हिमाचल में RDG कंट्रीब्यूशन 12.7%, वित्त मंत्री से मुलाकात में CM सुक्खू ने बताया छोटे पहाड़ी राज्य के लिए क्यों है जरूरी?
सीएम सुक्खू ने कहा है कि हिमाचल की तुलना उन दूसरे राज्यों से नहीं की जा सकती, जिनका RDG बंद कर दिया गया है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : March 2, 2026 at 2:46 PM IST
|Updated : March 2, 2026 at 2:53 PM IST
शिमला: दिल्ली की सियासी हलचल के बीच सोमवार को एक अहम मुलाकात ने पहाड़ी राज्य की आर्थिक चिंताओं को राष्ट्रीय फलक पर ला दिया. हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार (2 मार्च) को देश की राजधानी दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से विस्तृत बातचीत कर राज्य के लिए राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant ) की अहमियत को मजबूती से रखा. उन्होंने कहा कि, हिमाचल जैसे छोटे और विशेष भौगोलिक परिस्थितियों वाले पहाड़ी राज्य के लिए आरडीजी केवल एक वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि विकास और आधारभूत ढांचे की जीवनरेखा है.
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने तर्क दिया कि, "दुर्गम भौगोलिक हालात, सीमित औद्योगिक आधार, प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति और बिखरी आबादी के कारण राज्य की आय सीमित है, जबकि खर्च अपेक्षाकृत अधिक हैं. ऐसे में रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) बंद करने से राज्य की फाइनेंशियल हेल्थ पर बहुत बुरा असर पड़ेगा. हिमाचल की तुलना उन दूसरे राज्यों से नहीं की जा सकती, जिनका RDG बंद कर दिया गया है. राज्य के लिए RDG कंट्रीब्यूशन करीब 12.7 परसेंट था, जो नागालैंड के बाद दूसरा सबसे ज़्यादा था."
खर्च कम करने को उठाए कई कदम
सीएम सुक्खू ने कहा कि, बड़े राज्य इसे बंद करने का सामना कर सकते हैं, लेकिन हिमाचल प्रदेश की इकॉनमी नहीं कर सकती. उन्होंने कहा कि सभी राज्यों का एक ही पैमाने पर आकलन करना न तो हेल्दी है और न ही ट्रांसपेरेंट. उन्होंने इसे बंद करने को 'कोऑपरेटिव फेडरलिज्म की भावना को कमजोर करने वाला' बताया. उन्होंने कहा कि भारत के संविधान का आर्टिकल 275(1) राज्यों को ऐसी ग्रांट देने का प्रावधान करता है, जो उनकी रेवेन्यू रिसीट और खर्च के बीच के अंतर को कम नहीं कर सकतीं. यह पहली बार है कि फाइनेंस कमीशन ने छोटे पहाड़ी राज्यों की विकास संबंधी जरूरतों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया है.
'GST की वजह से राज्य को रेवेन्यू का नुकसान'
सीएम सुक्खू ने फाइनेंस मिनिस्टर को यह भी बताया कि पिछले दो-तीन सालों से खर्च कम करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं, कोई ऑफ-बजट उधार नहीं लिया गया और अलग-अलग सेस के जरिए सालाना करीब 600 करोड़ रुपए जुटाए गए. उन्होंने कहा कि GST की वजह से राज्य को रेवेन्यू का नुकसान हुआ और जहां भी मुमकिन हो, टैक्स रेट बढ़ाने और सब्सिडी को सही करने के बावजूद, रेवेन्यू घाटे के अंतर को कम नहीं किया जा सका.
सीएम सुक्खू ने केंद्रीय फाइनेंस मिनिस्टर से पहाड़ी राज्यों की इकॉनमी का ठीक से आकलन करने और सुधार के उपायों की सिफारिश करने के लिए एक कमेटी बनाने का अनुरोध किया. वहीं, इस दौरान उन्होंने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के रेवेन्यू डेफिसिट को कवर करने के लिए खास केंद्रीय मदद के तहत एक फाइनेंशियल पैकेज मांगा.
ये भी पढ़ें: सुक्खू सरकार ने 84 नई पंचायतों के गठन को दी मंजूरी, हिमाचल में फिर बदला पंचायतों का गणित
ये भी पढ़ें: हिमाचल के सभी आंगनवाड़ी केंद्र अब बनेंगे को-स्कूल, खेल-खेल में पढ़ना सीखेंगे बच्चे

