ETV Bharat / state

अब अस्पतालों की दीवारें होंगी बैक्टीरिया फ्री, PU के वैज्ञानिकों ने बनाया खास एंटीमाइक्रोबियल पेंट

पीयू के वैज्ञानिकों ने पेटेंट वाला एंटीमाइक्रोबियल पेंट बनाया है, जो अस्पतालों में बैक्टीरिया और संक्रमण रोकने का काम करेगा.

PU Scientists Antimicrobial paint
पंजाब यूनिवर्सिटी (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Haryana Team

Published : January 3, 2026 at 1:27 PM IST

3 Min Read
Choose ETV Bharat

चंडीगढ़: कोविड महामारी के दौरान अस्पतालों में मरीजों को इलाज के दौरान संक्रमण लगना बड़ी चुनौती बना हुआ था। इस समस्या का हल निकालते हुए पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के वैज्ञानिकों ने एक खास एंटीमाइक्रोबियल पेंट तैयार किया है, जिसे भारत सरकार ने पेटेंट भी दे दिया है. यह पेंट दिखने में सामान्य पेंट जैसा है, लेकिन सतह पर मौजूद खतरनाक बैक्टीरिया को ये धीरे-धीरे खत्म कर देता है.

अस्पतालों को बनाएगा सुरक्षित: पीयू के वैज्ञानिकों की मानें तोइस पेंट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे दीवारों, बेड, फर्नीचर और अन्य सतहों पर लगाया जा सकता है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा कम हो जाता है.यानी अस्पतालों और क्लीनिकों की सतहें ज्यादा सुरक्षित बन सकती हैं. यह केवल सजावट का माध्यम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण उपाय है.

रिसर्च टीम में ये रहे शामिल: इस रिसर्च का नेतृत्व केमिकल इंजीनियरिंग और नैनोटेक्नोलॉजी विभाग के प्रोफेसर गौरव वर्मा ने किया. उनके साथ बायोफिजिक्स विभाग की प्रोफेसर अवनीत सैनी, डॉ. शुभी जोशी, और एमएससी छात्रा दीक्षा शर्मा इस प्रोजेक्ट में शामिल रही. टीम ने लगातार मेहनत और शोध के माध्यम से यह पेंट तैयार किया.

PU Scientists Antimicrobial paint
पीयू की रिसर्च टीम (ETV Bharat)

हर तरह से सुरक्षित: पीयू के वैज्ञानिकों के अनुसार इस पेंट की खासियत यह है कि यह जहरीला नहीं है और हवा में नहीं फैलता, इसलिए मरीजों, डॉक्टरों और नर्सों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है. इसका इस्तेमाल अस्पतालों और क्लीनिकों में आसानी से किया जा सकता है और यह सतहों को लंबे समय तक संक्रमण मुक्त बनाए रखता है.

कोरोना काल में आया आइडिया: पीयू के वैज्ञानिकों ने बताया कि इसका आइडिया साल 2021–22 में कोविड के दौरान आया. खासकर डेल्टा लहर के समय, जब अस्पतालों में संक्रमण और ब्लैक फंगस के मामले बढ़ गए थे. उस समय टीम ने महसूस किया कि बार-बार छुई जाने वाली सतहें भी बीमारी फैलाने का बड़ा कारण हैं.

लंबे समय से चल रहा था शोध: वैज्ञानिकों की मानें तो रिसर्च की कहानी साल 2018 से शुरू हुई, जब शुभी जोशी ने प्रोफेसर वर्मा से पीएचडी के लिए संपर्क किया. कोविड के दौरान भी टीम ने नियमों का पालन करते हुए लैब में काम जारी रखा. अंततः 2022 में यह पेंट तैयार हुआ. प्रोफेसर वर्मा का कहना है कि, "पेंट सिर्फ दीवारों को सजाने के लिए नहीं, बल्कि लोगों की सेहत और जान बचाने में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा."

ये भी पढ़ें:चंडीगढ़ मेयर चुनाव की तारीख तय, प्रशासनिक तैयारियां तेज

ये भी पढ़ें:जींद पहुंची देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, सोनीपत रूट पर दौड़ेगी, 140 KM होगी रफ्तार, जानें खासियत