छोटा कमरा,पूरा इंडिया: बनारस के मिठाईलाल की अनोखी झांकी, 10X10 के कमरे में सजता 'अद्भुत भारत'
मनोज द्विवेदी के संपादन में संवाददाता गोपाल मिश्रा की विशेष रिपोर्ट

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : September 2, 2026 at 11:38 AM IST
|Updated : September 2, 2026 at 3:42 PM IST
वाराणसी: किसी शौक को इंसान अपने दिल दिमाग में बैठा ले, तो उसके लिए बड़े से बड़ा काम भी आसान हो जाता है. कुछ ऐसा ही शौक बनारस के रहने वाले मिठाईलाल मद्धेशिया भी पूरे कर रहे हैं. जन्माष्टमी के दिन बेटे के जन्म की खुशियां और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर झांकी बनाने का शौक जब एक साथ मिले तो ऐसी अद्भुत कृतियां तैयार हुईं, जिसे देखने के लोग दूर-दूर से आते हैं. आइए जानते हैं कैसे यह शौक अब आकर्षण का केंद्र बन गया है.
बनारस में मिठाईलाल का 10X10 का कमरा अब बनारस ही नहीं पूर्वांचल या यूं कहें कि पूरी यूपी के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है. यहां श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की अद्भुत झांकियां और सजावट मिसाल है. इनके घर के आंगन में सजने वाली झांकी पूरे भारत की झलक दिखाती है. विकसित भारत का वह स्वरूप भी उनके घर में दिखाई देता है, जो आने वाले कुछ सालों में भारत को विश्व पटल पर नई पहचान देने वाला है.
पूरा परिवार मिलकर करता है सजावट: वृद्ध हो चुके मिठाईलाल इस झांकी को बैठकर सजाते हैं. उनके बेटे उनका पूरा साथ देते हैं. धागे का कारोबार करने वाले मिठाई लाल और उनके परिवार के लोगों ने इस अद्भुत सजावट को जन्माष्टमी के मौके पर पूरा करने के लिए अपनी जिंदगी का बहुमूल्य समय लगाया है.
जन्माष्टमी से लगभग 3 महीने पहले ही सजावट शुरू हो जाती है. देश के तमाम बड़े शहरों की मशहूर इमारतें हों या मंदिर उनके हू-ब-हू स्ट्रक्चर बनाने में पूरा परिवार जुट जाता है.

बाजार से किसी कारीगर से नहीं बल्कि अपनी मेहनत से दफ्ती, थर्माकोल लकड़ी और अन्य सामग्री से एक से बढ़कर एक स्ट्रक्चर तैयार किए जाते हैं. इन्हें देखकर कोई भी दांतों तले उंगली दबा लेगा.
इतना ही नहीं भविष्य का बनारस जहां रोप-वे चलने को तैयार है, रेलवे हाईटेक ट्रेनें दौड़ाने का काम कर रही है, वह सारा स्ट्रक्चर मिठाईलाल के कमरे में देखने को मिल जाएगा.
इलेक्ट्रॉनिक से लेकर बड़ी-बड़ी इमारतों के स्ट्रक्चर इस अद्भुत सजावट भगवान श्रीकृष्ण के आगमन की तैयारी में की जाती है. इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं.

कैसे हुई थी इसकी शुरुआत: 50 की उम्र पार कर चुके कृष्ण कुमार गुप्ता, मिठाईलाल के बड़े बेटे हैं. घर में जन्माष्टमी का त्योहार कभी नहीं मनाया जाता था. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन ही मिठाईलाल के बड़े बेटे का जन्म हुआ तो उन्होंने नाम भी कृष्ण कुमार रखा.
तब पिता ने घर में श्रीकृष्ण के आगमन की खुशी मनाने के लिए झांकियां सजाने का निर्णय लिया. पहली बार उन्होंने 50 साल पहले अपने घर की एक अद्भुत झांकी तैयार की. वह जिस घर में रहते हैं, उसी घर का सेम स्ट्रक्चर उन्होंने दफ्ती, लकड़ी, फेविकोल और अन्य चीजों से बना डाला.

उसे लाइटों से सजाकर अपने घर में श्रीकृष्ण के साथ सजाते हुए श्रीकृष्ण के आगमन की खुशियां मनाईं. देखते ही देखते उनका यह शौक कब जुनून में बदल गया उन्हें भी नहीं पता चला.
किस तरह की झांकियां: इस तरह की अद्भुत झांकियों को सजाने का काम 50 साल हो चुके हैं. अब यह बनारस ही नहीं बल्कि पूरे पूर्वांचल में जानी पहचानी झांकी के रूप में अलग पहचान बना चुकी है.

यहां पर गोल्डेन टेंपल, रामनगर का किला, काशी विश्वनाथ मंदिर, केदारनाथ मंदिर, मथुरा-वृंदावन मंदिर, उज्जैन महाकाल मंदिर, दक्ष प्रजापति मंदिर, लाल किला, स्वामीनारायण मंदिर, अमृतसर बांके बिहारी मंदिर, कनक भवन, दशरथ भवन, राजस्थान का किला, मथुरा कारागार, दुर्गा मंदिर व बनारसी साड़ी की दुकान और बनारस की अन्य प्रसिद्ध चीजों के सेम स्ट्रक्चर दिखाई देंगे.

50 से ज्यादा झांकियां तैयार: सबसे बड़ी बात यह है कि इन स्ट्रक्चर को बनाने के लिए किसी कारीगर या विशेषज्ञ की मदद नहीं ली जाती बल्कि घर के बच्चे, बूढ़े और हर कोई मिलकर इसे तैयार करता है.
जन्माष्टमी के लगभग 3 महीने पहले से ही यह तैयारी शुरू हो जाती है. वर्तमान समय में यहां पर 50 से ज्यादा ऐसे स्ट्रक्चर मौजूद है, तो देश के नामचीन मंदिरों और प्रसिद्ध इमारत से जुड़े हुए हैं. इन्हें देखकर आप अंदाजा ही नहीं लगा पाएंगे कि यह कोई स्ट्रक्चर है.

एक तरफ जहां प्रसिद्ध मंदिरों के स्ट्रक्चर बनाए जाते हैं, वहीं देश के विकास की झलक भी इस छोटे से कमरे में दिखाई देती है. यहां विश्वनाथ मंदिर वाले रूट से लेकर गोदौलिया और कैंट वाले इलाके में संचालित होने वाले रोप-वे की हू-ब-हू कॉपी दिख जाएगी.
मैहर देवी पर संचालित होने वाला पहाड़ों का रोप-वे हो या देश में चलने वाली वंदे भारत ट्रेन, सब कुछ यहां पर संचालित होते दिखाई देगा. पहाड़, जंगल, झरनों का स्ट्रक्चर यहां पर देखने को मिलता है.

पिता के शौक को पूरा कर रहे बेटे: इस भव्य झांकी की शुरुआत के पीछे कृष्ण कुमार ही हैं, क्योंकि उनके जन्म लेने के बाद उनके पिता ने इसकी शुरुआत की थी. कृष्ण कुमार बताते हैं कि वह इस काम के लिए दिल्ली, मुंबई हर जगह जाते हैं.
वहां से मोटर से लेकर इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट लाते हैं. बनारस में जो चीज नहीं मिलती है, वह बाहर से लाते हैं. ट्रेन के मॉडल का स्टीकर हो या फिर भवन पर लगने वाले रंग या अन्य चीजें वह खरीदकर लाते हैं. हर साल इस पूरे काम में लगभग एक लाख रुपए तक का खर्च होता है.

छोटे बेटे श्यामसुंदर का कहना है कि पिता के साथ मिलकर सारे स्ट्रक्चर तैयार करने में वह उनकी मदद करते हैं. पूराने स्ट्रक्चर को रिपेयर करने के साथ इसे लगाने और फिर बाद में हटाकर सुरक्षित रखने का काम पूरा परिवार करता है.
घर की बेटियां, पोते-पोतियां सब मिलकर इस काम में लगते हैं. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को यादगार बना देते हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि यहां पर जन्माष्टमी के मौके पर जबरदस्त भीड़ होती है.

बनारस से ही आसपास के जिले के लोग यहां पर पहुंचते हैं और यह झांकी देखने के लिए लाइन लगती है. कुल मिलाकर कहा जाए तो बनारस की जन्माष्टमी हर त्योहार की तरह बड़े ही धूमधाम के साथ मनाई जाती है.

शिव की नगरी में श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव एक छोटे से घर के छोटे से कमरे में इस रूप में मनाया जाता है, जो शायद मथुरा-वृंदावन में भी संभव नहीं है. इस रूप में भगवान श्रीकृष्ण का स्वागत होता है और आसपास की भव्य झांकियों के साथ विकसित भारत का स्वरूप छोटे से कमरे में ही समाहित दिखाई देता है.

