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दिमाग में पानी भरने के कारण सिर का आकार सामान्य से दोगुना हुआ; बच्चे का KGMU में हुआ सफल ऑपरेशन

पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉ. जेडी रावत ने बताया कि विकास महतो के बच्चे को दिमाग में पानी भरने की जन्मजात बीमारी थी.

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दिमाग में पानी भरने की वजह से सिर का साइज दोगुना हुआ. (Photo Credit: ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : January 10, 2026 at 10:47 PM IST

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लखनऊ: केजीएमयू पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने 11 माह के मासूम के सिर की सर्जरी कर उसे नया जीवन दिया है. जन्म से ही बच्चे के दिमाग में पानी भर गया था. यह धीरे-धीरे बढ़ रहा था. नतीजतन बच्चे के सिर का साइज सामान्य से दोगुना हो गया था.

दिमाग में पानी भर गया था: पेडियाट्रिक सर्जरी विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉ. जेडी रावत ने बताया कि आलमबाग स्थित जेल रोड निवासी विकास महतो के बच्चे को दिमाग में पानी भरने की जन्मजात बीमारी थी. मेडिकल साइंस में इस बीामरी को हाइड्रोसिफ़लस (दिमाग में पानी भरना) कहते हैं. यह बीमारी एक हजार में एक बच्चे को होती है. इसमें बच्चे का सिर का आकार सामान्य से दोगुना बड़ा हो गया था.

दो महीने तक आईसीयू में रखना पड़ा: उसकी आंखें तक बंद होने लगी थी. गर्भावस्था के आठवें महीने में ही डॉक्टरों ने परिवारीजनों को बच्चे के सिर में पानी होने की जानकारी दी थी. जन्म के बाद संक्रमण के कारण बच्चे को दो महीने तक आईसीयू में रखना पड़ा. निजी कारणों से समय पर इलाज नहीं हो सका, जिससे बच्चे का सिर असामान्य रूप से बड़ा हो गया.

सिर का आकार 84 सेंटीमीटर था: परिवारीजनों ने पहले तो बच्चे को कई अस्पतालों में दिखाया. इलाज कराया, लेकिन फायदा नहीं हुआ. परिवारीजन बच्चे को लेकर केजीएमयू पहुंचे. यहां पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में दिखाया. जांच के बाद बच्चे के सिर का ऑपरेशन करने की सलाह दी. डॉ. जेडी रावत ने बताया कि सामान्य रूप से 11 महीने में बच्चे के सिर का व्यास 43 से 47 सेंटीमीटर होता है, लेकिन इस बच्चे के सिर का आकार 84 सेंटीमीटर था.

8 जनवरी की केजीएमयू में हुई थी सर्जरी: इस वजह से उसकी आंखें भी दब रहीं थीं. 8 जनवरी को बच्चे की शंट डालकर सर्जरी की गई. सर्जरी के बाद बच्चे के सिर का पानी कम हो रहा है. ऑपरेशन के बाद से बच्चे के सिर का आकार सामान्य अवस्था में पहुंच रहा है. उसकी तबीयत में भी सुधार हो रहा है.

दो लाख की सर्जरी केवल 10 हजार रुपये में हुई: पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के डॉ. राहुल जैन ने बताया कि यूपी में इस तरह का इलाज सरकारी स्तर पर सिर्फ केजीएमयू में उपलब्ध है. निजी अस्पतालों में इस सर्जरी का खर्च करीब दो लाख रुपये तक आता है. केजीएमयू में पूरे इलाज पर लगभग 10 हजार रुपये खर्च हुए हैं.

ये हैं ऑपरेशन टीम के सदस्य: ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. जेडी रावत, डॉ. प्रीति कुमारी, एनस्थीसिया विभाग की डॉ. आयुषी बग्गा, नर्सिंग स्टाफ संजय और संतोष शामिल रहे.

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