सिंगरौली कोल ब्लॉक आवंटन को लेकर विधानसभा में जोरदार हंगामा, कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप
सिंगरौली कोल ब्लॉक आवंटन में अपात्र लोगों को मुआवजा देने और पात्र को मुआवजा नहीं देने के आरोप, विधानसभा दो बार करनी पड़ी स्थगित

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 26, 2026 at 7:11 PM IST
रिपोर्ट : विश्वास चतुर्वेदी
भोपाल : सिंगरौली के कोल ब्लॉक को लेकर गुरुवार को विधानसभा में जोरदार हंगामा हुआ. पुलिस अधिकारियों की पत्नियों को लाखों रुपये मुआवजा दिए जाने के आरोपों के बीच सततापक्ष और विपक्ष के बीच काफी नोंकझोंक हुई. इस मामले में कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा स्तर पर जांच समिति बनाने की मांग को लेकर सदन में नारेबाजी की. इस हंगामे के चलते सदन की कार्रवाई दो बार स्थगित करनी पड़ी और बाद में कांग्रेस ने वॉक आउट कर दिया.
भिंड के रहने वालों को मुआवजा, सिंगरौली के रहवासियों को इंतजार
विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सिंगरौली में खदान से प्रभावित वास्तविक आदिवासी परिवारों को मुआवजा नहीं मिला, जबकि सरई थाना प्रभारी जितेंद्र भदौरिया की पत्नी प्रियंका सिंह के खाते में 15,94,990 रु और यातायात प्रभारी दीपेंद्र सिंह कुशवाह की पत्नी स्वाति सिंह के खाते में 14,42,482 रु मुआवजा भेजा गया. सिंघार ने कहा कि दोनों परिवार भिंड के निवासी हैं और आदिवासी भी नहीं हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि बाहर से आकर घर बनाने वालों को मुआवजा मिल गया, लेकिन मूल प्रभावित परिवार अब भी इंतजार कर रहे हैं.
368 में से 144 करोड़ रु का वितरण
राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने आरोपों को गंभीर बताते हुए कहा, '' यदि किसी अपात्र को भुगतान हुआ है तो जांच कराई जाएगी. परियोजना में 1552 किसान प्रभावित हैं और 368 करोड़ रु का मुआवजा स्वीकृत किया गया है. अब तक 144 करोड़ रु वितरित किए जा चुके हैं, जबकि 223 करोड़ रु वितरण की प्रक्रिया में हैं.'' मंत्री ने कहा, '' रजिस्ट्री भूमि पर पेड़ कटाई का काम शुरू हुआ है, लेकिन कोयला खनन शुरू नहीं हुआ. यदि मुआवजा वितरण में देरी होगी तो 12 प्रतिशत ब्याज भी दिया जाएगा. विस्थापितों को मकान और नौकरी देने का भी प्रावधान है.''

नेता प्रतिपक्ष का आरोप 12,998 परिवार प्रभावित
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दावा किया है कि कलेक्टर सूची के अनुसार 8 गांवों के 12,998 परिवार प्रभावित हैं और कई लोगों को पूरा मुआवजा नहीं मिला. उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र तोमर से सदन की कमेटी बनाकर जांच कराने की मांग की. अध्यक्ष ने कहा कि मंत्री स्वयं जांच का आश्वासन दे रहे हैं, इसलिए अलग समिति की आवश्यकता नहीं है. इस बीच पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा, '' अधिग्रहण की प्रक्रिया कानून के तय मापदंडों के अनुसार होती है और पात्र व्यक्ति को मुआवजा मिलना सरकार की जिम्मेदारी है. यदि किसी तरह की अनियमितता हुई है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी.''
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सिंगरौली जिले की प्रभारी मंत्री संपतिया उइके ने कहा, '' पांच गांवों में अधिग्रहण हुआ है और लगभग 33 हजार पेड़ काटे गए हैं, लेकिन अभी कोयला निकासी शुरू नहीं हुई है.'' उन्होंने स्पष्ट किया कि शेष प्रभावितों को मुआवजा मिलने के बाद ही खनन शुरू होगा. वहीं मंत्री करण सिंह वर्मा के लिखित जवाब के अनुसार परियोजना के लिए कुल 2672 हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित है, जिसमें निजी, शासकीय और वनभूमि शामिल है. निजी भूमि के लिए 504 करोड़ रु से अधिक का अवार्ड पारित किया जा चुका है. लेकिन कांग्रेस विधायक इस मामले में विधानसभा की कमेटी बनाने की मांग करते रहे.

