ETV Bharat / state

इतालवी मधुमक्खियों की HONEY ला रही MONEY, कोरिया का सोन हनी किसानों को बना रहा समृद्ध

छत्तीसगढ़ का कोरिया जिला केवल जंगल और खनिज संसाधनों के लिए नहीं, बल्कि जैविक शहद सोन हनी के लिए भी पहचाना जा रहा है.

Honey production from Italian bees
सोन हनी किसानों को बना रहा धनवान (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
author img

By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : December 30, 2025 at 10:44 PM IST

7 Min Read
Choose ETV Bharat


कोरिया : जहां चाह होती है वही राह निकलती है,इन लाइनों को सच कर दिखाया है कोरिया जिले के सोनहत में रहने वाले उन्नत किसानों ने. इन किसानों ने पारंपरिक खेती से हटकर मधुमक्खी पालन की ओर रुख किया.जिसका नतीजा ये हुआ कि इनके उत्पाद सिर्फ जिले में ही नहीं बल्कि देश में भी मशहूर हो गए हैं. मधुमक्खियों के जरिए जुटाया गया शहद पूरी तरह से जैविक है,इसलिए इसका स्वाद भी लाजवाब है.इस शहद को किसान बाजार में सोन हनी के नाम से बेचते हैं.


ग्रामीणों की मेहनत से ब्रांड बनने तक का सफर
सोन हनी शहद की शुरुआत कोरिया जिले के बैकुंठपुर और सोनहत ब्लॉक से हुई. वर्तमान में इन दोनों ब्लॉकों के करीब 45 किसान परिवार सामूहिक रूप से इस शुद्ध जैविक शहद का उत्पादन कर रहे हैं. ये शहद पूरी तरह से प्राकृतिक और रसायन मुक्त हैं. जंगलों और आसपास के क्षेत्रों में पाए जाने वाले फूलों से मधुमक्खियां पराग इकट्ठा करती हैं, जिससे शहद का स्वाद और गुणवत्ता दोनों उत्कृष्ट बनता है.

सोन हनी शहद से बढ़ रही किसानों की आय (ETV BHARAT)



कृषि विज्ञान केंद्र और जिला प्रशासन की अहम भूमिका
कोरिया जिले में जैविक शहद उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और जिला प्रशासन मिलकर लगातार प्रयास कर रहे हैं. किसानों को मधुमक्खी पालन का वैज्ञानिक प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक की जानकारी, शासन की योजनाओं से आर्थिक सहायता, मार्केटिंग और ब्रांडिंग सपोर्ट प्रदान किया जा रहा है, ताकि सोन हनी शहद को राष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा से ज्यादा पहचान मिल सके.

Italian beehives
इतावली मधुमक्खियों के छत्ते (ETV BHARAT CHHATTISGARH)



रटगा और केशगवा शहद उत्पादन के केंद्र

बैकुंठपुर ब्लॉक का रटगा गांव और सोनहत ब्लॉक का केशगवा गांव आज मधुमक्खी पालन के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं. यहां के ग्रामीण पारंपरिक खेती के साथ-साथ मधुमक्खी पालन को अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं. रटगा गांव के किसान रामदीन मधुमक्खी पालन से आत्मनिर्भर बने किसानों में शामिल हैं. रामदीन ने बताया कि मधुमक्खी पालन से उन्हें दोहरा लाभ हो रहा है. एक तो उन्हें शुद्ध मधु मिलता है, जिसे वो अपने परिवार के साथ खाते हैं और दूसरा वो इसे शहर में बेचकर आमदनी लेते हैं.

Benefit from italian bees
इतालवी मधुमक्खियों के फायदे (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

मधुमक्खी पालन के लिए बाकायदा प्रशिक्षण लिया है और शासन से मिली सहायता का पूरा उपयोग कर रहे हैं. शासन की ओर से मुझे मधुमक्खी पालन के लिए सहायता मिली है.अब मैं और अधिक मधु उत्पादन करने की कोशिश कर रहा हूं ताकि मेरी आमदनी बढ़ सके- रामदीन, किसान



महिला किसान फूल कुमारी की सफलता की कहानी

सोनहत ब्लॉक की फूल कुमारी इस पहल में महिला सशक्तिकरण की मजबूत मिसाल हैं. फूल कुमारी ने बताया कि हमें फूल की खेती और पानी की व्यवस्था के बारे में बताया गया था. सही तरीके से करने पर बढ़िया उत्पादन हुआ. करीब डेढ़ क्विंटल उत्पादन हुआ, जिसमें से 60–70 हजार रुपए का माल लोकल बाजार में बेचे हैं. फूल कुमारी जैसी महिलाएं अब केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर किसान बन रही हैं.

Earning from Italian Honey Bee
इतालवी हनी बी से कमाई (ETV BHARAT CHHATTISGARH)



हरियाणा से प्रशिक्षण, झारखंड से लाई गईं इटालियन मधुमक्खियां

सोन हनी शहद की गुणवत्ता के पीछे वैज्ञानिक प्रशिक्षण और उन्नत नस्ल का बड़ा योगदान है. किसानों को हरियाणा के कुरुक्षेत्र में मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण दिया गया.इसके बाद झारखंड से इटालियन नस्ल की मधुमक्खियां मंगाई गईं. ये मधुमक्खियां अधिक शहद उत्पादन के लिए जानी जाती हैं.

harm from italian bees
इतालवी मधुमक्खियों से नुकसान (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

हम किसानों को लगातार तकनीकी मार्गदर्शन दे रहे हैं. सोन हनी शहद की गुणवत्ता बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है. यह पूरी तरह जैविक और शुद्ध है- कमलेश सिंह,प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र

मन की बात में जिक्र, मिली राष्ट्रीय पहचान

आपको बता दें कि सोन हनी शहद को उस समय देशभर में पहचान मिली, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के किसानों के जैविक शहद का जिक्र किया. प्रधानमंत्री के जिक्र के बाद सोन हनी शहद की मांग बढ़ी, किसानों का आत्मविश्वास बढ़ा, और कोरिया जिले को एक नई पहचान मिली. कोरिया जिले के किसानों द्वारा तैयार किया गया सोन हनी शहद आज GEM पोर्टल समेत कई प्रतिष्ठित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध है. यह शहद न केवल कोरिया जिले के किसानों के लिए गर्व की बात है, बल्कि यह देशभर के जैविक उत्पादकों के लिए भी एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरा है.

Farmers becoming rich
मधुमक्खी पालन से किसान हो रहे धनवान (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

मेहनत के लिए जानी जाती हैं इतावली मधुमक्खियां

डॉ. विजय कुमार ने बताया कि जैविक शहद स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी होता है. सोन हनी शहद प्राकृतिक तरीके से तैयार किया गया है, जिससे इसकी पोषण गुणवत्ता बनी रहती है. इतालवी मधुमक्खी दुनिया भर में मधुमक्खी पालकों की पहली पसंद है. इतालवी मधुमक्खियां अपनी उच्च उत्पादकता और नई फसल से तुरंत शहद बनाने की क्षमता के लिए प्रसिद्ध हैं. इन मधुमक्खियों को अपने जुझारुपन के लिए जाना जाता है, भोर की पहली किरण से ही ये मधुमक्खियां काम शुरु करती हैं और देर शाम तक शहद जुटाती हैं.इनकी खासियत ये है कि ये फूलों से पराग अधिक मात्रा में इकट्ठा करती हैं और ओस की बूंदें कम.

Son honey made mark in country
सोन हनी ने देश में बनाई पहचान (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

इतावली मधुमक्खियां जल्दी शहद निकालने के लिए अनुकूल नहीं होती. विशेष रूप से मौसम के मध्य और अंत में अत्यधिक उत्पादन देती हैं. शहद संग्रह की बहुत अधिक आवश्यकता न होने पर भी, वे प्रति छत्ता 30 किलोग्राम तक शहद ला सकती हैं. लेकिन यदि भरपूर मात्रा में आसपास पौधे हों, तो वे अपनी पूरी क्षमता का प्रदर्शन करती हैं.इस दौरान वे 100 किलोग्राम से अधिक शहद का उत्पादन कर सकती हैं- डॉ विजय कुमार,विषय वस्तु विशेषज्ञ

रानी मधुमक्खी सबसे ज्यादा होशियार

रानी मधुमक्खी का औसत वजन लगभग 210 ग्राम होता है. इसके शरीर के बाल छोटे होते हैं और शरीर चपटा होता है. रानी मधुमक्खी अपनी उत्पादकता के लिए प्रसिद्ध है. एक दिन में ये 3000 तक अंडे दे सकती है, जिससे रिकॉर्ड समय में 6-8 किलोग्राम का एक मजबूत मधुमक्खी परिवार तैयार किया जा सकता है. रानी मधुमक्खी पूरे छत्ते में सावधानीपूर्वक अंडे देती है और यूक्रेनी, कार्पेथियन और रूसी मधुमक्खियों की तरह खराब, बरसाती मौसम में भी अंडे देना कम नहीं करती, जिससे संसाधनों की बचत होती है.

son honey of korea
कोरिया का सोन हनी हुआ फेमस (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

शांत स्वभाव के लिए मशहूर

मधुमक्खियां छत्ते का निरीक्षण करते समय आक्रामक नहीं होतीं, उन्हें शांत करने के लिए पानी या धुएं का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं होती. इतावली मधुमक्खियां कार्पेथियन और कॉर्डोवन मधुमक्खियों की तुलना में अधिक शांतिप्रिय होती हैं.

झुंड में रहना नहीं है पसंद

इतालवी मधुमक्खियां झुंड बनाने के लिए प्रवृत्त नहीं होती हैं. प्रतिकूल परिस्थितियों में, यह संख्या मधुमक्खी पालन क्षेत्र के 30% तक पहुंच सकती है. लेकिन शहद इकट्ठा करने का मौसम शुरू होते ही, ये मधुमक्खियां जल्दी ही इस स्थिति से बाहर आ जाती हैं. यदि छत्ते में कॉलोनी के विकास के लिए पर्याप्त जगह हो, तो ये मधुमक्खियां झुंड बनाए बिना ही अपना काम चला लेती हैं.

farmer keeping bees
मधुमक्खी पालन करता किसान (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता

ये मधुमक्खियाँ मोम के कीड़ों को सहन नहीं कर पातीं और यूरोपीय सड़न और एकारापेडोसिस जैसी बीमारियों के प्रति अन्य प्रजातियों की तुलना में अधिक प्रतिरोधी होती हैं. इसका मुख्य कारण मधुमक्खियों की अपने छत्ते को साफ करने की उच्च विकसित क्षमता है.

चोरी करने की प्रवृत्ति

इतालवी मधुमक्खियों की एक खास विशेषता है चोरी करने की प्रवृत्ति. एक बार मजबूत छत्ता बनने पर आस-पास के कमजोर छत्तों को लूटना शुरू करती हैं. साथ ही, वे अपने छत्तों को बाहरी लोगों से अच्छी तरह बचाती हैं.

''सोन हनी शहद ब्रांड'' से कोरिया के किसानों को मिली राष्ट्रीय पहचान, पीएम मोदी ने की सराहना

इन 5 आसान तरीकों से करें असली शहद की पहचान, कभी नहीं खाएंगे धोखा

सर्दियों में शहद के सेवन से क्या होता है? जान लें वरना बाद में पछताना न पड़ जाए