हिमाचल के मेडिकल कॉलेज और सुपर स्पेशियलिटी संस्थान मॉडर्न टेक्नोलॉजी से होंगे लैस, ₹1617 करोड़ स्वीकृत
हिमाचल के सरकारी मेडिकल कॉलेज, सुपर स्पेशियलिटी सेंटर और आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों के बुनियादी ढांचे को उन्नत किया जाएगा.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 15, 2026 at 8:52 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश के मेडिकल कॉलेज और सुपर स्पेशियलिटी संस्थानों को मॉडर्न टेक्नोलॉजी से लैस करने की तैयारी तेज हो गई है. मरीजों के सुलभ एवं उच्च गुणवत्तापूर्ण वाली स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने 3,000 करोड़ रुपए की व्यापक स्वास्थ्य आधुनिकीकरण पहल के प्रथम चरण में 1,617 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं. इस निवेश के तहत सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों, सुपर स्पेशियलिटी केंद्रों और आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों के बुनियादी ढांचे को उन्नत करने की तैयारी है. यह परियोजना 1 अप्रैल, 2026 से 30 अप्रैल, 2031 तक लागू की जाएगी.
आधुनिकीकरण के लिए ₹1617 करोड़ स्वीकृत
समय पर चिकित्सा सुविधा की उपलब्धता मरीजों के उपचार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. डायग्नोस्टिक और ट्रीटमेंट में देरी से न केवल स्वास्थ्य स्थिति गंभीर बनती है, बल्कि लागत में भी वृद्धि होती है. अध्ययनों के अनुसार, देर से निदान होने पर रोगी का चिकित्सा व्यय 30-50 फीसदी तक बढ़ सकता है, जो स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने और गुणवत्तापूर्ण उपचार तक शीघ्र पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है.
स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा बढ़ावा!
सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि, इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत संस्थानों को अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाओं, सिमुलेशन-आधारित मेडिकल प्रशिक्षण प्रणालियों, एआई-सक्षम हैंडहेल्ड एक्स-रे उपकरणों और एकीकृत डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म से सुसज्जित किया जाएगा. इस परियोजना का उद्देश्य विशेषज्ञ उपचार तक समयबद्ध पहुंच सुनिश्चित करना, रेफरल से संबंधित लागत को कम करना, रोगियों के स्वास्थ्य में सुधार करना तथा दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को सुदृढ़ करना है. इससे लैंगिक समानता और जलवायु अनुकूल स्वास्थ्य सेवाओं को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे हिमाचल प्रदेश सुलभ और तकनीक-आधारित सार्वजनिक स्वास्थ्य आधुनिकीकरण में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित होगा.
गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में नए भवनों का निर्माण
प्रवक्ता ने बताया कि परियोजना का पहला चरण फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है. इसके अंतर्गत गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में नए भवनों का निर्माण, नवीनीकरण और शैक्षणिक ब्लॉकों, बाह्य एवं आंतरिक रोगी सुविधाओं का उन्नयन किया जाएगा. उच्च स्तरीय सिमुलेशन केंद्र, एआर/वीआर आधारित प्रशिक्षण सुविधाएं, डिजिटल पुस्तकालय और ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म से इंटीग्रेटेड स्कील लैब स्थापित की जाएंगी. एमआरआई, सीटी स्कैनर, डिजिटल रेडियोलॉजी सिस्टम और मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक प्रयोगशालाओं जैसे उन्नत इमेजिंग और जांच उपकरण स्थापित किए जाएंगे. पीएसीएस, एलआईएमएस, टेलीमेडिसिन और लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) सहित डिजिटल प्लेटफॉर्म को एबीडीएम मानकों के अनुरूप इंटरऑपरेबल डेटा एक्सचेंज के लिए एकीकृत किया जाएगा.
दूसरे चरण में आईजीएमसी शिमला, एआईएमएसएस चमियाना और डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, हमीरपुर में तृतीयक उपचार केंद्रों को और सुदृढ़ किया जाएगा. रीनल और बोन मैरो ट्रांसप्लांट, न्यूरोसर्जरी, कार्डियोथोरेसिक सर्जरी, उन्नत एंडोस्कोपिक प्रक्रियाएं, बाल चिकित्सा सेवाएं तथा रोबोटिक-सहायता प्राप्त सर्जरी जैसी सेवाओं का विस्तार किया जाएगा. संस्थानों को ओ-आर्म 3डी इमेजिंग, न्यूरो-नेविगेशन सिस्टम, रोबोटिक सर्जरी प्लेटफॉर्म और एकीकृत क्रिटिकल केयर मॉनिटरिंग सिस्टम जैसी अत्याधुनिक तकनीकों से लैस किया जाएगा. एक उन्नत बाल चिकित्सा देखभाल एवं नवाचार केंद्र भी स्थापित किया जाएगा, जो क्रिटिकल, सर्जिकल और टेली-सक्षम बाल चिकित्सा सेवाओं को एकीकृत करेगा.
परियोजना के तीसरे चरण में आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों को सुदृढ़ किया जाएगा, जिसके तहत इन संस्थानों को सीटी स्कैनर, मोबाइल एक्स-रे यूनिट, अल्ट्रासाउंड मशीनें, लैप्रोस्कोपिक सिस्टम और नेत्र शल्य चिकित्सा इकाइयों सहित आधुनिक डायग्नोस्टिक और सर्जिकल सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा. टेलीमेडिसिन सेवाओं और डिजिटल रेफरल नेटवर्क का विस्तार कर जिला अस्पतालों को तृतीयक और सुपर स्पेशियलिटी केंद्रों से निर्बाध रूप से जोड़ा जाएगा.
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि, "राज्य सरकार प्रदेशवासियों को विशेषज्ञ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है. राज्य में स्वास्थ्य संस्थानों के आधुनिकीकरण के लिए कई पहले की जा चुकी हैं. एआईएमएसएस चमियाना और डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, टांडा में रोबोटिक सर्जरी सुविधाएं शुरू की गई हैं और जल्द ही अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आने वाले समय में स्वास्थ्य संस्थानों को अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों से सुसज्जित करने के लिए 3,000 करोड़ रुपए का निवेश करने की योजना बना रही है."
हर साल प्रदेश से बाहर जाते हैं 9.5 लाख मरीज
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रतिवर्ष 9.5 लाख मरीज उपचार के लिए हिमाचल प्रदेश से बाहर जाते हैं, जिससे राज्य की जीडीपी को लगभग 1,350 करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान होता है. यदि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं राज्य के भीतर उपलब्ध कराई जाएं, तो अनुमान है कि प्रतिवर्ष लगभग 550 करोड़ रुपए की जीडीपी की बचत की जा सकती है, साथ ही मरीजों का बहुमूल्य समय भी बचेगा.
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