पुलिस की मौजूदगी से सुरक्षा का अहसास, लेकिन घटनाएं डराती हैं; लखनऊ रियलिटी चेक में क्या बोलीं महिलाएं? जानिए
ईटीवी भारत की टीम ने रात में लखनऊ की सड़कों पर पुलिस की सक्रियता और सुरक्षा का जायजा लिया

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : August 28, 2026 at 2:06 PM IST
लखनऊ: प्रदेश की राजधानी लखनऊ, रात के समय हर तरफ चहल-पहल और रोशनी से जगमग. रेलवे स्टेशन हों या बस अड्डे या फिर सड़कें, हमेशा गुलजार नजर आएंगे. इन जगहों पर कोई परिवार के साथ तो कोई अकेला मिल जाएगा. कोई कहीं से घर लौट रहा है तो किसी को कहीं पहुंचने की जल्दी है. इन सबके बीच एक अहम सवाल उठता है कि क्या लखनऊ रात में हर किसी के लिए सुरक्षित है, खासकर महिलाओं के लिए?
सरकार के साथ ही पुलिस-प्रशासन का तो यही दावा है कि राजधानी में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं. जगह-जगह पुलिस पिकेट-पिंक बूथ हैं, चौकियां हैं, पुलिस की गाड़ियां रात भर गश्त करती हैं और मदद मांगने पर जरा भी देर नहीं होती. लेकिन क्या ये दावे सिर्फ कागजी हैं या फिर जमीन पर भी स्थिति ऐसी ही है, इसकी सच्चाई जानने की ईटीवी भारत टीम ने कोशिश की. टीम रात करीब 12 बजे लखनऊ की सड़कों पर निकली. चारबाग रेलवे स्टेशन से लेकर आलमबाग बस स्टैंड और इनके बीच के प्रमुख इलाकों में पुलिस की मौजूदगी, पेट्रोलिंग, चौकियों की स्थिति और महिलाओं के अनुभव को परखा गया. पढ़िए संवाददाता प्रशांत मिश्रा की रिपोर्ट
नहीं मिले पुलिसकर्मी
रियलिटी चेक की सबसे अहम बात यही है कि लखनऊ की रात की तस्वीर एकतरफा नहीं है. एक तरफ सड़क पर पुलिस की मौजूदगी दिखाई दी, नाका पुलिस चेकिंग करती मिली तो दूसरी तरफ चारबाग की लोको चौकी पर करीब दस मिनट तक कोई पुलिसकर्मी टीम को मौजूद नहीं मिला. इस बारे में चौकी प्रभारी ने बताया कि पुलिसकर्मी एक मामले में बाहर गए थे.

बंद मिले पिंक बूथ
पुलिस के मुताबिक, चारबाग रेलवे स्टेशन के पास स्थित पिंक बूथ और आलमबाग बस स्टैंड के पास के पिंक बूथ 24 घंटे संचालित होते हैं, लेकिन रियलिटी चेक में चारबाग की लोको चौकी सहित चारबाग व आलमबाग स्थित पिंक बूथ बंद मिले. इस बारे में जेसीपी बबलू कुमार ने स्पष्ट किया कि अगर 24 घंटे संचालित होने वाले किसी पिंक बूथ पर निर्धारित समय में कर्मचारी नहीं मिलते हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी. उन्होंने कहा कि यह देखा जाएगा कि किस स्तर पर लापरवाही हुई और व्यवस्था में जहां कमी है, उसे दुरुस्त किया जाएगा.
सड़क पर दिखी पुलिस की यह व्यवस्था
ETV Bharat के रियलिटी चेक में चारबाग और आलमबाग के बीच नाका पुलिस के करीब आधा दर्जन जवान बैरिकेडिंग लगाकर संदिग्ध लोगों की जांच करते मिले. पुलिसकर्मियों ने बताया कि उस समय कोई घटना नहीं हुई थी. उनका कहना था कि ऐसी चेकिंग का मकसद घटना होने के बाद पहुंचना नहीं, बल्कि घटना को होने से पहले रोकना है. पुलिसकर्मियों के मुताबिक, सड़क पर पुलिस की मौजूदगी से अपराधियों का मनोबल कमजोर होता है और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है.

रात में 12 बजे तक निकलती हूं, डर नहीं लगता
टीम ने सिर्फ पुलिस की तैनाती नहीं देखी, बल्कि यह भी जानने की कोशिश की कि आम लोगों को इस व्यवस्था पर कितना भरोसा है? चारबाग के पास रात करीब 12 बजे मिलीं अंशिका ने बताया कि वह अक्सर रात में सफर करती हैं. कई बार 11 से 12 बजे तक बाहर रहती हैं. उनका कहना था कि अब तक उन्हें किसी तरह की समस्या नहीं हुई. अंशिका ने पुलिस के व्यवहार में भी बदलाव महसूस करने की बात कही. उनका कहना था कि जरूरत पड़ने पर पुलिस से बात करने पर उनकी सुनी जाती है और मदद उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है.

पति-पत्नी बोले-माहौल बेहदर
अंशिका के बाद मुलाकात रात में सफर कर रहे मनीष और उनकी पत्नी से हुई. उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सकारात्मक अनुभव साझा किया. मनीष ने कहा कि पहले की तुलना में माहौल काफी बेहतर हुआ है और उनका परिवार अक्सर रात में सफर करता है. उनकी पत्नी ने भी कहा कि रात में सफर करने के दौरान उन्हें अब तक किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा.
आलमबाग बस स्टैंड
आलमबाग बस स्टैंड पहुंचे तो अपनी पत्नी के साथ बस का इंतजार कर रहे सुनील कुमार भट्ट ने सुरक्षा को लेकर अपने अनुभव बताए. कहा, पुलिस की मौजूदगी पहले के मुकाबले ज्यादा दिखाई देती है. परिवार की महिलाएं और बच्चियां भी अकेले सफर करती हैं. उन्हें अब तक किसी बड़े भय का सामना नहीं करना पड़ा.

लेकिन, घटनाएं डर पैदा करती हैं
इसी रियलिटी चेक में एक अलग आवाज भी सामने आई. आलमबाग बस स्टैंड पर ही मिलीं अंजली मौर्या ने कहा कि रात में सफर करते समय वह खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस नहीं करतीं. उनका कहना था कि लगातार महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और दुष्कर्म जैसी घटनाओं की सूचनाएं सामने आती रहती हैं. ऐसी सूचनाओं का असर महिलाओं के मन पर पड़ता है और रात में अकेले सफर करने का डर बना रहता है. यानी पुलिस की सक्रियता के बावजूद महिलाओं के मन से डर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.
जानिए पुलिस के दावे-व्यवस्था
99 पिंक बूथ से लेकर 99 पिंक पेट्रोलिंग वाहन तक: लखनऊ के ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर बबलू कुमार के मुताबिक, राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा के लिए 99 पिंक बूथ हैं. इसके साथ ही 99 पिंक पेट्रोलिंग गाड़ियों को भी सक्रिय रखा गया है. इन पिंक बूथ और पेट्रोलिंग वाहनों का मकसद महिलाओं को जरूरत पड़ने पर तत्काल पुलिस सहायता उपलब्ध कराना है. पुलिस का दावा है कि ऐसे स्थानों को प्राथमिकता दी गई है, जहां महिलाओं की आवाजाही ज्यादा रहती है. बबलू कुमार के मुताबिक, करीब 25 पिंक बूथ ऐसे हैं, जिन्हें 24 घंटे संचालित किया जाना है, बाकी पिंक बूथ देर रात तक काम करते हैं.
153 PRV, 30 PRV पर दो-दो महिला कॉन्स्टेबल : महिलाओं को रात में तत्काल मदद उपलब्ध कराने के लिए 112 की PRV व्यवस्था को भी पुलिस ने सुरक्षा तंत्र का अहम हिस्सा बनाया है. बबलू कुमार के मुताबिक, राजधानी लखनऊ में करीब 153 PRV गाड़ियां हैं. इनमें से 30 PRV पर दो-दो महिला कांस्टेबल तैनात की गई है. इसका मतलब यह है कि अगर रात में किसी महिला को परेशानी होती है, वह 112 पर फोन कर सकती है. पुलिस के मुताबिक कॉल मिलने के बाद PRV मौके पर पहुंचेगी और जरूरत पड़ने पर महिला को सुरक्षित उसके घर तक पहुंचाने में मदद करेगी. 112 पर कॉल करना पहला विकल्प हो सकता है।
हर दो चौकियों के बीच PRV की तैनाती : रात की पेट्रोलिंग को लेकर पुलिस ने एक और व्यवस्था का दावा किया है. बबलू कुमार के मुताबिक प्रत्येक दो पुलिस चौकियों के बीच एक PRV को तैनात करने की व्यवस्था की गई है. इसका उद्देश्य यह है कि किसी घटना या आपात स्थिति की सूचना मिलने पर पुलिस वाहन को मौके तक पहुंचने में कम से कम समय लगे. इसके साथ ही राजधानी में बड़ी संख्या में QRT यानी क्विक रिस्पॉन्स टीम भी रात के समय सड़कों पर सक्रिय रहती है.
100 मोबाइल गाड़ियां चार-चार घंटे की शिफ्ट में : पुलिस के मुताबिक सिर्फ 112 की गाड़ियों पर निर्भर रहने के बजाय थानों की मोबाइल व्यवस्था को भी रात में सक्रिय रखा गया है. बबलू कुमार के अनुसार, राजधानी में करीब 100 चार पहिया मोबाइल गाड़ियां हैं, जिनमें सेकेंड मोबाइल और थाना प्रभारी की मोबाइल गाड़ियां शामिल हैं. ये गाड़ियां रात के दौरान चार-चार घंटे की शिफ्ट में सड़कों पर भ्रमण करती हैं.
रियलिटी चेक क्या बताता है?
लखनऊ में रात का यह रियलिटी चेक बताता है कि महिला सुरक्षा के लिए पुलिस ने एक बड़ा नेटवर्क खड़ा किया है. 99 पिंक बूथ, 99 पिंक पेट्रोलिंग वाहन, 153 PRV, महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती, QRT, करीब 100 मोबाइल वाहन और जोनवार वरिष्ठ अधिकारियों की चेकिंग टीम, लेकिन किसी भी सुरक्षा व्यवस्था की असली सफलता उसके आंकड़ों से नहीं, बल्कि लोगों के अनुभव से तय होती है. लखनऊ की सड़कों पर टीम को पुलिस की मौजूदगी दिखाई दी, कुछ महिलाओं और परिवारों का भरोसा भी दिखा, लेकिन कुछ महिलाओं ने डर की भी बात कही.

