NDA की प्रचंड लहर में भी कैसे हार गए मंत्री रहे सुमित कुमार, जानिए चकाई सीट का हाल
एनडीए की प्रचंड लहर में एक को छोड़कर सभी मंत्रियों ने जीत दर्ज की. आखिर क्यों हुई सुमित कुमार की हार इस रिपोर्ट में जानिए.

Published : November 15, 2025 at 5:36 PM IST
जमुई: बिहार में इस बार का विधानसभा चुनाव बेहद रोचक रहा. जहां एक तरफ RJD अंतिम क्षणों तक अपनी सरकार बनाने का दावा कर रही थी, वहीं जनता ने NDA को स्पष्ट बहुमत देकर सबको चौंका दिया. मोदी-नीतीश की जोड़ी एक बार फिर सत्ता में लौट आई है.
इस जीत की सबसे खास बात रही नीतीश कैबिनेट के मंत्रियों का शानदार प्रदर्शन. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदा मंत्रिपरिषद के कुल 29 मंत्री मैदान में थे, जिनमें से 28 ने धमाकेदार जीत हासिल की. सिर्फ एक मंत्री को हार का सामना करना पड़ा. जदयू कोटे से कैबिनेट मंत्री सुमित कुमार सिंह चुनाव हार गए. वे चकाई सीट से मैदान में थे, लेकिन जीत नहीं पाए.

बीजेपी का क्लीन स्वीप: बीजेपी ने अपने सभी 17 मंत्रियों को मैदान में उतारा था और सभी ने जीत हासिल की. इनमें पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय भी शामिल हैं. बीजेपी के विजयी 17 मंत्रियों में सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा, प्रेम कुमार (35 साल से लगातार जीत रहे), रेणु देवी, मंगल पांडेय, नीरज कुमार बब्लू, नीतीश मिश्रा, नीतीन नवीन, जिवेश कुमार, संजय सरावगी, कृष्णानंदन पासवान, केदार गुप्ता, सुरेंद्र मेहता, डॉ. सुनील कुमार, राजू सिंह, विजय मंडल और कृष्ण कुमार मंटू.
जदयू का भी दमदार प्रदर्शन: जदयू के 12 में से 11 मंत्री जीते. सिर्फ सुमित कुमार सिंह को छोड़कर बाकी सभी ने जीत का स्वाद चखा. जदयू के विजयी 11 मंत्री हैं, विजय कुमार चौधरी, बिजेन्द्र प्रसाद यादव, श्रवण कुमार, लेशी सिंह, मदन सहनी, महेश्वर हजारी, शीला कुमारी मंडल, सुनील कुमार, जयंत राज, मोहम्मद जमाखान और रत्नेश सदा.

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में चकाई सीट सुर्खियों में रही: चकाई से जदयू कोटे से मंत्री और निर्दलीय से एनडीए में आए सुमित कुमार सिंह को राजद की सावित्री देवी ने 12,965 वोटों के बड़े अंतर से हरा दिया. इसके साथ ही चकाई की राजनीति एक बार फिर दो कद्दावर परिवारों नरेंद्र सिंह और फाल्गुनी प्रसाद यादव के इर्द-गिर्द ही घूमती नजर आई.
चुनाव परिणाम एक नजर में
- विजेता: सावित्री देवी (राजद)
- उप-विजेता: सुमित कुमार सिंह (जदयू) – हार
- तीसरे स्थान पर: संजय प्रसाद (निर्दलीय) – लगभग 48,026 वोट
संजय प्रसाद बने हार का बड़ा कारण?: जदयू के पुराने नेता और दो बार एमएलसी रह चुके संजय प्रसाद चकाई से लगातार चुनाव लड़ते आए हैं. सुमित सिंह और संजय प्रसाद के बीच अदावत किसी से छिपी नहीं है. इस बार भी संजय प्रसाद जदयू टिकट की दौड़ में थे, लेकिन टिकट सुमित सिंह को मिलते ही उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया. जानकारों का मानना है कि संजय प्रसाद ने एनडीए के वोटों को बांटकर सुमित सिंह की हार में बड़ी भूमिका निभाई.
चकाई की राजनीति: चकाई विधानसभा की सियासत लंबे समय से दो दिग्गज परिवारों के बीच घूमती रही है, पहला नरेंद्र सिंह परिवार जिनके बेटे हैं सुमित कुमार सिंह, और दूसरा फाल्गुनी प्रसाद यादव परिवार जिसमें दिवंगत फाल्गुनी प्रसाद की पत्नी हैं सावित्री देवी. चकाई की जनता ने अब तक दोनों कद्दावर परिवारों को बारी-बारी से मौका दिया है. इस बार सावित्री देवी की जीत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि चकाई की राजनीति की धुरी अभी भी इन दो परिवारों के बीच ही घूम रही है.
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