HPSEBL में डिजिटल सुधारों से प्रदेश को 16.83 करोड़ रुपए की बचत: CM सुक्खू
बिलिंग एवं ईआरपी सेवाओं पर खर्च में 46 प्रतिशत कमी, 29 लाख उपभोक्ता होंगे डिजिटल सेवाओं से लाभान्वित

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : January 6, 2026 at 9:03 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (एचपीएसईबीएल) में कई डिजिटल और प्रशासनिक सुधार किए गए हैं. प्रदेश सरकार ट्रांसपेरेंट प्रोक्योरमेंट प्रोसेस, तकनीकी आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देकर न केवल उपभोक्ता सेवाओं में सुधार कर रही है बल्कि वित्तीय अनुशासन की दिशा में भी आगे बढ़ रही है.
'डिजिटलीकरण से पुरानी व्यवस्थाओं में सुधार'
CM सुक्खू ने कहा कि, "वर्तमान प्रदेश सरकार का उद्देश्य न केवल पुरानी व्यवस्थाओं में सुधार, बल्कि इन्हें और अधिक प्रभावशाली बनाना है. पारदर्शी खरीद प्रक्रिया अपनाने और मंहगी आउटसोर्सिंग पर निर्भरता कम करने से एचपीएसईबीएल के बिजली बिलिंग और एंटरप्राइज रिर्सोस प्लानिंग (ERP) सहायता सेवाओं पर होने वाला खर्च 46% तक कम हुआ है. इन सेवाओं पर वार्षिक खर्च 12.29 करोड़ रुपए से घटकर 6.68 करोड़ रुपए रह गया है. इन सुधारों से प्रतिवर्ष लगभग 5.61 करोड़ रुपए की सीधी बचत होगी, जिससे तीन वर्षों में कुल 16.83 करोड़ रुपए का लाभ होगा. इस राशि का उपयोग जन कल्याणकारी कार्यों और आवश्यक सेवाओं को सुदृढ़ करने में किया जाएगा."
इज़ ऑफ लिविंग पर बल देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि, प्रदेश सरकार ने एचपीएसईबीएल का डिजिटलीकरण राज्य के लगभग 29 लाख घरेलू, औद्योगिक और कमर्शियल कंज्यूमर को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया है. उन्होंने कहा कि नए बिजली कनेक्शन के लिए ऑनलाइन आवेदन, स्मार्ट बिलिंग, प्रीपेड सेवाएं, ऑनलाइन बिल भुगतान और डिजिटल शिकायत निवारण जैसी सुविधाओं से प्रक्रियागत देरी कम हुई है और उपभोक्ताओं को पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है.
एचपीएसईबीएल में एंड-टू-एंड डिजिटलीकरण
मुख्यमंत्री ने कहा कि उपभोक्ता सेवाओं को सशक्त बनाने और कार्य क्षमता को बढ़ाने के लिए एचपीएसईबीएल में एंड-टू-एंड डिजिटलीकरण लागू किया गया है. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार एग्रीगेट टेक्निकल और कमर्शियल (एटीएंडसी) हानि को कम करने, स्मार्ट और प्रीपेड मीटर के माध्यम से समय पर बिलिंग और राजस्व वसूली सुनिश्चित करने, राजस्व घाटा कम करने और रेशनलाइजेशन ऑपरेशनल एक्सपेंसपर विशेष बल दे रही है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर बिजली खरीद योजना, डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया और बिजनेस इंटेलीजेंस (बीआई) जैसे आधुनिक तकनीकी प्लेटफॉर्म के एकीकरण से बोर्ड की वित्तीय स्थिरता और अधिक मजबूत होगी और प्रदेश में बिना बाधा और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी. उन्होंने कहा कि, व्यवस्था परिवर्तन का उद्देश्य संस्थानों को आत्मनिर्भर, जवाबदेही और तकनीक आधारित बनाना है ताकि वर्ष 2027 तक एक आधुनिक और आत्मनिर्भर हिमाचल की मजबूत नींव रखी जा सके.
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