंने कहा कि वो अभी हड़ताल पर हैं. इसके कारण सभी लोगों को बहुत परेशानी झेलनी पड़ी है. उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि इस मामले को जल्द सुलझाया जाए. इस मामले में दोनों को ही गलती है, जिससे अब जनता को परेशानी हो रही है.
'बिना इलाज घर लौटे मरीज'
वहीं, शिलाई से आई महिला ने बताया कि वो दिन पहले इलाज करवाने के लिए शिमला आई थी. जब वो घर से चली थी तब यहां ऐसी स्थिति नहीं थी. यहां पहुंचकर पता चला की डॉक्टरों की हड़ताल है. जिसके कारण उन्हें बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. उन्हें यहां पहुंचकर डॉक्टर ही नहीं मिले. शुक्रवार को भी वे आईजीएमसी आए थे. अब बिना इलाज के ही उन्हें घर लौटना पड़ा रहा है. वहीं, अन्य मरीजों ने बताया कि वो टेस्ट करवाने के लिए आए थे, लेकिन डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से टेस्ट नहीं हो सके हैं.
एक तीमारदार सनी ने बताया, "हम मंडी से अपने मरीज को लेकर आए हैं. उनका ऑपरेशन होना था, लेकिन डॉक्टरों की हड़ताल के कारण ऑपरेशन नहीं हुआ और हमें काफी परेशानी उठानी पड़ रही है." कई मरीज सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय कर आईजीएमसी शिमला पहुंचे थे, लेकिन डॉक्टरों की हड़ताल के चलते इलाज की जगह इनके हाथ मायूसी लगी.
जयराम ठाकुर ने राज्य सरकार को घेरा
वहीं, रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल को लेकर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि इस हड़ताल से प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. ये स्थिति अत्यंत चिंताजनक है. ये सीधे तौर पर आम जनता के जीवन और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है. इन हालातों के लिए पूरी तरह राज्य सरकार और मुख्यमंत्री जिम्मेदार हैं, जिनकी लापरवाही, अदूरदर्शी नीतियां और संवादहीनता के कारण यह संकट पैदा हुआ है. उन्होंने कहा कि अगर इस अव्यवस्था के कारण किसी भी को कुछ होता है, तो उसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार और मुख्यमंत्री की होगी. सरकार को राजनीति और प्रचार से बाहर निकलकर प्रदेश की जनता की सेहत और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए.

