हिमाचल में IAS, IPS और IFS कैडर में की गई इतनी कटौती, दिल्ली से लौटने के बाद बोले CM सुक्खू
हिमाचल में वित्तीय अनुशासन और खर्च में कटौती के उद्देश्य से आईएएस, आईपीएस और आईएफएस कैडर में भी पदों की संख्या घटाई गई है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 11, 2026 at 8:15 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए राज्य सरकार ने प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए कड़े फैसले लागू किए हैं. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दिल्ली से लौटने के बाद मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि वित्तीय अनुशासन और खर्च में कटौती के उद्देश्य से आईएएस, आईपीएस और आईएफएस कैडर में भी पदों की संख्या घटाई गई है.
मुख्यमंत्री ने बताया कि, आईएफएस के पद 110 से कम कर 86 कर दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि जहां अधिकारी स्तर के पदों में कमी की गई है, वहीं निचले स्तर के पद बढ़ाए गए हैं. ताकि प्रशासनिक कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी और जन केंद्रित बन सके. उन्होंने यह भी कहा कि अनावश्यक खर्च कम करने के लिए कुछ स्कूलों और कॉलेजों का विलय किया गया है. सरकार ने सत्ता संभालने के पहले दिन से ही प्रदेश की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए कठिन लेकिन जरूरी फैसले लेने शुरू कर दिए थे.
'मुझे निशाना बनाने के बजाए पीएम से मिले भाजपा'
सीएम सुक्खू ने भाजपा नेताओं को आपसी राजनीति छोड़कर राज्य के हित में आगे आना चाहिए. उन्होंने कहा कि, राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) की समाप्ति से हिमाचल को वर्ष 2026 से 2031 तक प्रत्येक वर्ष करीब 10 हजार करोड़ रुपए का नुकसान होगा. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने आरडीजी समाप्त कर प्रदेश के लोगों का हक छीन लिया है. उन्होंने भाजपा नेताओं से कहा, 'मुझे निशाना बनाने के बजाय भाजपा नेताओं को आरडीजी की बहाली के लिए प्रधानमंत्री से मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि मैंने कई बार भाजपा नेताओं से प्रदेश सरकार के साथ मिलकर केंद्र के समक्ष प्रदेश का पक्ष रखने का आग्रह किया और आरडीजी के मुद्दे पर भी एक जुट होकर लड़ने के लिए आगे आने को कहा, लेकिन मुझे पता है कि वे ऐसा कभी नहीं करेंगे. मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम से भेंट कर 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों से हिमाचल पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों के बारे में अवगत करवाया.
सीएम सुक्खू ने कहा कि, "वर्तमान कांग्रेस सरकार को पिछली सरकार से 75 हजार करोड़ रुपए का कर्ज और 10 हजार करोड़ रुपए की देनदारियां (वेतन और पेंशन एरियर) विरासत में मिली हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने कई सुधार और नीतिगत बदलाव किए हैं और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई है, जिससे पिछले तीन वर्षों में 3,800 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय हुई है. उन्होंने कहा कि पी चिदंबरम ने प्रदेश सरकार के इन प्रयासों की सराहना की और अधिक जानकारी मांगी और इस मुद्दे को उचित मंच पर उठाने का आश्वासन दिया."
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि, पी चिदंबरम के अनुसार संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत राज्यों की आय और व्यय की स्थिति को ध्यान में रखने का प्रावधान है. 17 राज्यों से आरडीजी समाप्त करते समय पर्वतीय और छोटे राज्यों के हितों की सुरक्षा जरूरी है. सीएम सुक्खू ने कहा कि तमाम चुनौतियों के बावजूद राज्य सरकार आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही है और आर्थिक सुधार कर रही है. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में राज्य को 54,296 करोड़ रुपए से अधिक आरडीजी मिला, वहीं वर्तमान सरकार को पिछले तीन वर्षों में केवल 17,563 करोड़ रुपए ही प्राप्त हुए हैं. इसके अलावा, पिछली भाजपा सरकार को 16,000 करोड़ रुपए जीएसटी मुआवजे और 11,431 करोड़ रुपए अंतरिम अनुदान के रूप में भी मिले है.
भाजपा को पांच सालों में मिले 70 हजार करोड़
मुख्यमंत्री ने कहा कि, भाजपा सरकार को पांच वर्षों में कुल मिलाकर करीब 70 हजार करोड़ रुपए मिले. यदि उसमें से 40 हजार करोड़ रुपए कर्ज चुकाने में लगाए जाते तो आज प्रदेश कर्ज के जाल में नहीं फंसा होता. पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को बताना चाहिए कि ये 70 हजार करोड़ रुपए कहां खर्च हुए और किसे इसका लाभ मिला. उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने आरडीजी का दुरुपयोग कर फिजूलखर्ची की वहीं वर्तमान प्रदेश सरकार ने अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाई है और सख्त वित्तीय अनुशासन अपनाया है.
CM सुक्खू ने कहा कि, प्रदेश सरकार किसी भी पद को समाप्त नहीं करेगी, बल्कि युवाओं के लिए रोज़गार के नए अवसर सृजित किए जाएंगे. राज्य के लोगों का हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने आवश्यकता के अनुसार ही अध्यक्ष और उपाध्यक्ष नियुक्त किए हैं, जो पिछली भाजपा सरकार की तुलना में करीब आधे हैं और ये सभी राज्य के विकास में सक्रिय योगदान दे रहे हैं.
इनको किया एरियर का भुगतान
सीएम सुक्खू ने कहा कि, केंद्र से सीमित अनुदान मिलने के बावजूद, 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों के पेंशन एरियर का भुगतान कर दिया गया है. इसके साथ ही, वर्ष 2016 से 2021 के बीच सेवानिवृत्त हुए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण के बकाया भी जारी किए गए हैं, जो वर्तमान प्रदेश सरकार की वित्तीय समझदारी का प्रमाण है. उन्होंने कहा कि राज्य 'व्यवस्था परिवर्तन' के माध्यम से एक मजबूत और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि भारतीय वन प्रबंधन संस्थान की एक रिपोर्ट के अनुसार, हिमाचल प्रदेश देश की अर्थव्यवस्था को करीब 90 हजार करोड़ रुपए की पारिस्थितिक सेवाएं प्रदान करता है. उन्होंने कहा कि प्रदेश के संसाधनों पर हमारा अधिकार है और हम इसके लिए पूरी मजबूती से लड़ेंगे.
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