IGMC में बिगड़े हालात, 450 डॉक्टर एक साथ हड़ताल पर, OPD में चक्कर लगाते रहे मरीज
IGMC में डॉक्टरों की हड़ताल के चलते शुक्रवार को मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा. मरीज उपचार के लिए ओपीडी के चक्कर काटते रहे.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : December 26, 2025 at 10:36 PM IST
शिमला: इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) शिमला में शुक्रवार को हालात उस समय बिगड़ गए, जब डॉक्टर-मरीज मारपीट मामले में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर पर हुई कार्रवाई के विरोध में करीब 450 रेजिडेंट डॉक्टर सामूहिक अवकाश पर चले गए. डॉक्टरों का कहना है कि इस मामले में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की गई है, जो गलत है. डॉक्टरों की गैरमौजूदगी का सीधा असर अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों पर पड़ा. दूर-दराज क्षेत्रों से आए मरीजों को घंटों इंतजार के बाद बिना इलाज लौटना पड़ा, जिससे अस्पताल परिसर में दिनभर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा.
OPD खाली, मरीज इलाज के लिए भटकते रहे
सुबह अस्पताल खुलते ही मरीज OPD के बाहर कतारों में खड़े दिखे, लेकिन अधिकतर OPD में डॉक्टर मौजूद नहीं थे. सिरमौर जिले के राजगढ़ से आई शकुंतला और राम ने बताया कि वे सुबह-सुबह इलाज के लिए पहुंचे थे, लेकिन डॉक्टर न मिलने के कारण उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ा. कई मरीजों को यह तक नहीं बताया जा सका कि डॉक्टर कब आएंगे.
सुबह 4 बजे घर से निकले मरीज भी लौटे खाली हाथ
रामपुर से आई प्रेम कुमारी ने बताया, "वह सुबह चार बजे घर से निकलकर करीब नौ बजे IGMC पहुंचीं, लेकिन OPD में कोई डॉक्टर नहीं था." लंबा सफर तय करने के बाद भी इलाज न मिल पाने से वह बेहद परेशान नजर आईं. ऐसे कई मरीज थे, जो दिनभर अस्पताल में भटकते रहे.

भीड़ के सामने व्यवस्था फेल
सुबह करीब दस बजे के बाद प्रशासन ने हर OPD में एक-एक डॉक्टर बैठाने का दावा किया, लेकिन मरीजों की भारी भीड़ के सामने यह व्यवस्था नाकाफी साबित हुई. कमला नेहरू अस्पताल और रिपन अस्पताल में भी यही हाल रहा. मरीजों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ा और कई लोग बिना इलाज लौट गए।
ऑपरेशन ठप, 50 की जगह सिर्फ 2 सर्जरी हुई
IGMC में रोजाना करीब 50 जनरल ऑपरेशन होते हैं, लेकिन डॉक्टरों की छुट्टी के कारण शुक्रवार को केवल दो बेहद जरूरी ऑर्थोपेडिक ऑपरेशन ही हो पाए. बाकी सभी निर्धारित ऑपरेशन टाल दिए गए, जिससे मरीजों की परेशानी और बढ़ गई.

एम्बुलेंस नहीं पहुंचीं, निजी साधनों से आए मरीज
डॉक्टरों के साथ-साथ 102 और 108 एम्बुलेंस सेवाओं की हड़ताल का असर भी साफ दिखा. आपातकालीन विभाग में एम्बुलेंस से मरीज नहीं पहुंचे. कई मरीजों को टैक्सी या निजी एम्बुलेंस के सहारे अस्पताल लाया गया, जिससे उन्हें आर्थिक और शारीरिक दोनों तरह की दिक्कतें झेलनी पड़ीं.
अब और बढ़ेगी मरीजों की मुश्किल
शाम होते-होते रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA) ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया. संगठन ने स्पष्ट किया है कि 27 दिसंबर से सभी रूटीन सेवाएं, OPD और वैकल्पिक ऑपरेशन बंद रहेंगे. केवल आपात सेवाएं ही जारी रहेंगी. ऐसे में आने वाले दिनों में मरीजों की परेशानियां और बढ़ने की आशंका है.

क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि IGMC में मरीज से मारपीट के एक मामले में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर राघव नरुला को पहले निलंबित और बाद में सेवाओं से बर्खास्त कर दिया गया था. इसी कार्रवाई के विरोध में डॉक्टरों ने पहले सामूहिक अवकाश और अब अनिश्चितकालीन हड़ताल का फैसला लिया है.
ये भी पढ़ें: रेजिडेंट डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान, मरीजों को झेलनी पड़ेगी परेशानी

