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चंद्र ग्रहण के बीच किस समय किया जाएगा होलिका दहन, कालकाजी पीठाधीश्वर से जानें शुभ मुहूर्त और विधि

भद्रा काल में होलिका दहन नहीं किया जाता है. इसे अशुभ माना गया है. भद्रा काल समाप्त होने के बाद होलिका दहन किया जाना चाहिए.

होलिका दहन के दिन पड़ रहा चंद्रग्रहण
होलिका दहन के दिन पड़ रहा चंद्रग्रहण (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Delhi Team

Published : March 1, 2026 at 1:09 PM IST

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नई दिल्ली: हिंदुओं का सबसे बड़ा त्योहारों में से एक होली है, जिसे रंगों का त्यौहार भी कहा जाता है. होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है और इस बार होलिका दहन को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है. कई पंचांग में 2 मार्च को होलिका दहन की तिथि तय की गई है तो किसी पंचांग में 3 मार्च को होलिका दहन की तिथि तय की गई है. ऐसे में लोगों में भ्रम देखा जा रहा है कि आखिरकार वह होलिका दहन 2 मार्च को करें या 3 मार्च को. क्योंकि होलिका दहन पूर्णिमा तिथि पर किया जाता है और इस बार भद्रा का वास है. इसलिए यह असमंजस की स्थिति देखी जा रही है.

दिल्ली के प्रसिद्ध कल्काजी मंदिर के महंत पीठाधीश्वर सुरेंद्रनाथ अवधूत ने कहा कि इस बार होलिका दहन को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति देखी जा रही है. उन्होंने कहा कि होलिका दहन भद्रारहित प्रदोष फाल्गुन पूर्णिमा में किया जाता है. इस बार 2 मार्च को पूर्णिमा के शुरू होते ही भद्रा भी लग जा रहा है और ऐसी स्थिति में होलिका दहन करना शुभ नहीं होता. वहीं अगले दिन उदय वापनी तिथि को देखते हुए पूर्णिमा तिथि है और 3 मार्च के शाम में 6:22 से शुरू होकर 8:50 तक होलिका दहन करने का शुभ मुहूर्त होगा.

सुरेंद्रनाथ अवधूत, प्रसिद्ध कल्काजी मंदिर के महंत पीठाधीश्वर (ETV Bharat)

उन्होंने कहा कि इस बार चंद्र ग्रहण भी है जो दोपहर 3:20 से शुरू होकर भारत में 6:57 तक रहेगा. वही दिल्ली में शाम 6:21 तक रहेगा. इसलिए शाम 6:22 से 8:50 तक होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रहेगा. अगले दिन 4 मार्च को रंग खेला जा सकता है. इस दिन होलिका दहन करते समय लोगों को लकड़ी और गोबर के उपले होलिका दहन में विसर्जित करने चाहिए. इसके साथ ही सात्विक पकवान जो होलिका के दिन बनता है, उसे भी विसर्जित अग्नि में किया जाना चाहिए. ऐसा करना शुभ होता है और घर में शांति और उन्नति का वास होता है. वहीं जिनकी नई शादी हुई है, उन्हें प्राचीन नियमों के अनुसार पहली होली ससुराल में नहीं खेलनी चाहिए और उन्हें अपने मायके चले जाना चाहिए.

बता दें कि भद्रा काल में होलिका दहन नहीं किया जाता है. इसे अशुभ माना गया है इसलिए भद्रा काल समाप्त होने के बाद ही होलिका दहन किया जाना चाहिए. होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत को दर्शाता है. इसलिए इस दिन सामाजिक सद्भावना के साथ होलिका दहन किया जाना चाहिए और अगले दिन रंगों के साथ लोग होली का त्यौहार मनाते हैं.

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