भरतपुर बन रहा 'हनी हब' : 4500 लोगों को रोजगार, विदेशों तक पहुंच रहा जिले का शहद
राजस्थान के भरतपुर जिले में राज्य सरकार की ओर से मधुमक्खी पालन उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की जा रही है. जानिए किया होगा खास...

Published : January 7, 2026 at 8:44 PM IST
|Updated : January 8, 2026 at 6:47 AM IST
भरतपुर: जिले में मधुमक्खी पालन अब केवल एक सहायक कृषि गतिविधि नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार सृजन का मजबूत आधार बन चुका है. शहद उत्पादन से जिले में करीब 4500 लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है. हर साल लगभग 2400 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन कर भरतपुर देश के टॉप-5 शहद उत्पादक जिलों में अपनी पहचान बना चुका है. अब इस क्षेत्र को और मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार की ओर से मधुमक्खी पालन उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की जा रही है, जिससे भरतपुर को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'हनी हब' के रूप में पहचान मिलने की उम्मीद है. इसके लिए जमीन आवंटित कर कार्य शुरू कर दिया गया है.
1997 से शुरू हुआ सफर : कृषि विभाग के उपनिदेशक (उद्यान) जनकराज मीणा ने बताया कि भरतपुर जिले में मधुमक्खी पालन का कार्य वर्ष 1997 में शुरू हुआ था. शुरुआती दौर में यह गतिविधि सीमित किसानों तक ही थी, लेकिन समय के साथ इसकी उपयोगिता और लाभ की जानकारी मिलती गई. वर्तमान में जिले के करीब 1500 किसान सीधे तौर पर मधुमक्खी पालन कर रहे हैं. इसके अलावा शहद संग्रहण, बॉक्स निर्माण, परिवहन, पैकेजिंग, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग से जुड़े कार्यों के माध्यम से लगभग 3000 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिला हुआ है. इस तरह कुल मिलाकर लगभग 4500 लोगों की आजीविका शहद उत्पादन से जुड़ी हुई है.
80 हजार बॉक्स, 2400 मीट्रिक टन शहद : भरतपुर जिले में इस समय विभिन्न मधुमक्खी पालकों के पास करीब 80 हजार मधुमक्खी बॉक्स उपलब्ध हैं. इन बॉक्सों से सालाना लगभग 2400 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन हो रहा है. इसके साथ-साथ लगभग 32 मीट्रिक टन मोम का उत्पादन भी किया जा रहा है, जिसका उपयोग दवा, कॉस्मेटिक और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में होता है.
रबी सीजन में जिले में सरसों की बड़े पैमाने पर खेती होती है. सरसों के फूलों से मिलने वाला रस मधुमक्खियों द्वारा एकत्र किया जाता है, जिससे मस्टर्ड हनी (सरसों का शहद) तैयार होता है. यह शहद अपनी गुणवत्ता और स्वाद के कारण देश-विदेश में खास पहचान रखता है.
यूएस, यूरोप, कनाडा तक पहुंच : मीणा ने बताया कि भरतपुर में उत्पादित मस्टर्ड हनी को विभिन्न प्रोसेसिंग यूनिट्स द्वारा वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्कृत किया जाता है. इसके बाद इसे अमेरिका, यूरोप, कनाडा, कुवैत सहित कई देशों में निर्यात किया जाता है. अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरने वाला यह शहद भरतपुर को वैश्विक शहद मानचित्र पर मजबूत स्थान दिला रहा है.

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10 करोड़ की लागत से बनेगा केंद्र : मीणा ने बताया कि मधुमक्खी पालन को और अधिक संगठित और वैज्ञानिक बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री की बजट घोषणा के तहत भरतपुर जिले में मधुमक्खी पालन उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की जा रही है. इसके लिए मईगुजर क्षेत्र में 9.83 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई है. इस भूमि पर केंद्र की आधारभूत संरचनाओं के विकास का कार्य शुरू हो चुका है. इस परियोजना की कुल लागत करीब 10 करोड़ रुपये है. पहले चरण में 4 करोड़ रुपए का बजट आवंटन किया गया है. केंद्र के पूर्ण रूप से स्थापित होने के बाद यह राजस्थान के लिए एक प्रमुख प्रशिक्षण और शोध केंद्र के रूप में कार्य करेगा.

अधिक उत्पादन की मिलेगी ट्रेनिंग : जनकराज मीणा ने बताया कि इस केंद्र के माध्यम से किसानों को यह सिखाया जाएगा कि कम लागत और कम श्रम में अधिक उत्पादन कैसे लिया जा सकता है. आधुनिक बॉक्स प्रबंधन, रोग नियंत्रण, रानी मधुमक्खी प्रबंधन और मौसम के अनुसार माइग्रेशन जैसी तकनीकों पर विशेष जोर दिया जाएगा. इसका लाभ न केवल भरतपुर, बल्कि आसपास के जिलों और अन्य राज्यों के मधुमक्खी पालकों को भी मिलेगा.

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सरसों की पैदावार में 15% तक बढ़ोतरी संभव : भरतपुर पहले से ही देश के प्रमुख सरसों बेल्ट में शामिल है. जिले में करीब 1.47 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की खेती की जाती है. वैज्ञानिक अध्ययनों में यह साबित हो चुका है कि यदि सरसों के खेतों में मधुमक्खी बॉक्स रखे जाएं तो परागण की प्रक्रिया तेज होती है, जिससे 10 से 15 प्रतिशत तक फसल उत्पादन बढ़ सकता है. इससे किसानों को दोहरा लाभ मिलता है, एक ओर शहद से अतिरिक्त आय और दूसरी ओर सरसों की बढ़ी हुई पैदावार.


