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एचपी शिवा में पौधों की गुणवत्ता पर उठे सवाल तो बागवानी मंत्री ने दिए सख्त निर्देश, अब नर्सरी से क्लस्टर तक होगी निगरानी

बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने दिए निर्देश हिमाचल में अब पौधों की सप्लाई के दौरान नर्सरी में अधिकारी की तैनाती होगी.

Horticulture Minister Jagat Singh Negi Held Review meeting
नर्सरी से क्लस्टर तक होगी पौधों की निगरानी (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : August 30, 2026 at 10:38 AM IST

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Updated : August 30, 2026 at 10:47 AM IST

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शिमला: हिमाचल की बागवानी को नई दिशा देने के लिए चल रही एचपी शिवा परियोजना में अब पौधों की गुणवत्ता को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. एशियाई विकास बैंक से वित्तपोषित इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत प्रदेश के सात जिलों में बड़े पैमाने पर पौधरोपण और खेत तैयार करने का काम चल रहा है. लक्ष्य मार्च 2027 तक 3 हजार हेक्टेयर भूमि को फल उत्पादन के लिए तैयार कर पौधे लगाने का है, लेकिन इसी बीच कुछ क्लस्टरों में नर्सरियों से पहुंचे पौधे निर्धारित तकनीकी मानकों पर खरे नहीं उतरने का मामला सामने आया है.

समीक्षा बैठक में जब यह मुद्दा सामने आया तो राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जनशिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी ने इसे गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों और नर्सरी संचालकों को स्पष्ट निर्देश जारी किए. अब पौधों की सप्लाई के दौरान नर्सरी में अधिकारी की तैनाती होगी और क्लस्टर तक पहुंचने वाले हर पौधे की गुणवत्ता एवं तकनीकी मानकों पर नजर रखी जाएगी.

Horticulture Minister Jagat Singh Negi Held Review meeting
बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक (@DIPR)

मंडी सबसे आगे, 993 हेक्टेयर में पौधरोपण पूरा

बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में शिमला में आयोजित समीक्षा बैठक में एचपी शिवा परियोजना के तहत पौधरोपण और फील्ड प्रिपरेशन कार्यों की प्रगति का जायजा लिया गया. इस बैठक में जुलाई 2026 में हुई पिछली समीक्षा बैठक में तय किए गए कार्य-बिंदुओं और दिशा-निर्देशों के अनुपालन की भी समीक्षा की गई. अधिकारियों ने बताया कि मंडी जिले ने करीब 993 हेक्टेयर भूमि में पौधे लगाने का काम पूरा कर लिया है, जो एचपी शिवा परियोजना के तहत शामिल सभी सात जिलों में सर्वाधिक प्रगति है. परियोजना के तहत मार्च 2027 तक कुल 3 हजार हेक्टेयर भूमि पर पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसके मुकाबले अब तक करीब 2,600 हेक्टेयर भूमि पौधरोपण के लिए तैयार की जा चुकी है.

Plants in nursery
नर्सरी से क्लस्टर तक पौधों की निगरानी (ETV Bharat)

तीन साल में लगाए करीब 9 लाख पौधे

एचपी शिवा परियोजना के तहत पिछले तीन वर्षों में करीब 9 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं. मौजूदा पौधरोपण सीजन में भी काम तेजी से जारी है. अधिकारियों के अनुसार सितंबर 2026 तक करीब 6 लाख और पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. बागवानी मंत्री ने अधिकारियों को पौधरोपण और खेत तैयार करने के कार्यों में तेजी लाई जाए और सभी निर्धारित लक्ष्यों को तय समय-सीमा के भीतर पूरा करने के भी निर्देश दिए.

कुछ क्लस्टरों में मानकों पर खरे नहीं उतरे पौधे

इस बैठक में पौधों की गुणवत्ता सबसे अहम मुद्दा रहा. समीक्षा के दौरान सामने आया कि कुछ क्लस्टरों में नर्सरियों से सप्लाई किए गए पौधे निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए. इस पर बागवानी मंत्री ने नाराजगी जताते हुए स्पष्ट किया कि, "परियोजना के क्लस्टरों में केवल वही पौधे लगाए जाएं, जो निर्धारित तकनीकी स्पेसिफिकेशन और गुणवत्ता मानकों को पूरा करते हों. पैनल में शामिल नर्सरी संचालकों को भी गुणवत्ता के नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं. वहीं, सरकार ने पौधों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निगरानी व्यवस्था को और कड़ा करने का फैसला लिया है. बैठक में उप-निदेशकों को निर्देश दिए गए कि पौधों की सप्लाई के दौरान संबंधित नर्सरी में एक अधिकारी तैनात किया जाए. यह अधिकारी प्लांटिंग मैटेरियल की गुणवत्ता और उसके तकनीकी स्पेसिफिकेशन की जांच करेगा."

नर्सरी से क्लस्टर तक पौधों की निगरानी

इसके साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि नर्सरी से क्लस्टर तक केवल बेहतर गुणवत्ता और निर्धारित मानकों वाले पौधे ही पहुंचें. इससे पौधरोपण के बाद पौधों के खराब होने या अपेक्षित उत्पादन नहीं मिलने की संभावनाओं को कम किया जा सकेगा. बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने अधिकारियों को परियोजना के कार्यों की धरातल पर कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. उन्होंने तकनीकी स्पेसिफिकेशन का सख्ती से पालन करने के साथ पौधरोपण और उससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों को समय पर पूरा करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि एचपी शिवा परियोजना के लक्ष्यों को निर्धारित समय-सीमा में हासिल करने के लिए गुणवत्ता, तकनीकी मानकों और निगरानी व्यवस्था से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाना चाहिए.

Plants in nursery
नर्सरी में पौधे (ETV Bharat)

सेब के पेड़ों की उम्र का होगा वैज्ञानिक आकलन

वहीं, वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के तहत लंबित दावों के निपटारे के लिए हिमाचल प्रदेश बागवानी विभाग ने सेब के पेड़ों की वास्तविक आयु का वैज्ञानिक आकलन कराने का निर्णय लिया है. इस संबंध में बागवानी निदेशक विनय सिंह (आईएएस) ने आदेश जारी करते हुए विभागीय अधिकारियों और कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के वैज्ञानिकों की संयुक्त समिति गठित की है. जारी आदेश के अनुसार, डॉ. वाई.एस. परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय द्वारा विकसित स्थान-विशिष्ट रिग्रेशन इक्वेशन (Regression Equation) के आधार पर खड़े सेब के पेड़ों और अन्य फलदार पौधों की आयु का निर्धारण किया जाएगा. विश्वविद्यालय ने इस वैज्ञानिक पद्धति को विकसित किया है, जिससे पेड़ों की अनुमानित आयु का अधिक सटीक आकलन संभव होगा.

वैज्ञानिकों और बागवानी अधिकारियों को रिपोर्ट सौंपने के निर्देश

गठित समिति में संबंधित केवीके रोहड़ू, शरबो, ताबो और आरएचआर एंड टीएस बजौरा के वैज्ञानिक, संबंधित ब्लॉक विषय विशेषज्ञ (बागवानी) और ब्लॉक बागवानी विकास अधिकारी शामिल रहेंगे. इन अधिकारियों को संयुक्त रूप से एफआरए मामलों में पेड़ों की आयु का सत्यापन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
बागवानी निदेशक ने विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक से संबंधित केवीके अधिकारियों को विभागीय टीम के साथ समन्वय करने के निर्देश देने का अनुरोध किया है. वहीं, सभी उपनिदेशकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे संबंधित वैज्ञानिकों के साथ मिलकर 15 दिनों के भीतर सेब के पेड़ों की आयु का आकलन कर रिपोर्ट निदेशालय को भेजना सुनिश्चित करें.
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Last Updated : August 30, 2026 at 10:47 AM IST