हिमाचल में सामाजिक सुरक्षा पेंशन पाना हुआ आसान, सुक्खू सरकार ने सिस्टम में किया ये बड़ा बदलाव
हिमाचल प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा पेंशन लाभार्थियों की संख्या करीब 8.42 लाख से हो गई है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : January 11, 2026 at 4:32 PM IST
शिमला: हिमाचल में सामाजिक सुरक्षा पेंशन का दायरा बीते तीन वर्षों में तेजी से बढ़ा है. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने बुजुर्गों, विधवाओं, दिव्यांगों और जरूरतमंद वर्गों को राहत देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए पेंशन योजना से एक लाख नए लाभार्थियों को जोड़ा है. इससे न केवल पेंशन पाने वालों की सूची लंबी हुई है, बल्कि आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता भी और मजबूत हुई है.
सामाजिक सुरक्षा पेंशन लाभार्थियों के लिए प्रक्रिया में बदलाव
राज्य सरकार की ओर से सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्रणाली में किए गए महत्वपूर्ण सुधारों ने लाभार्थियों के लिए प्रक्रियाओं को सरल और सुलभ बनाया है. विधवा, परित्यक्त एवं एकल महिलाओं और 40 से 69 फीसदी दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के लिए आय सीमा और ग्राम सभा की स्वीकृति की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है. इस निर्णय से पात्र आवेदकों को पेंशन प्राप्त करने में होने वाली प्रशासनिक बाधाएं दूर हुई हैं और बड़ी संख्या में लाभार्थी सीधे तौर पर लाभान्वित हुए हैं. प्रदेश में इन सुधारों की वजह से 8.42 लाख लोग सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ उठा रहे हैं. इनमें वरिष्ठ नागरिक, विधवाएं, एकल महिलाएं और दिव्यांगजन शामिल हैं.
इतनों को मिल रहा इस पेंशन का सहारा
मुख्यमंत्री ने बताया कि, हिमाचल में 1,04,740 लाभार्थी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन, 5,04,253 वृद्धावस्था पेंशन, 25,414 इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन, 1,26,808 विधवा, परित्यक्त एवं एकल महिला पेंशन, 1,340 इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन और 78,291 दिव्यांग राहत भत्ता प्राप्त कर रहे हैं. पिछले तीन वर्षों में 99,799 नए पेंशन मामलों की स्वीकृति सामाजिक सुरक्षा के दायरे के निरंतर विस्तार को दर्शाती है.

महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए फरवरी 2024 से 69 आयुवर्ग तक की महिलाओं के लिए मासिक पेंशन राशि को बढ़ाकर 1,500 रुपए कर दिया गया है. इससे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने में सहायता मिल रही है. मुख्यमंत्री ने 'इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना' के अंतर्गत लंबित भुगतानों को शीघ्र जारी करने के भी निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही, पांगी, लाहौल-स्पीति, डोडरा क्वार और कुपवी जैसे दुर्गम एवं जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
वहीं, दिव्यांग व्यक्तियों को 1,150 रुपए से 1,700 रुपए तक की मासिक पेंशन दी जा रही है. शिक्षा के क्षेत्र में दिव्यांग विद्यार्थियों को बिना आय सीमा के 625 रुपए से 5,000 रुपए तक की मासिक छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है, जिससे 3,100 विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं और 3.77 करोड़ रुपए की राशि वितरित की गई है.
हिमाचल में सामाजिक सुरक्षा पेंशन
- हिमाचल में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन के 1,04,740 और 5,04,253 वृद्धावस्था पेंशन के लाभार्थी.
- 25,414 इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन, 1,26,808 विधवा, परित्यक्ता एवं एकल महिला पेंशन लाभार्थी.
- 1,340 इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन और 78,291 दिव्यांग राहत भत्ता पाने वाले लाभार्थी.
इनको मिलेगा 50 हजार अनुदान
हिमाचल में दिव्यांग व्यक्तियों के विवाह के लिए 25,000 रुपए से 50,000 रुपए तक का विवाह प्रोत्साहन अनुदान दिया जा रहा है. अब तक 212 लाभार्थियों को 74.49 लाख रुपए की सहायता प्रदान की जा चुकी है. विशेष गृहों और वृद्धाश्रमों में रहने वाले दिव्यांगजनों और बुजुर्गों को प्रमुख त्योहारों पर प्रति व्यक्ति 500 रुपए का उत्सव अनुदान भी दिया जा रहा है, जिसके तहत 2,128 लाभार्थियों को 75.43 लाख रुपए प्रदान किए गए हैं.
शासन और सेवा वितरण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी आधारित प्रणालियों के उपयोग को बढ़ावा दिया है. लाभार्थी पहचान, स्वीकृति और पेंशन वितरण की डिजिटल व्यवस्था में पारदर्शिता, सटीकता और समय पर भुगतान सुनिश्चित किया है. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सामाजिक न्याय, सशक्तिकरण और योजनाओं में समावेशन को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं.
सीएम सुक्खू ने कहा कि, सरकार संवेदनशील प्रशासन की मिसाल कायम करते हुए पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना सुनिश्चित कर रही है. सीएम सुक्खू ने कहा कि पात्रता की बाधाओं को हटाकर, वित्तीय सहायता बढ़ाकर और सम्मान व सुगमता पर ध्यान केंद्रित करके सरकार सामाजिक सुरक्षा को केवल सहायता नहीं बल्कि एक अधिकार के रूप में स्थापित कर रही है.
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