हिमाचल सरकार का बड़ा फैसला, दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों को मार्केट फीस से मिली छूट
सरकार ने दुग्ध उत्पादक सहकारी-समितियों को 1% मंडी शुल्क से पूरी छूट दे दी है. इससे राज्य की 42,500 समितियों को बड़ी वित्तीय राहत.


By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : July 3, 2026 at 8:44 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के डेयरी क्षेत्र को मजबूती देने और दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों को आर्थिक राहत प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. इसको लेकर कृषि विभाग ने दुग्ध उत्पादक समितियों को बड़ी राहत देते हुए दूध पर लगने वाले मंडी शुल्क (मार्केट फीस) से छूट देने संबंधी अधिसूचना जारी की है. ऐसे में अब दूध पर देय कृषि उपज मंडी शुल्क (मार्केट फीस) से राज्य की दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों को पूरी छूट मिलेगी.
इस फैसले से सहकारी समितियों पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ कम होगा, जिससे दुग्ध संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है. कृषि विभाग की ओर से 1 जुलाई 2026 को जारी अधिसूचना के मुताबिक हिमाचल प्रदेश कृषि एवं बागवानी उपज विपणन (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 2005 की धारा 64(1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल ने दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों को दूध पर देय मार्केट फीस से छूट दिए जाने का निर्णय लिया है. बता दें कि दूध पर एक फीसदी मार्केट फीस ली जाती है.

सहकारी समितियों को वित्तीय राहत
अधिसूचना के मुताबिक ये छूट 1 अप्रैल 2024 से 31 अक्टूबर 2025 तक की अवधि के लिए प्रभावी रहेगी. इसके साथ ही ये भी स्पष्ट किया गया है कि ये निर्णय कृषि विभाग की 25 अक्टूबर 2025 को जारी पूर्व अधिसूचना के क्रम में लिया गया है. सरकार के इस निर्णय से राज्य की दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों को वित्तीय राहत मिलने के साथ-साथ डेयरी क्षेत्र के विकास को भी नई गति मिलने की संभावना है. यही नहीं मार्केट फीस से राहत मिलने से समितियां अपनी संसाधन क्षमता बढ़ाने, किसानों को बेहतर भुगतान सुनिश्चित करने और दुग्ध व्यवसाय के विस्तार पर अधिक निवेश कर सकेंगी. ये अधिसूचना कृषि विभाग के सचिव सी पॉलरासु की से जारी की गई है.
42,500 दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियां
हिमाचल में दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों की भागीदारी बढ़कर 42,500 तक पहुंच गई है, जो पहले 28,645 थी। सरकार द्वारा दूध उत्पादकों को न्यूनतम समर्थन मूल्य उपलब्ध करवाए जाने के बाद प्रदेश में दूध उत्पादन एवं सहकारी व्यवस्था के प्रति पशुपालकों की सहभागिता में वृद्धि हुई है. राज्य सरकार ने गाय के दूध पर न्यूनतम समर्थन मूल्य को 32 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति किलो और भैंस के दूध पर 47 रुपये से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति किलो किया है. दो वर्षों में मिल्कफेड में दूध उत्पादकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है. वहीं, प्रदेश न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ने से दूध संग्रहण भी 1.57 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़कर 2.20 लाख लीटर प्रतिदिन हो गया है.
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