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होलिका दहन और धुलंडी 2026: मुहूर्त के असमंजस को पंचांगकर्ताओं ने किया क्लियर, बताया समय और डेट

इस बार होलिका दहन के मुहूर्त और धुलंडी के दिन चंद्रग्रहण के चलते लोगों में पर्व को लेकर असमंजस देखने को मिल रहा है.

Press meet of Panchang makers on Holi date and time
होली डेट एंड टाइम पर पंचागकर्ताओं की प्रेस मीट (ETV Bharat Bikaner)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : February 25, 2026 at 7:34 PM IST

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बीकानेर: होलिका दहन और धुलंडी मानने को लेकर असमंजस के बीच बुधवार को बीकानेर में पंचांगकर्ताओं और शास्त्र से जुड़े लोगों ने ने सामूहिक रूप से जानकारी देते हुए बताया कि होलिका दहन के दिन 4:23 बजे से भद्रा है. ऐसे में भद्रा में होलिका दहन नहीं हो सकता. इसलिए भद्रा के बाद ही होलिका दहन करना श्रेष्ठ है. वहीं धुलंडी के दिन चंद्र ग्रहण है, लेकिन चंद्र ग्रहण में धुलंडी पर्व मनाए जाने पर शास्त्रों में कोई रोक नहीं है. इस तरह इस बार होलिका दहन 2 मार्च को है और धूलंडी का पर्व 3 मार्च को मनाया जाएगा.

ये रहेगा मुहूर्त: पंचांगकर्ता, ज्योतिषाचार्य पं अशोक कुमार ओझा ने बताया कि वसुदेव कृष्ण धर्मसागर पञ्चांग में भी भद्रा में होलिका दहन करना पूर्ण रूप से मना बताया गया है. अतः इस वर्ष होली के दिन बहनों द्वारा भाइयों के माला घोलाई 2 मार्च को सायं 4:23 तक करना चाहिए एवं होलिका दहन 3 मार्च को प्रातः 4:06 बजे के बाद प्रातः 6:38 बजे तक करना ही शास्त्र सम्मत है.

पंचांग और शास्त्रानुसार ये है होली की डेट और टाइम (ETV Bharat Bikaner)

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धुलंडी के दिन चंद्र ग्रहण: 3 मार्च को चन्द्र ग्रहण दोपहर 3:28 बजे से प्रारम्भ होगा. बीकानेर सहित प्रदेश और देश के अलग–अलग हिस्सों में यह ग्रहण सायं 6:38 से चन्द्रोदय के साथ दृश्यमान होगा. जिसकी समाप्ति सायं 6:50 बजे होगी. बीकानेर में यह ग्रहण मात्र 12 मिनट ही दृश्य होगा. जिसका सूतक काल 3 मार्च को प्रातः 6:38 बजे से मान्य होगा एवं धुलण्डी उत्सव भी 3 मार्च को ही मनाया जाएगा. ज्योतिषाचार्य पं गिरिजाशंकर ओझा ने बताया कि सूतक काल में भोजन आदि स्पर्श का निषेध है, लेकिन बच्चों, रोगी, गर्भवती महिला एवं वृद्धजनों के लिए इनका दोष नहीं लगता. उन्होंने कहा कि धुलंडी पर्व खेलने के लिए चंद्र ग्रहण और सूतक होने से कोई अड़चन नहीं है.

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ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ: पंडित अशोक ओझा ने कहा कि ग्रहण के दौरान पाठ–पूजा, मंत्र–जाप करने की कोई मनाही नहीं है. केवल विग्रह और प्रतिमाओं को हाथ लगाना मना है. हवन करने से लाभ मिलता है. ग्रहण के दौरान ईश्वर का स्मरण करना चाहिए.