Holika Dahan 2026 : स्वर्ण नगरी में हुआ होलिका दहन, उदयपुर के सिटी पैलेस में भी पूर्व राजपरिवार ने परंपरा का निवर्हन किया
स्वर्ण नगरी जैसलमेर व उदयपुर में सोमवार सायं पारंपरिक आस्था और उत्साह के साथ होलिका दहन किया गया.

Published : March 2, 2026 at 10:13 PM IST
जैसलमेर/ उदयपुर: स्वर्ण नगरी में गुरुवार को होलिका दहन किया गया. बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक इस पर्व पर शहर के हर गली-मोहल्ले और चौराहों पर श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से होलिका का पूजन कर दहन किया. पूरे शहर में उत्सवी माहौल रहा और ढोल-मजीरों की थाप पर होली गीतों की गूंज सुनाई दी. पूर्व राजपरिवार की ओर से गांधी चौक स्थित नाचना हवेली के सामने होलिका दहन किया गया.
इस अवसर पर ठाकुर विक्रम सिंह नाचना ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच होलिका में अग्नि प्रज्वलित की. दहन से पूर्व शहर एवं आसपास के क्षेत्रों की महिलाओं ने पूजा-अर्चना कर अपने बच्चों की सुख-समृद्धि के लिए मन्नतें मांगीं और पारंपरिक रीति-रिवाज निभाए. महिलाओं ने छोटे बच्चों के नाम से बेर आदि की कंडियां बनाकर होलिका की पूजा की.
गुरुवार सायं काल निर्धारित मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ होलिका का पूजन-अर्चन कर अग्नि प्रज्ज्वलित की गई. होलिका दहन से पूर्व विभिन्न मोहल्लों में लोग मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर एकत्रित हुए. ढोल, झांझ और मजीरों की थाप पर होली के पारंपरिक फाग गीत गाए गए. 'रंग होली रे महाराज', 'होये होली खेले', 'थांरी बोली प्यारी लागे' जैसे लोकगीतों ने वातावरण को सरस बना दिया.
#WATCH | Rajmata Raseshwari Rajya Laxmi, of the erstwhile Jaisalmer royal family, says, " holi of jaisalmer and vrindavan is unique. these are the seats of lord krishna...holi dahan is a celebration wherein we collect all the evils within us and burn them up in the fire of… https://t.co/FWcwIBHOme pic.twitter.com/y4t0fL5yhE
— ANI (@ANI) March 2, 2026
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होलिका दहन के पश्चात लोगों ने परंपरा अनुसार अग्नि की राख माथे पर लगाकर आशीर्वाद लिया. शहर में जगह-जगह सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया. अबीर-गुलाल, केसरिया रंग और फूलों की वर्षा के बीच होलियारों की टोलियां आकर्षण का केंद्र बनी रहीं. देर शाम होलियारों की टोली ढोल-नगाड़ों के साथ विभिन्न मार्गों से होकर निकली और पूरे शहर को फागुन के रंगों में रंग दिया. जैसलमेर घूमने आए विदेशी सैलानियों ने भी इस पावन अवसर का भरपूर आनंद लिया और स्थानीय परंपराओं को नजदीक से देखा. स्वर्ण नगरी में होलिका दहन का यह आयोजन आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण बना.

सिटी पैलेस में भी पारंपरिक रूप से होलिका दहन : झीलों की नगरी उदयपुर में भी होलिका दहन बड़ी ही धूमधाम के साथ मनाया गया. उदयपुर की सिटी पैलेस में डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने गौरवशाली एवं शताब्दियों पुरानी परम्पराओं का अनुपम निर्वहन करते हुए पंडितों के वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य पारम्परिक विधि-विधान से होलिका दीपन किया. मेवाड़ अंचल में इसका विशेष सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व है. सिटी पैलेस उदयपुर के ऐतिहासिक माणक चौक में आयोजित इस वर्ष का यह महोत्सव प्राचीन राज परम्पराओं के अनुरूप साधारण रुप से अत्यंत श्रद्धा एवं गरिमा के साथ मनाया गया.
जिसमें डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ राजसी वेशभूषा में अपने लवाजमे के साथ माणक चौक पधारे, जहां पैलेस गार्ड द्वारा “महाराणा सल्यूट” प्रदान किया गया. वैदिक रीति से सम्पन्न होलिका पूजन में डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने विधिवत पूजा-अर्चना कर होलिका को ओढ़नी ओढ़ाई तथा पुष्पमाला, श्रीफल आदि अर्पित किए. फिर राजपरिवार के सदस्यों के साथ परिक्रमा कर विधिवत अग्नि प्रज्वलित की. इस अवसर पर मेवाड़ क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों एवं मठों से पधारे साधु-संतों और महंतों का विशेष सम्मान किया गया. महोत्सव के दौरान पारम्परिक ‘गैर’ नृत्य का आयोजन हुआ, जिसमें लोक कलाकारों ने मेवाड़ी संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत की और फुल फाग खेली गई.


