अस्पताल जाने वाले मरीज सावधान! डॉक्टरों का आज सामूहिक अवकाश, एंबुलेंस कर्मचारी हड़ताल पर, झेलनी पड़ सकती है परेशानी
हिमाचल में आज डॉक्टरों के सामूहिक अवकाश और एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल ने मरीजों के लिए परेशानी बढ़ा दी है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : December 26, 2025 at 7:40 AM IST
|Updated : December 26, 2025 at 2:18 PM IST
शिमला: आज शिमला में मरीजों को इलाज के भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी शिमला में आज डॉक्टरों की सामूहिक छुट्टी हैं. ऐसे में इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) में इलाज के लिए आए मरीजों को निराश होना पड़ सकता है. वहीं, प्रदेशभर में आज 108-102 एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल है. जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहने की आशंका है.
छुट्टी पर सभी डॉक्टर
आईजीएमसी शिमला में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर राघव नरूला की सेवा समाप्ति के विरोध में आज डॉक्टर सामूहिक आकस्मिक अवकाश (mass casual leave) पर हैं. रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA), कंसल्टेंट्स और सीनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (CSA) और SAMDCOT के समर्थन में डॉक्टरों ने एकजुट होकर शुक्रवार को सामूहिक अवकाश का ऐलान किया है. डॉक्टर संगठनों ने साफ किया है कि अगर 27 दिसंबर को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से प्रस्तावित बैठक में समाधान नहीं निकला, तो कल से IGMC में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी. इसका सीधा असर प्रदेश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य संस्था पर पड़ेगा.
मरीजों की बढ़ेगी परेशानियां!
सभी डॉक्टरों की छुट्टी के चलते IGMC में ओपीडी, रूटीन जांच और वैकल्पिक ऑपरेशन सेवाएं प्रभावित होने की संभावना है. हालांकि आपातकालीन सेवाओं को सीमित स्तर पर जारी रखने का दावा किया गया है, लेकिन मरीजों की भीड़ बढ़ने से दिक्कतें हो सकती हैं. ऐसे में आज लोग इलाज के लिए सोच-समझ कर ही आईजीएमसी शिमला जाएं. वहीं, डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल को लेकर भी चेतावनी दी है, ऐसे में मरीजों को और ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.
क्यों सामूहिक अवकाश पर गए डॉक्टर ?
गौरतलब है कि आईजीएमसी में 22 दिसंबर को डॉक्टर और मरीज के बीच हुई मारपीट मामले में सरकार ने सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर राघव नरूला की सेवा समाप्ति के आदेश दिए. यह कार्रवाई मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के सख्त रुख के बाद की गई. जिसके खिलाफ डॉक्टर संगठनों ने मोर्चा खोला है. डॉक्टर संगठनों का कहना है कि डॉ. राघव नरूला की सेवा समाप्ति का आदेश अन्यायपूर्ण है और इसे तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाना चाहिए. उनका आरोप है कि जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और एकतरफा कार्रवाई की गई. बिना सभी पक्षों को सुने सीधे बर्खास्तगी का फैसला लेना डॉक्टर समुदाय के मनोबल को तोड़ने वाला कदम है.
प्रदेशभर में एंबुलेंस सेवाएं बंद
वहीं, आज प्रदेशभर में 108 और 102 एंबुलेंस सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों की 48 घंटे की हड़ताल के चलते आपातकालीन परिवहन सेवाएं भी बाधित हो सकती हैं. कर्मचारियों ने बीती रात से काम बंद कर दिया है, जिससे गंभीर मरीजों तक समय पर एंबुलेंस पहुंचना मुश्किल हो सकता है. सरकार ने एंबुलेंस सेवाओं पर आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) लागू कर रखा है. इसके बावजूद कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं. यूनियन नेताओं का कहना है कि कर्मचारियों का लंबे समय से शोषण हो रहा है और मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ा. हालांकि आईजीएमसी एंबुलेंस सेवा इंटक यूनियन के अध्यक्ष पूर्ण चंद ने इस हड़ताल से दूरी बना ली है. उन्होंने कहा कि एंबुलेंस कर्मियों से जुड़ा मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है. ऐसे में यूनियन किसी भी तरह की हड़ताल का समर्थन नहीं करती है.
"108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन की मांगों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री से भी मुलाकात की जा चुकी है, लेकिन अभी तक कोई भी समाधान नहीं निकल पाया है. ऐसे में अब कर्मचारियों ने दो दिनों का राज्यव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है. कोर्ट ने भी कर्मचारियों के पक्ष में कंपनियों को निर्देश दे चुका है, लेकिन अभी तक कंपनी अपने अड़ियल रवैये पर खड़ी हुई है. जिसके चलते एंबुलेंस कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर लगातार सरकार और प्रशासन के आगे हाथ जोड़ रहे हैं. वहीं, कंपनी की ओर से एंबुलेंस कर्मचारियों को मानसिक प्रताड़ित किया जा रहा है और उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया जा रहा है." - राकेश कुमार, सीटू जिलाध्यक्ष
ये हैं कर्मचारियों की मुख्य मांगे
- सरकारी नियमानुसार न्यूनतम वेतन का भुगतान किया जाए.
- 12 घंटे कार्य करने पर नियमानुसार डबल ओवरटाइम वेतन और सभी छुट्टियों का प्रावधान किया जाए.
- गाड़ियों की मेंटेनेंस व इंश्योरेंस के दौरान कर्मचारियों का वेतन न काटा जाए, पूरे वेतन का भुगतान किया जाए.
- हिमाचल हाईकोर्ट, लेबर कोर्ट, सीजेएम कोर्ट शिमला और श्रम विभाग के न्यूनतम वेतन के संदर्भ में आदेशों को तुरंत लागू किया जाए.

