HP Board Exam 2026: एक्सपर्ट से जानें हिंदी की परीक्षा में कैसे लिखें कॉपी, जिससे बिना कटे मिले पूरे अंक?
हिंदी विषय की तैयारी कैसे करें, और एग्जाम में कॉपी लिखते समय किन बातों का ख्याल रखें इसे लेकर हमने एक्सपर्ट से बातचीत की है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : March 1, 2026 at 4:57 PM IST
|Updated : March 1, 2026 at 5:03 PM IST
शिमला: बोर्ड परीक्षाएं नजदीक आते ही विद्यार्थियों के मन में सबसे बड़ा प्रश्न यही उठता है, आखिर परीक्षक (Examiner) कॉपी जांचते समय क्या देखते हैं? हिंदी विषय में अच्छे अंक पाने के लिए क्या केवल पाठ याद कर लेना पर्याप्त है, या प्रस्तुति और संरचना भी उतनी ही महत्वपूर्ण है? हिंदी की परीक्षा में अंक क्यों कटते हैं? इन्हीं सवालों के जवाब जानने के लिए ETV भारत की टीम ने Himachal Pradesh Board of School Education (HPBOSE) की परीक्षा प्रणाली को ध्यान में रखते हुए हिंदी विषय के अनुभवी विशेषज्ञ आत्मा रंजन से विस्तृत बातचीत की. आत्मा रंजन ने जो टिप्स दिए उसे अपनाकर आप भी अच्छे नंबर ला सकते हैं.
24 वर्षों तक प्रवक्ता (हिंदी) के रूप में सेवाएं देने और पिछले ढाई वर्षों से प्रधानाचार्य के रूप में कार्यरत आत्मा रंजन वर्तमान में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सायरी, जिला सोलन में पदस्थ हैं. उन्होंने परीक्षा मूल्यांकन के व्यावहारिक अनुभव के आधार पर छात्रों को स्पष्ट, व्यावहारिक और बेहद उपयोगी सुझाव दिए.

उत्तर लगभग समान हों तो किसे मिलते हैं अधिक अंक?
इस प्रश्न पर आत्मा रंजन का जवाब बहुत स्पष्ट है, "यदि दो उत्तर लगभग समान हैं, तो अंक भी लगभग समान ही होंगे, लेकिन साफ-सुथरी, त्रुटिहीन और स्पष्ट लिखावट वाले छात्र को स्वाभाविक रूप से कुछ अधिक अंक मिल सकते हैं. कॉपी जांचते समय परीक्षक सबसे पहले समग्र प्रभाव (Overall Impression) देखता है. यदि उत्तर पढ़ने में सहज हो, पंक्तियां स्पष्ट हों, मात्राओं में गलती न हो और उत्तर व्यवस्थित ढंग से लिखा गया हो, तो परीक्षक को मूल्यांकन में सुविधा होती है."
क्या लंबे उत्तरों में 'कुंजी शब्द' अंक बढ़ाते हैं?
आत्मा रंजन ने कहा, "हां, कुंजी शब्दों का प्रयोग निश्चित रूप से मददगार होता है." उन्होंने विस्तार से बताया कि प्रश्न में प्रयुक्त मुख्य शब्दों जैसे 'चरित्र चित्रण', 'सामाजिक संदेश', 'मुख्य भाव', 'कारण', 'परिणाम' को उत्तर में स्पष्ट रूप से शामिल करना चाहिए. यदि संभव हो तो इन शब्दों को हल्के से रेखांकित भी किया जा सकता है. इससे परीक्षक को तुरंत समझ आता है कि छात्र ने प्रश्न की मांग को पहचाना है. कई बार छात्र लंबा उत्तर लिख देते हैं, लेकिन प्रश्न के मुख्य बिंदु को छूते ही नहीं यहीं अंक कट जाते हैं.

गाइड जैसा उत्तर बेहतर या अपने शब्दों में?
आत्मा रंजन ने बताया कि, "अपने शब्दों में लिखा उत्तर अधिक प्रभावित करता है, बशर्ते भाषा शुद्ध हो." उन्होंने कहा कि गाइड से रटा हुआ उत्तर अक्सर यांत्रिक लगता है. वहीं, अपने शब्दों में लिखा उत्तर छात्र की समझ और आत्मविश्वास को दर्शाता है. लेकिन सावधानी यह है कि, वाक्य संरचना सही हो. साथ ही मात्राएं और वर्तनी शुद्ध हों. उत्तर लिखते समय यह ध्यान रहे कि अर्थ में बदलाव न हो. गलत भाषा में लिखा मौलिक उत्तर भी अंक कम करा सकता है."
साहित्य में भूमिका और निष्कर्ष का महत्व
आत्मा रंजन के अनुसार, "भूमिका और निष्कर्ष अवश्य लिखे जाने चाहिए. इससे उत्तर प्रभावशाली बनता है." उन्होंने समझाया कि, 4–6 अंकों के प्रश्नों में सीधे मुख्य बिंदु पर जाने से उत्तर अधूरा प्रतीत हो सकता है.
1. 1–2 पंक्तियों की भूमिका
2. मुख्य बिंदुओं का विस्तार
3. संक्षिप्त निष्कर्ष
सरल भाषा या कठिन शब्दावली?
उन्होंने कहा कि, "सरल भाषा अच्छी मानी जाती है. यदि उत्तर सही है तो पूरे अंक मिलते हैं." परिभाषिक शब्द (जैसे- उपमा अलंकार, रूपक, व्यंग्य) उसी रूप में लिखे जाने चाहिए. यदि कठिन शब्द की वर्तनी में गलती की संभावना हो, तो उसका सरल पर्याय प्रयोग करना बेहतर है. गलत कठिन शब्द की तुलना में सही सरल शब्द अधिक अंक दिलाता है.

व्याकरण में आंशिक अंक मिलते हैं?
प्रधानाचार्य के रूप में कार्यरत आत्मा रंजन ने कहा कि, अब आंशिक रूप से सही उत्तर पर अनुपात में अंक दिए जाते हैं. यदि उत्तर पूरी तरह सही नहीं है, लेकिन कुछ भाग सही है, तो उसके अनुसार अंक मिलते हैं, इसलिए व्याकरण के प्रश्न कभी खाली न छोड़ें.
बिंदुवार या पैराग्राफ?
- 1 या 2 अंक के प्रश्न → बिंदुवार
- 4–6 अंक के प्रश्न → पैराग्राफ शैली
- मुख्य बात यह है कि प्रश्न के सभी भागों का उत्तर दिया जाए. अधूरा उत्तर सबसे बड़ी गलती है.
क्या प्रस्तुति से सच में फर्क पड़ता है?
प्रधानाचार्य आत्मा रंजन कहते हैं, "सच में प्रस्तुति से बहुत अधिक फर्क पड़ता है. अंडरलाइन, स्पष्ट प्रश्न संख्या, साफ मार्जिन, अनुच्छेदों में विभाजन ये सभी बातें परीक्षक पर सकारात्मक प्रभाव डालती हैं. लेकिन, ध्यान रहे सुलेख के चक्कर में समय न गंवाएं, प्रश्नपत्र पूरा हल करना प्राथमिकता होनी चाहिए."

शब्द सीमा का कितना ध्यान रखें?
आत्मा रंजन कहते हैं कि, एग्जाम में थोड़ा अधिक लिखने पर सामान्यतः अंक नहीं कटते. लेकिन अत्यधिक विस्तार से बचना चाहिए. संक्षिप्त, सटीक और विषय केंद्रित उत्तर हमेशा बेहतर माना जाता है. उत्तर में अधिक भूमिका बनाने के बजाय To The Point उत्तर देने का प्रयास करें. कॉपी में स्पष्ट शब्दों में उत्तर लिखें. इससे समय भी बचेगा और कॉपी से परीक्षाक भी प्रभावित होंगे.
पाठ की पंक्ति या उदाहरण देना चाहिए?
- उत्तर में पाठ की पंक्ति या उदाहरण देना अच्छे अंक दिलाने में सहायक
- पाठ की पंक्ति या उदाहरण देने से उत्तर प्रमाणिक और प्रभावी
सबसे अधिक अंक क्यों कटते हैं?
हिंदी की परीक्षा में सबसे अधिक अंक क्यों और कहां कटते हैं, आत्मा रंजन ने इसके तीन मुख्य कारण बताए हैं.
- प्रश्नानुकूल उत्तर न देना
- मात्राओं और वर्तनी की गलतियां
- अस्पष्ट या गंदी लिखावट
- कई छात्र कहानी दोहराते रहते हैं, जबकि प्रश्न विश्लेषण मांगता है.
अलग दृष्टिकोण को मिलते हैं अंक?
सोलन जिले के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सायरी के प्रधानाचार्य आत्मा रंजन ने बताया कि, "पेपर मूल्यांकन के दौरान अलग दृष्टिकोण वाले छात्र को बेहतर अंक अवश्य मिलते हैं. बशर्ते उत्तर प्रश्न पर केंद्रित हो. कॉपी जांचते समय मौलिकता को महत्व दिया जाता है, परंतु विषय से भटकाव नहीं होना चाहिए. साथ ही मौलिकता अर्थपूर्ण और सार्थक हो."
लेखन में फॉर्मेट या कंटेंट?
- कॉपी में लेखन और फॉर्मेट दोनों का समान महत्व
- पत्र का फॉर्मेट गलत है, तो अच्छे विचार भी पूर्ण अंक नहीं दिला पाएंगे
अंतिम 5 मिनट में क्या देखें?
प्रधानाचार्य आत्मा रंजन ने छात्रों को बहुत काम टिप्स दिए हैं. उन्होंने बताया कि परीक्षा के दौरान अंतिम 5 मिनट में छात्रों को यह देखना चाहिए कि कोई प्रश्न छूटा तो नहीं है. प्रश्न संख्या सही है या नहीं. छोटे प्रश्न खाली न छोड़ें. अगर किसी प्रश्न के अधूरे उत्तर हैं तो अवश्य पूरा कर लें. उन्होंने कहा कि, परीक्षा में एक या आधा अंक भी बहुत मूल्यवान होता है इसलिए अंतिम पांच मिनट में सावधानी से इन बिंदुओं को जांच-परख लें.

कविता में अलंकार और भाव
प्रधानाचार्य के अनुसार, हिंदी परीक्षा में कविता के उत्तर में अलंकार और भाव स्पष्ट लिखना चाहिए. इससे उत्तर पूर्ण माना जाता है. साथ ही इससे परीक्षक भी प्रभावित होते हैं. प्रश्न प्रत्र में अलंकार भाव या उदाहरण लिखने से आपकी कॉपी सामान्य छात्रों से अलग लगेगी, जिसके परीक्षका अधिक प्रभावित हो सकते हैं. इसलिए प्रश्न के अनुकूल अलंकार भाव अवश्य लिखें.
परीक्षक को सबसे अधिक प्रभावित क्या करता है?
प्रधानाचार्य आत्मा रंजन ने बताया कि, "कॉपी चेक करते समय परीक्षक को लगना चाहिए कि विद्यार्थी पढ़कर आया है. त्रुटिहीन भाषा, स्पष्ट प्रस्तुति और प्रश्नानुकूल उत्तर यही तीन तत्व सबसे प्रभावशाली हैं. साल भर जो पढ़ा है, उसे तीन घंटे में साबित करना है. घबराएं नहीं, जो आता है उसी पर ध्यान दें. आत्मविश्वास और शांत मन से परीक्षा दें. जल्दबाजी से बचें."
HPBOSE की हिंदी परीक्षा केवल ज्ञान की परीक्षा नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति, अनुशासन और प्रस्तुति की भी परीक्षा है. ईटीवी से विशेष बातचीत में आत्मा रंजन ने स्पष्ट किया कि जो छात्र संरचना, शुद्धता और संतुलन के साथ उत्तर लिखते हैं, वही उच्च अंक अर्जित करते हैं.
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