ETV Bharat / state

2 या 3 मार्च.. होलिका दहन कब है?, पंडितों से जानिए तिथि और शुभ मुहूर्त

इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च को होगा. पंडित के अनुसार, पूर्णिमा तिथि और भद्रारहित समय होने से यह शास्त्र सम्मत है. पढ़ें पूरी खबर-

HOLIKA DAHAN 2026
होलिका दहन 2026 (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Bihar Team

Published : March 2, 2026 at 9:47 AM IST

6 Min Read
Choose ETV Bharat

पटना: बिहार में होलिका दहन को लेकर बीते कुछ दिनों से लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी, लेकिन अब तस्वीर साफ हो गई है. पटना के ज्योतिषाचार्य पंडित राजन उपाध्याय ने बताया कि बनारस से प्रकाशित ऋषिकेश पंचांग के अनुसार इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च की रात्रि में किया जाएगा. उन्होंने बताया कि होलिका दहन फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है और इस बार यही तिथि 2 मार्च की रात में बन रही है. ऐसे में परंपरा और शास्त्रों के अनुसार उसी रात होलिका दहन करना शुभ माना जाएगा.

यह है होलिका दहन का शुभ मुहूर्त: ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस बार होलिका दहन का अति शुभ मुहूर्त 2 मार्च की रात्रि 12:50 बजे से लेकर 2:02 बजे तक रहेगा. शास्त्रों में कहा गया है कि होलिका दहन पूर्णिमा तिथि और भद्रारहित समय में करना श्रेष्ठ होता है. इस बार 2 मार्च की रात पूर्णिमा तिथि के साथ पूंछ की भद्रा का योग बन रहा है, जिसे शास्त्रों में दोषरहित माना गया है. इसलिए 2 मार्च की रात में किया गया होलिका दहन शास्त्र सम्मत और फलदायी होगा.

होलिका दहन शुभ मुहूर्त (ETV Bharat)

3 मार्च को हो रहा चंद्र ग्रहण: पंडित राजन उपाध्याय ने यह भी स्पष्ट किया कि घड़ी के समय के अनुसार 12 बजे के बाद तारीख बदलकर 3 मार्च हो जाती है, लेकिन पंचांग के अनुसार नई तिथि सूर्योदय के बाद ही मानी जाती है. इस कारण पंचांग की दृष्टि से यह समय अभी भी 2 मार्च की पूर्णिमा तिथि में ही आता है. उन्होंने बताया कि 3 मार्च को चंद्र ग्रहण का प्रभाव भी रहेगा, इसलिए उससे पहले 2 मार्च की रात तय मुहूर्त में होलिका दहन करना ज्यादा उचित रहेगा.

"अगर कोई व्यक्ति 2 मार्च की रात 12:50 से 2:02 बजे के बीच विधिपूर्वक होलिका दहन करता है, तो उसके जीवन की विघ्न बाधाएं दूर होती हैं और उसे आरोग्य की प्राप्ति होती है. मान्यता है कि होलिका की अग्नि में समर्पित की गई वस्तुओं के साथ शरीर और मन के रोग भी भस्म हो जाते हैं. यह पर्व केवल परंपरा नहीं, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करने का प्रतीक भी है."- राजेंद्र उपाध्याय, पंडित

नकारात्मक ऊर्जा से परेशान तो करें यह उपाय: पंडित राजन उपाध्याय ने बताया कि होलिका दहन के दिन विशेष उपाय भी किए जाते हैं. अगर कोई व्यक्ति नकारात्मक ऊर्जा से परेशान है या उसके कार्यों में बार-बार बाधा आ रही है, तो वह उजाला बताशा, पान का पत्ता, सुपारी और लौंग हाथ की मुट्ठी में लेकर उसे सिर पर सात बार एंटी क्लॉकवाइज घुमाकर जलती हुई होलिका में डाल सकता है. ऐसा करने से नकारात्मक प्रभाव और विघ्न बाधा दूर होने की मान्यता है. वहीं नौकरीपेशा लोगों के लिए बताया गया कि यदि नौकरी से जुड़ी परेशानी चल रही हो, तो जायफल, 16 पीस कमलगट्टा और एक लौंग को सात बार एंटी क्लॉकवाइज सिर पर घुमाकर होलिका में अर्पित करना लाभकारी माना गया है.

तंत्र साधना का दिन होता है होलिका दहन: पंडित राजन उपाध्याय ने बताया कि होलिका दहन मुख्य रूप से तंत्र साधना का भी विशेष दिन होता है. होली के पर्व से आठ दिन पहले होलाष्टक प्रारंभ हो जाता है, जिसे तंत्र साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है. इस अवधि में लक्ष्मी, सरस्वती और ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए बीज मंत्रों का जाप करने से विशेष फल मिलता है. पौराणिक कथा के अनुसार प्रहलाद की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान नारायण ने नरसिंह अवतार लिया था, जो होलिका दहन की मूल प्रेरणा मानी जाती है.

हर जगह होलिका दहन को लेकर अलग परंपराएं: उन्होंने यह भी कहा कि होलिका दहन को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग लोक परंपराएं प्रचलित हैं. कहीं अनाज की आहुति दी जाती है तो कहीं गोबर के उपले और लकड़ी का उपयोग होता है. सभी परंपराएं अपने-अपने क्षेत्र की मान्यताओं से जुड़ी हैं और उन्हें श्रद्धा के साथ निभाना चाहिए. उन्होंने बताया कि होलिका दहन का विभिन्न राशि पर अलग-अलग प्रभाव पड़ रहा है. होलिका दहन का प्रभाव तीन राशि पर नकारात्मक है, दो राशि पर न्यूट्रल है और सात राशि पर सकारात्मक है.

विभिन्न राशियों पर होलिका के असर-
मेष - इस राशि पर मिला-जुला असर है और न्यूट्रल प्रभाव है. आध्यात्मिक कार्य से लाभ होगा.

वृषभ - इस राशि के जातक को राजकीय सुख की प्राप्ति होगी और सकारात्मक प्रभाव है.

मिथुन - बहुत परिश्रम करना पड़ेगा और अंतिम समय पर लगातार परिश्रम से सफलता मिलेगी. अधिक परिश्रम लेकिन कम सफलता का योग है.

कर्क - प्रभाव नकारात्मक है और मां पिता से संबंध खराब होने की संभावनाएं अधिक हैं.

सिंह - इस राशि के जातक को सभी भौतिक सुख की प्राप्ति होगी और प्रभाव काफी सकारात्मक है.

कन्या - प्रभाव सकारात्मक है और रोग शत्रु पर विजय की प्राप्ति होगी.

तुला - बौद्धिक और आर्थिक प्रगति होगी. प्रभाव काफी सकारात्मक है.

वृश्चिक - प्रभाव बहुत सकारात्मक है और चल अचल संपत्ति में वृद्धि होगी. वाहन सुख की प्राप्ति होगी.

धनु - सामाजिक क्षेत्र में पहचान और प्रभाव दोनों बढ़ेगा. राजनीति और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए अच्छा समय है.

मकर - आंखों से संबंधित समस्या हो और स्वास्थ्य संबंधीत परेशानी बढ़ेगी. वाणी पर नियंत्रण की जरूरत है.

कुंभ - कला क्षेत्र में काफी वृद्धि होगी और नई कला सीखने का अवसर मिलेगा.

मीन - पारिवारिक खर्च बढ़ेगा लेकिन शत्रु पर विजय भी प्राप्त होगा. क्रोध पर नियंत्रण रखना जरूरी है.

ये भी पढ़ें-

होली की छुट्टियों में राजगीर घूमने का बना रहे हैं प्लान तो ध्यान दें! 3 और 4 मार्च को बंद रहेंगे जू और नेचर सफारी

जलती चिताएं, झूमते अघोरी, रंग-गुलाल नहीं, राख से खेली जाती है मसान होली

Holi 2026: होलिका दहन के बाद नहीं मनाया जाएगा रंगों का त्योहार, जानें कब खेलेंगे होली