मॉडर्न अरोमाथेरेपी ट्रीटमेंट को बढ़ावा देने पर जोर, कैप शुरू करने जा रहा है ट्रेनिंग प्रोग्राम
हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट मॉडर्न अरोमाथेरेपी ट्रीटमेंट पर फोकस करते हुए ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू करने जा रहा है.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : March 1, 2026 at 11:52 AM IST
रोहित कुमार सोनी
देहरादून: भारत सरकार के साथ ही उत्तराखंड सरकार आयुष चिकित्सा पर जोर दे रही है. ताकि लोग अधिक से अधिक किसका इस्तेमाल करें. इसके साथ ही, प्रदेश में मौजूद जड़ी- बूटियों का सदुपयोग होने के साथ ही उनका संरक्षण किया जा सके. इसी क्रम में उत्तराखंड उद्यान विभाग अरोमाथेरेपी पर जोर दे रहा है. ताकि प्राचीन समय से चली आ रही अरोमाथेरेपी यानि सुगंध उपचार को बढ़ावा दिया जा सके. आज के इस दौर में भी घरों में सर्दी जुकाम समेत अन्य छोटी मोटी बीमारियों में अरोमाथेरेपी इस्तेमाल किया जा रहा है. यही वजह है कि सगंध पौध केंद्र (कैप), मॉडर्न अरोमाथेरेपी पर जोर दे रहा है, ताकि बिना किसी साइड इफेक्ट के इसका बेहतर ढंग से इस्तेमाल किया जा सके.
दरअसल, अरोमाथेरेपी के जरिए छोटे-मोटी तमाम बीमारियों का इलाज किया जा सकता है. लेकिन वर्तमान समय में इसका बेहतर इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है, जबकि इस थेरेपी के जरिए सिरदर्द, तनाव, स्किन प्रॉब्लम, भावनात्मक संतुलन, सर्दी जुकाम, साइनस ब्लॉकेज, मांसपेशियों में दर्द और सूजन समेत तमाम दिक्कतों को दूर किया जा सकता है. यही वजह है कि अब सगंध पौध केंद्र मॉडर्न अरोमाथेरेपी को बढ़ावा देने के साथ ही लोगों के बीच इसके इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू करने जा रहा है. ताकि लोग अरोमाथेरेपी का न सिर्फ इसके इस्तेमाल की प्रति जागरूक हो बल्कि, दूसरों को भी इसकी जानकारी दें.
वहीं, ज्यादा जानकारी देते हुए सगंध पौध केंद्र के निदेशक नृपेंद्र चौहान ने कहा कि, अरोमाथेरेपी कोई नई थेरेपी नहीं है, बल्कि प्राचीन ग्रंथों में इसका उल्लेख है. अरोमाथेरेपी को पहले सुगंध उपचार कहा जाता था, जिसका यज्ञ सबसे बड़ा उदाहरण है. क्योंकि जब पहले यज्ञ किया जाता था तो उससे घर बैक्टीरिया फ्री हो जाते थे. साथ ही उसके सुगंध से मानव शरीर को भी तमाम परेशानियों से निजात मिलती थी. लेकिन पहले जब जड़ी बूटियां को जलाया जाता था तो उसके सुगंध के साथ ही धुआं भी शरीर के अंदर जाता था जो नुकसान पहुंचता था. लेकिन वर्तमान समय में सुगंध उपचार को एक मॉडर्न रूप देते हुए अरोमाथेरेपी कर दिया है. जिससे उपचार के दौरान धुंआ शरीर के अंदर नहीं जाएगा.

अरोमाथेरेपी के लिए उपचार में इस्तेमाल होने वाले चीजों का एसेंशियल ऑयल निकाल लिया जाता है. जिसको अफेक्टेड पार्ट पर मसाज करना या फिर पानी में डालकर भाप (स्ट्रीम) ली जाती है. ऐसे में जड़ी बूटियां को जलाने की जरूरत नहीं पड़ती है. साथ ही इससे धुआं शरीर के अंदर भी नहीं जाता. यानी ये पूरी तरह से ऑर्गेनिक और सुरक्षित है, जिससे शरीर को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा. बल्कि सिर्फ स्वास्थ्य को लाभ होगा. जुकाम होने पर लोग घर में स्टीम लेते हैं, जो अरोमाथेरेपी का एक तरीका है. ऐसे में उपचार के लिए सही तेल और उसकी क्वांटिटी का चुनाव कैसे करें, इसके लिए सगंध पौध केंद्र, ट्रेनिंग शुरू करने जा रहा है.
-नृपेंद्र चौहान, निदेशक, सगंध पौध केंद्र-

साथ ही बताया कि ऐसे में जो भी अरोमाथेरेपी की ट्रेनिंग लेना चाहते हैं, वो सगंध पौध केंद्र से ले सकते हैं. इसके लिए केंद्र की ओर से 25-25 लोगों का बैच तैयार करने का निर्णय दिया गया है, जिनको ट्रेनिंग दी जाएगी. साथ ही बताया कि तेल और उसकी मात्रा की जानकारी के लिए ट्रेनिंग संबंधी तैयारियां पूरी की जा चुकी है. निदेशक नृपेंद्र ने कहा कि स्कूल ऑफ परफ्यूमरी की शुरुआत कर दी गई है. जिसके तहत छोटे-छोटे बैच के जरिए युवाओं को ट्रेनिंग दी जा रही है. हालांकि, परफ्यूमरी सीखने के लिए एक प्रक्रिया होती है जिसमें लगभग तीन साल का समय लगता है.

वर्तमान समय में लगभग हर जगह पर सुगंध के लिए तमाम चीजों का इस्तेमाल किया जा रहा है. लेकिन वह सभी चीजें लगभग सिंथेटिक है. जिसे चलते कई बार लोगों को एलर्जी हो जाती है. जिसको देखते हुए सगंध पौध केंद्र नेचुरल ऑयल बेस्ड प्रोडक्ट तैयार करेंगे, ताकि लोगों को खुशनुमा माहौल मिले. साथ ही उनकी थेरेपी भी होती रहे. यह पूरी तरह से नेचुरल और हर्बल होगा. यह शुरुआत उत्तराखंड से हो रही है लिहाजा, ये धीरे-धीरे देशभर में फैलेगी.
-नृपेंद्र चौहान, निदेशक, सगंध पौध केंद्र-

वहीं, आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. अर्चना कोहली ने कहा कि,
अरोमाथेरेपी, वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति में शामिल है. क्योंकि इस थेरेपी में पौधों और फूलों से निकाले गए एसेंशियल ऑयल की सुगंध का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि, इसका इस्तेमाल घर में भी लोग समान रूप से करते ही हैं. खासकर, सर्दी जुकाम के दौरान बच्चों को भाप दिलाना भी इसी थेरेपी का हिस्सा माना जाता है.
इसके अलावा, आयुर्वेद में भी दर्द निवारक समेत तमाम तरह की जड़ी बूटियां से बनी दवाइयां उपलब्ध हैं, जिससे मसाज करने की सलाह दी जाती है. इसी तरह अरोमाथेरेपी के लिए भी फूलों और पौधों से निकल गए एसेंशियल ऑयल का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन किसी भी दवाई का इस्तेमाल या थेरेपी से पहले चिकित्सीय परामर्श जरूर लेना जरूरी है.
डॉ. अर्चना कोहली, आयुर्वेद चिकित्सक
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