न पेपर लीक, न परीक्षा में धांधली, देश के लिए मिसाल बना हिमाचल लोक सेवा आयोग, जानिए कमीशन के मुखिया रामेश्वर ठाकुर की कड़क कार्यप्रणाली
नीट सहित देश के अन्य राज्यों में हो रहे पेपर लीक को लेकर ईटीवी भारत ने HPPSC चेयरमैन से की एक्सक्लूसिव इंटरव्यू.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 15, 2026 at 8:49 PM IST
|Updated : August 15, 2026 at 8:55 PM IST
शिमला: विशाल देश भारत इस समय नीट परीक्षा, झारखंड लोक सेवा आयोग विवाद और पंजाब में पेपर लीक जैसी घटनाओं के कारण अपने युवाओं के आक्रोश से उबल रहा है. ठीक ऐसे समय में हिमाचल प्रदेश लोग सेवा आयोग एक मिसाल पेश करते हुए परीक्षाओं की शुद्धता के ऊंचे पायदान पर खड़ा है. न कोई पेपर लीक न परीक्षा में देरी और न ही आयोग के दामन पर किसी विवाद के छींटे, यह सब संभव हुआ है एक कठोर प्रशासक की सतर्क सेवाओं के कारण.
जी हां, हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के चेयरमैन रामेश्वर सिंह ठाकुर के मार्गदर्शन में यह संस्था देश के सामने उदाहरण पेश कर रही है. इससे पहले कि हम आयोग की कार्यप्रणाली पर चर्चा करें कुछ शब्द कैप्टन रामेश्वर सिंह ठाकुर के व्यक्तित्व पर दर्ज करना जरूरी है. कैप्टन रामेश्वर सिंह ठाकुर के खाते में दर्ज उपलब्धियां किसी को भी चमत्कृत कर सकती हैं. भारतीय सेना में कैप्टन, एसपीजी सेवाओं के दौरान देश के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह सहित पूर्व प्रधानमंत्रियों आईके गुजराल, एचडी देवगौड़ा की सुरक्षा व्यवस्था संभालने के बाद आईपीएस अधिकारी के तौर पर राष्ट्रपति पुलिस मेडल, एशिया में वाइल्ड लाइफ क्राइम के खिलाफ अभियान के लिए इंटरपोल एप्रिसिएशन सहित अन्य अनेक उपलब्धियां कैप्टन ठाकुर को एक प्रेरक व्यक्तित्व बनाती हैं. ईटीवी भारत ने हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग से चेयरमैन से बातचीत की है.
'हम लोग ही सिस्टम को करते हैं फेल'
हाल में देशभर में नीट परीक्षा और झारखंड लोकसेवा आयोग में परीक्षा विवादों पर पूछे गए सवाल के जवाब में हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कहा, "यह विवाद अभी शुरू नहीं हुआ है. पहले भी इस तरह के विवाद होते रहे हैं. एग्जाम करने वाली एजेंसियां सिस्टम तो अच्छा बनाती है, लेकिन जब सिस्टम से खिलवाड़ करते हैं या उसमें घुसने की कोशिश करते हैं तो उसमें कुछ ना कुछ गड़बड़ होने का अंदेशा रहता है. अगर सिस्टम में जो एसओपी बनाई गई है और नियम बने हैं, उसके हिसाब से सिस्टम को चलाएं तो मेरा मानना है कि सिस्टम कभी फेल नहीं हो सकता है, उसको हम लोग ही फेल करते हैं".
परीक्षा एजेंसियों पर अब अधिक नजर
परीक्षाओं को लेकर क्या पहले भी विवाद होते थे, इस सवाल के जवाब में लोक सेवा आयोग के चेयरमैन रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कहा कि पहले भी विवाद होते थे. वर्ष 2019-20 में भी नीट के ऑनलाइन एग्जाम में लीकेज हुई थी. बाकी एजेंसी में भी कभी ना कभी इस तरह के विवाद आते रहे हैं. अब बेरोजगारी बहुत बढ़ चुकी है. बच्चों को भविष्य की चिंता रहती है. इसलिए परीक्षा एजेंसियों पर अब लोगों की अधिक नजर रहती है. इससे मामले अब अधिक उजागर हो रहे हैं.
रुल्स के हिसाब से चले संस्थाएं
भविष्य में परीक्षा में होने वाली धांधलियों को रोके जाने के प्रश्न के उत्तर में रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कहा कि जो एसओपी बनाई है, उसके हिसाब से चलें तो मुझे नहीं लगता है कि इस तरह का अंदेशा होगा. यूपीएससी के ऊपर कभी उंगली नहीं उठी. अगर हर संस्था रूल के हिसाब से चले किसी व्यक्ति विशेष को ध्यान में रखकर काम ना करें तो कभी इस तरह की समस्या नहीं आएगी.
चीजों को छुपाने पर आती है दिक्कतें
परीक्षा को लेकर उपजे विवाद के बाद लोगों में कैसे परीक्षा एजेंसियों के प्रति खोया गया विश्वास कैसे लौट सके, इस सवाल के जवाब में चेयरमैन रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कहा कि परीक्षा में पारदर्शिता होनी चाहिए. कार्य प्रणाली में पूरी पारदर्शिता और सब कुछ खुला होना चाहिए, लेकिन जहां चीजों को किसी बहाने से छुपाया जाता है तो वहीं ज्यादा दिक्कतें आती हैं.
सही जगह पर अच्छे व्यक्ति की जरूरत
परीक्षा एजेंसियों पर खोये विश्वास को वापस कैसे लौटेगा, इसको लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कहा कि अगर लोक सेवा आयोग पर ही विश्वास खत्म हो जाए तो देश और संस्थाओं के लिए यह खराब है. पारदर्शिता लाने में ज्यादा समय नहीं लगता है, लेकिन आपको सही सिस्टम बनाना पड़ेगा और अच्छे व्यक्ति को सही जगह बैठाना होगा तो सिस्टम को सुधारने में ज्यादा वक्त नहीं लगता है.
कमीशन ने बनाए नए रिकॉर्ड
हिमाचल लोक सेवा आयोग में आपके कार्यकाल में हुई परीक्षाओं के सवाल के जवाब में रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कहा कि हम ग्रुप ए और बी की नियुक्तियां करते हैं. मुख्यतः हम क्लास वन और टू का ले तो मेरे चार साल के टर्म में पहली बार कमीशन की भर्ती चार फिगर में पहुंची है. हमने हजारों भर्तियां की हैं. जिसमें वर्ष 2023-24 में हमने करीब 1400 भर्तियां की थी. इसी तरह से वर्ष 2024-25 में हमने करीब 900 भर्तियां की. वहीं, 2025-26 खत्म हुए साल में हमने करीब 1448 भर्तियां की, जो बहुत बड़ी उपलब्धि है.
उन्होंने कहा कि आज तक तीन से चौथी फिगर में हम नहीं जा पाए थे. घर के पास रिसोर्स कम होने से भर्तियां कम हुई है, लेकिन फिर भी कमीशन ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. हमने HAS में परीक्षा के लिए विज्ञापन निकालने के बाद उसी साल में रिजल्ट निकालने का नया रिकॉर्ड बनाया था, जो आज तक कभी नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि हमने परीक्षा की टाइम लिमिट फिक्स की है. हम कोशिश करते हैं कि 6 से 9 महीने में परीक्षा के विज्ञापन से लेकर रिजल्ट तक घोषित किया जा सकें.
कभी प्रेशर अनुभव नहीं किया
हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पर किसी तरह का प्रेशर आने पर पूछे गए सवाल के जवाब में रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रेशर व्यक्ति पर निर्भर करता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता अपने कामों को लेकर नुमाइंदों के पास जाती है। लेकिन लोक सेवा आयोग के चेयरमैन का संवैधानिक पद है। सरकार इस पद पर हमको लगती है। लेकिन फिर संवैधानिक व्यवस्था में आने के बाद अगर हम कुछ गलत नहीं करेंगे तो कोई हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। इसलिए हम पर प्रेशर नहीं आता है और न ही लेना पड़ता है। उन्होंने कहा कि मैंने अपने चाल सालों के कार्यकाल में कोई प्रेशर अनुभव नहीं किया.
ब्लैक एंड व्हाइट होना चाहिए सिस्टम
परीक्षाओं में धांधलियों को रोके जाने के सवाल के जवाब में हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग चेयरमैन ने कहा कि हमको सिस्टम को ब्लैक एंड व्हाइट में डालना होगा. ताकि उसको कोई व्यक्ति छेड़ न सके. कई चीजों को पब्लिक डोमेन में रखना पड़ेगा. जब मैं यहां आया था तो बच्चों को आरटीआई के माध्यम से परीक्षा में हासिल हुए अपने अंको की जानकारी लेनी पड़ती थी. लेकिन हम मैरिट बनाकर सभी के मार्क्स को साइट पर डाल देते हैं. इससे बच्चों और लोगों में विश्वास बढ़ता है. हमको ट्रांसपेरेंसी बढ़ाने के लिए कार्य करने के तरीके को ओपन रखना होगा. अभी ज्यादातर कमीशन इसी पद्धति को फॉलो कर रहे हैं.
कानून की नहीं कमी, लेकिन इंप्लीमेंटेशन जरूरी
लोक परीक्षा संशोधन विधेयक के सवाल के जवाब में हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कहा कि सरकार ने नीट मामले विवाद के बाद लोक परीक्षा में अमेंडमेंट भी की है, जिसमें सजा को और ज्यादा बढ़ाया गया है. उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि हिन्दुस्तान में कानून की कोई कमी नहीं है, लेकिन उसकी इंप्लीमेंटेशन महत्वपूर्ण है. अगर किसी दोषी को हम सजा नहीं दे पाए तो कानून का कोई फायदा नहीं है.

