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अनोखी और 500 साल पुरानी परंपरा: होलिका दहन और भव्य फागडोल जतरा का अद्भुत संगम! जानें, कहां है ये स्थान

राजधानी रांची में होली के अवसर पर ऐतिहासिक मंदिर में अनोखी परंपरा का निर्वहन पिछले 500 साल से किया जा रहा है.

Holika Dahan and Phagdol Jatra wonderful confluence unique holi tradition in Ranchi
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : March 1, 2026 at 6:08 PM IST

3 Min Read
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रिपोर्ट- चंदन भट्टाचार्य.

रांचीः राजधानी रांची का ऐतिहासिक स्थल चुटिया, जो कभी नागवंशी राजाओं की राजधानी रही. आज भी अपनी समृद्ध परंपराओं और आस्था की विरासत को संजोए हुए है. वर्ष 1685 में स्थापित राम मंदिर, जिसे राधाबल्लभ मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, यहां की धार्मिक पहचान का केंद्र है. इसी मंदिर परिसर के पास लगभग 500 वर्षों से होलिका दहन और होली उत्सव की एक अनूठी परंपरा निभाई जा रही है, जो झारखंड में सबसे पहले होलिका दहन के लिए जानी जाती है.

चुटिया में होलिका दहन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और श्रद्धा का जीवंत प्रतीक है. मान्यता है कि नागवंशी राजाओं के समय से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है. जैसे ही यहां होलिका दहन संपन्न होता है, पूरे क्षेत्र में होली के उत्सव की शुरुआत मानी जाती है. सैकड़ों श्रद्धालु इस पावन क्षण के साक्षी बनने के लिए एकत्र होते हैं.

होलिका दहन और भव्य फागडोल जतरा का अद्भुत संगम, जानकारी देते महंत (ETV Bharat)

खास है भव्य फागडोल जतरा

होली के दिन यहां निकलने वाली भव्य फागडोल जतरा इस आयोजन का सबसे आकर्षक हिस्सा होती है. राधाबल्लभ मंदिर से भगवान राम और माता सीता के विग्रहों को सुसज्जित डोली में विराजमान कर बैंड-बाजे और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ नगर भ्रमण कराया जाता है. पूरा वातावरण भक्ति गीतों, गुलाल और उत्साह से सराबोर हो उठता है. श्रद्धालु रास्ते भर भगवान के जयकारे लगाते हुए डोली के साथ चलते हैं.

यह शोभायात्रा अपर चुटिया स्थित डोल जतरा मैदान तक पहुंचती है, जहां फूलों की होली खेली जाती है और भगवान को गुलाल अर्पित किया जाता है. यह दृश्य मानो वृंदावन की झलक प्रस्तुत करता है. महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सभी इस आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं, जिससे पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक रंग में रंग जाता है.

मंहत गोकुल दास कहते हैं कि “चुटिया की यह परंपरा हमारी सांस्कृतिक विरासत है. 500 वर्षों से यहां सबसे पहले होलिका दहन होता आ रहा है. नागवंशी राजाओं की आस्था और श्रद्धा से जुड़ा यह राम मंदिर आज भी लोगों की आस्था का केंद्र है. फागडोल जतरा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को एक सूत्र में बांधने का माध्यम है. यहां निकलने वाली झांकी और फूलों की होली वृंदावन की अनुभूति कराती है”. उन्होंने कहा, “हमारा प्रयास रहता है कि नई पीढ़ी भी इस परंपरा को समझे और इससे जुड़े. यह उत्सव हमें प्रेम, भाईचारे और धर्म की मर्यादा का संदेश देता है”.

चुटिया का यह आयोजन केवल एक पर्व नहीं, बल्कि इतिहास, भक्ति और संस्कृति का जीवंत उत्सव है, जो हर वर्ष श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है और झारखंड की समृद्ध धार्मिक विरासत को सशक्त रूप से प्रदर्शित करता है.

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