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6 हजार प्रति माह की सैलरी पर काम कर रहे MA-Msc किए युवा, अब टूटा हजारों MTW के सब्र का बांध

मल्टीटास्क वर्कर ने डेलीवेजर का दर्जा और स्पष्ट नीति बनाने की मांग की है. इसके लिए उन्होंने मंत्री विक्रमादित्य सिंह को मांग पत्र सौपा है.

मल्टीटास्क वर्कर ने की नीति बनाने की मांग
मल्टीटास्क वर्कर ने की नीति बनाने की मांग (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : June 26, 2026 at 6:15 PM IST

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Updated : June 26, 2026 at 6:35 PM IST

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शिमला: उच्च शिक्षा हासिल करने के बावजूद महज 6 हजार रुपये मासिक मानदेय पर रोजाना 8 से 10 घंटे तक सेवाएं देने वाले लोक निर्माण विभाग (PWD) के 4832 मल्टी टास्क वर्कर (MTW) अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. वर्षों से नियमितीकरण और मानदेय बढ़ाने की उम्मीद में काम कर रहे इन कर्मचारियों के सब्र का बांध अब टूटता नजर आ रहा है.

लगातार बढ़ती महंगाई, लंबा कार्यकाल और बार-बार आश्वासनों के बावजूद स्थिति जस की तस रहने से MTW खुलकर आंदोलन के मूड में हैं. उनका कहना है कि जब एमए और एमएससी जैसी डिग्रियां रखने वाले युवा भी 6 हजार रुपये में परिवार का गुजारा करने को मजबूर हों, तो ये व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है. ऐसे में सम्मानजनक वेतन, सुरक्षित भविष्य और स्पष्ट सेवा नीति की मांग को लेकर एमटीडब्ल्यू वर्कर्स यूनियन ने प्रदेश सरकार के सामने अपनी आवाज बुलंद कर दी है.

इसी कड़ी में यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह से मुलाकात कर मांगों का विस्तृत ज्ञापन सौंपा और जल्द सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया. यूनियन ने साफ किया है कि यदि सरकार ने उनकी वर्षों पुरानी मांगों पर शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए, तो प्रदेशभर के हजारों एमटीडब्ल्यू कर्मी आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे.

चार साल बाद दैनिक वेतनभोगी का दर्जा देने की मांग

एमटीडब्ल्यू वर्कर्स यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष शेर सिंह ने कहा कि 'प्रदेशभर में करीब 4832 एमटीडब्ल्यू कर्मी प्रतिदिन 8 से 10 घंटे तक विभाग में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें मात्र 6000 रुपये मासिक वेतन दिया जा रहा है. उनका कहना है कि इतनी कम आय में परिवार चलाना बेहद कठिन हो गया है. बढ़ती महंगाई के कारण राशन, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य घरेलू खर्चों का बोझ लगातार बढ़ रहा है. सरकार को एमटीडब्ल्यू कर्मियों की वास्तविक परिस्थितियों को समझते हुए जल्द एक स्थायी और न्यायसंगत नीति बनानी चाहिए, ताकि वर्षों से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को सम्मानजनक वेतन और सुरक्षित भविष्य मिल सके.'

सरकार के समक्ष रखी ये प्रमुख मांगें

  • चार वर्ष की सेवा पूरी करने वाले एमटीडब्ल्यू कर्मियों को दैनिक वेतनभोगी (डेलीवेज) का दर्जा दिया जाए.
  • 8 से 10 घंटे की नियमित ड्यूटी के अनुरूप अलग सेवा नीति बनाई जाए.
  • 48 वर्ष से अधिक आयु वाले कर्मियों के सुरक्षित भविष्य और ओपीएस जैसी व्यवस्था पर गंभीरता से विचार किया जाए.
  • पूरे प्रदेश में वेतन भुगतान की एक निश्चित तिथि निर्धारित की जाए.
  • महिला एमटीडब्ल्यू कर्मियों को मातृत्व अवकाश सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं.

दुर्घटना पीड़ित कर्मी के परिवार को न्याय की मांग

यूनियन ने मंडी जिले के दुर्घटना पीड़ित एमटीडब्ल्यू कर्मी देवेंद्र के परिवार को उचित मुआवजा और न्याय दिलाने की भी मांग उठाई. यूनियन का कहना है कि ऐसे मामलों में सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए प्रभावित परिवारों की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए.

आंदोलन की चेतावनी

यूनियन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो प्रदेशभर के एमटीडब्ल्यू कर्मी व्यापक आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होंगे. लंबे समय से अपनी समस्याओं को शांतिपूर्वक उठाने के बावजूद समाधान नहीं निकल पाया है, इसलिए अब सरकार को ठोस और समयबद्ध निर्णय लेना चाहिए.

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Last Updated : June 26, 2026 at 6:35 PM IST