आउटसोर्स कर्मचारियों ने विधानसभा के बाहर किया प्रदर्शन, जानें सरकार को क्यों दिया 2 माह का अल्टीमेटम
मानसून सत्र के दौरान शिमला में आउटसोर्स कर्मचारियों जोरदार प्रदर्शन किया. कर्मचारियों ने सरकार के सामने 3 मांगें रखी हैं.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 25, 2026 at 5:23 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को प्रदेशभर से आए सैकड़ों आउटसोर्स कर्मचारियों ने विधानसभा के बाहर प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ रोष जताया. कर्मचारियों ने लंबे समय से सेवाएं देने के बावजूद नौकरी की सुरक्षा न मिलने और कम मानदेय दिए जाने का मुद्दा उठाते हुए सरकार से आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति बनाने की मांग की. वहीं, सदन के भीतर भी आउटसोर्स भर्ती के मुद्दे पर विपक्ष ने हंगामा किया और वॉकआउट किया.
चौड़ा मैदान में प्रदर्शन के दौरान आउटसोर्स कर्मचारियों ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में करीब 25 हजार कर्मचारी आउटसोर्स आधार पर सेवाएं दे रहे हैं. इनमें कई कर्मचारी 15 से 20 वर्षों से लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके भविष्य को लेकर कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई है. कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार जब चाहे उन्हें नौकरी से बाहर कर सकती है और उन्हें बेहद कम मानदेय पर काम करना पड़ रहा है.
'कम मानदेय पर करना पड़ रहा काम'
कर्मचारियों के अनुसार, अधिकांश आउटसोर्स कर्मियों को करीब 12 हजार रुपये मासिक मानदेय मिल रहा है. मौजूदा महंगाई के दौर में इतनी कम राशि में परिवार का पालन-पोषण करना बेहद मुश्किल हो गया है. कर्मचारियों ने कहा कि वे पिछले करीब एक दशक से अपने लिए स्थायी नीति बनाने की मांग कर रहे हैं. पूर्व सरकार के कार्यकाल में भी उन्होंने लंबा आंदोलन किया था, लेकिन उनकी मांग पूरी नहीं हो सकी थी.
सरकार को दो महीने का अल्टीमेटम
आउटसोर्स कर्मचारी संघ ने सरकार को अपनी तीन प्रमुख मांगें रखी हैं. उनकी पहली मांग नौकरी की सुरक्षा, समान काम और समान वेतन, जिन कर्मचारियों की नौकरी के दौरान मृत्यु या दिव्यांग हुए हैं उन्हें उचित मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी दी जाए. सरकार के पास इन्हें पूरा करने के लिए दो महीने का समय है. कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि तय अवधि में मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे आंदोलन को और तेज करने के लिए मजबूर होंगे. आ
नौकरी की सुरक्षा सबसे बड़ी मांग
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि 15 से 20 वर्षों तक सरकारी विभागों में सेवाएं देने के बावजूद उन्हें हर महीने इस चिंता में रहना पड़ता है कि अगले महीने नौकरी रहेगी या नहीं. कम मानदेय और नौकरी की असुरक्षा ने कर्मचारियों के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है. उनका कहना है कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के अनुभव और सेवाकाल को ध्यान में रखते हुए सरकार को जल्द ठोस नीति बनानी चाहिए.
आउटसोर्स कर्मचारी संघ के कन्वीनर अश्वनी शर्मा ने कहा कि 'कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं. उन्होंने कहा कि सरकार को दो महीने का समय दिया गया है और उम्मीद है कि इस अवधि में कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू शोषित वर्गों के हित में फैसले ले रहे हैं, इसलिए आउटसोर्स कर्मचारियों को भी मुख्यमंत्री से काफी उम्मीदें हैं.'
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