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HSGPC विवाद: झिंडा का दादूवाल पर बड़ा हमला, बोले- "गोलक की एक-एक पाई का होगा हिसाब"

HSGPC विवाद में झिंडा ने दादूवाल पर करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार करने के आरोप लगाए.

HSGPC CONTROVERSY
झिंडा का दादूवाल पर बड़ा हमला (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : February 19, 2026 at 2:50 PM IST

3 Min Read
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कुरुक्षेत्र: हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (HSGPC) में चल रहे विवाद के बीच कमेटी के प्रधान जगदीश सिंह झिंडा ने कुरुक्षेत्र स्थित गुरुद्वारा 6वीं पातशाही में प्रेस वार्ता कर अपने ऊपर लगे आरोपों पर खुलकर जवाब दिया. उन्होंने कहा कि, "उन पर लगाए जा रहे सभी आरोप राजनीतिक द्वेष और निजी स्वार्थ से प्रेरित हैं. झिंडा ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य कमेटी को सर्वसम्मति से चलाना था, न कि किसी गुटबाजी को बढ़ावा देना." उन्होंने दावा किया कि गठन के बाद वे स्वयं 40 सदस्यों के घर-घर जाकर बैठक में शामिल होने का आग्रह करते रहे.

प्रधान पद नहीं, सर्वसम्मति थी प्राथमिकता: झिंडा ने कहा कि, "हम स्वयं प्रधान पद के इच्छुक नहीं थे और चाहते थे कि कमेटी आपसी सहमति से कार्य करे. कुछ शर्तें सरकार की ओर से रखी गई थीं, जिनमें बलजीत सिंह दादूवाल को धर्म प्रचार कमेटी का चेयरमैन बनाने की बात शामिल थी. संबंधित व्यक्ति ने धर्म प्रचार और अपने निजी चैनल के लिए प्रतिदिन लगभग एक लाख रुपये खर्च की मांग की, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया. गुरु घर की गोलक लुटने नहीं दी जाएगी. यह धन शिक्षा, अस्पताल और समाज सेवा के लिए है."

HSGPC विवाद (Etv Bharat)

दादूवाल पर गंभीर आरोप: प्रेस वार्ता के दौरान झिंडा ने बलजीत सिंह दादूवाल पर 2014 से 2025 के बीच कमेटी के नाम पर करोड़ों रुपये एकत्र करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि, "इस पूरे मामले को अदालत में ले जाया जाएगा और एक-एक लेन-देन की जांच कराई जाएगी. झिंडा ने आरोप लगाया कि संबंधित व्यक्ति 18 महीने तक भाजपा के समर्थन से पद पर बना रहा, जिससे कमेटी में लगातार विवाद की स्थिति बनी रही."

सरकारी हस्तक्षेप पर सवाल: झिंडा ने कहा कि जब तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा 38 सदस्यीय नई कमेटी गठित की गई, तब उन्हें भी सदस्य चुना गया था, लेकिन उन्होंने सरकारी हस्तक्षेप का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया. उनका कहना था कि गुरु घर की कमेटी में सरकार का दखल उचित नहीं है और इससे धार्मिक संस्थाओं की स्वायत्तता प्रभावित होती है.

दो-तिहाई बहुमत पर आपत्ति: कमेटी में कोरम और बहुमत के मुद्दे पर झिंडा ने कहा कि, "दो-तिहाई बहुमत की शर्त संविधान के अनुरूप नहीं है. उन्होंने बताया कि उनके पास दो-तिहाई बहुमत से एक सदस्य कम है, लेकिन साधारण बहुमत से निर्णय लिया जाना चाहिए." उन्होंने सिख न्यायिक आयोग और सरकार से बजट पारित करने की अपील की, ताकि गुरु घरों के विकास, शिक्षा संस्थानों और गरीबों की सहायता से जुड़े कार्य पूरे किए जा सकें.

26 तारीख को बैठक, समाधान की उम्मीद: झिंडा ने जानकारी दी कि 26 तारीख को सभी सदस्यों की एक अनौपचारिक बैठक बुलाई गई है, जिसमें लंबित मुद्दों पर चर्चा कर समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी. यदि उन पर कोई भी आरोप साबित होता है तो वे जवाबदेही से पीछे नहीं हटेंगे. साथ ही दोहराया कि गुरु घर की मर्यादा और संगत के हितों से किसी भी सूरत में समझौता नहीं किया जाएगा.

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