कुशीनगर में कोर्ट का फैसला; पत्नी और दो मासूम बच्चों की हत्या में पति दोषी करार, फांसी की सजा
कोर्ट ने माना-निर्मम हत्याकांड, दोषी पर 3 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : May 29, 2026 at 8:37 PM IST
कुशीनगर : जिले के तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र में साल 2021 में हुए तिहरे हत्याकांड में जिला सत्र न्यायालय ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाया है. सत्र न्यायाधीश संजीव कुमार त्यागी की अदालत ने हत्या के इस गंभीरतम मामले में आरोपी राजेश गुप्ता को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी करार दिया और फांसी पर लटकाने का आदेश जारी किया. कोर्ट ने दोषी पर 3 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है.
जिला शासकीय अधिवक्ता गोरख प्रसाद यादव ने निर्णय की जानकारी दी. बताया कि अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत परिस्थितिजन्य साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बरामद हथियार और अन्य साक्ष्य आपस में मजबूती से जुड़े हुए हैं, जिससे यह सिद्ध होता है कि आरोपी ने ही अपनी पत्नी और दो बच्चों की हत्या की थी. न्यायालय ने आरोपी को दोषसिद्ध घोषित करते हुए अपरान्ह सजा का ऐलान सुनाई.
अभियोजन के अनुसार, जिले के तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र के किशुनदासपट्टी निवासी राजेश गुप्ता ने 6 सितंबर 2021 की रात अपनी पत्नी निक्की गुप्ता तथा दो मासूम बेटों शिवम और आयुष की गला रेतकर हत्या कर दी थी. मामले में मृतका के भाई अमर गुप्ता ने तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया था. तहरीर में कहा गया था कि रात करीब 11: 30 बजे आरोपी ने पत्नी और दोनों बच्चों की हत्या कर दी, जिसके बाद तीनों के शव घर में पड़े मिले थे.
इस मामले में थाना तुर्कपट्टी पर मुकदमा दर्ज किया गया था. विवेचना के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, जिस पर न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 11 गवाह पेश किए गए. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि घटनास्थल, एफआईआर का समय, पंचायतनामा, बरामद हथियार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा मृतकों के गले पर कटे घाव जैसे तथ्य आरोपी के अपराध को प्रमाणित करते हैं.
सजा पर बहस के दौरान जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) जीपी यादव ने इसे “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” श्रेणी का मामला बताते हुए मृत्युदंड की मांग की. अभियोजन का तर्क था कि आरोपी ने अपनी पत्नी और दो मासूम बच्चों की निर्मम तरीके से हत्या की तथा अपराध स्वीकार भी किया. वहीं, बहस के दौरान बचाव पक्ष की ओर से कम से कम सजा दिए जाने की अपील की गई. जिला सत्र न्यायालय ने आरोपी को दोषसिद्ध करार देते हुए धारा 302 के अंतर्गत तीन लाख रुपए जुर्माने के साथ मृत्युदंड की सजा सुनाई.
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