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उदयपुर में भक्ति के रंग में डूबा जगदीश मंदिर, खेरवाड़ा में होलिका दहन के बाद कंडों पर दौड़े युवा, निकाली प्रह्लाद की लकड़ी

ऐतिहासिक जगदीश मंदिर में जब ठाकुरजी के संग होली खेली गई, भक्त चंग की थाप और फाग के रसिया गीतों के बीच झूमते रहे.

Holi in Jagdish Temple in Udaipur
जगदीश मंदिर में प्रांगण में होली खेलते भक्त (Etv Bharat Udaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : March 4, 2026 at 1:42 PM IST

4 Min Read
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उदयपुर: उदयपुर की फाल्गुनी हवा में इस बार सिर्फ गुलाल ही नहीं, बल्कि भक्ति का गहरा रंग भी घुला नजर आया. ऐतिहासिक जगदीश मंदिर में बुधवार को जब ठाकुरजी के संग होली खेली गई, तो यह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भक्ति और भगवान के बीच प्रेम का जीवंत अनुभव बन गया. चंग की थाप और फाग के रसिया गीतों के बीच हर भक्त यह महसूस कर रहा था मानो वह सीधे अपने आराध्य के सान्निध्य में हो. इधर, जिले के खेरवाड़ा कस्बे के निचला खेरवाड़ा स्थित होली चौक में होलिका दहन के दौरान धधकते कंडों पर दौड़ते युवाओं ने सभी को हैरान कर दिया. इस दौरान जलती होली के बीच में से होली के डांडे को खींचकर ले जाने का दृश्य भी रोमांचक रहा. इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए आसपास के गांवों सहित बड़ी संख्या में लोग देर रात तक जुटे रहे. अब इसका वीडियो सामने आया है.

चंद्र ग्रहण के कारण एक दिन का विराम इस उत्साह को और अधिक गहरा बना गया. जैसे ही अगले दिन मंदिर के पट खुले, श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. घंटों कतार में खड़े रहने के बाद जब भक्तों को ठाकुरजी के दर्शन और उनके साथ गुलाल अर्पित करने का अवसर मिला, तो वह क्षण किसी आध्यात्मिक मिलन से कम नहीं था. यहां होली सिर्फ रंगों की नहीं, बल्कि समर्पण, आस्था और प्रेम की थी. देशी-विदेशी पर्यटक भी इस आध्यात्मिक रंगोत्सव से अछूते नहीं रहे. उन्होंने न सिर्फ इस परंपरा को देखा, बल्कि उसमें शामिल होकर भक्ति की होली का अनुभव किया.

खेरवाड़ा में जलती होली से लकड़ी निकालते युवक (Etv Bharat Udaipur)

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चंद्रगहण में रहे मंदिर के पट बंद: चंद्र ग्रहण होने के कारण एक दिन पहले मंगलवार को जगदीश मंदिर में ठाकुरजी को पारंपरिक होली नहीं खिलाई जा सकी थी. ग्रहण के चलते दोपहर बाद मंदिर के पट भी बंद कर दिए गए थे. यही वजह रही कि गुरुवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और भगवान के साथ होली खेलकर अपनी मुराद पूरी की. मंदिर के भीतर का नजारा अद्भुत था, जहां चंग की थाप पर होली के रसिया गीत गाए जा रहे थे. इन गीतों पर बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक ने जमकर नृत्य किया. महिलाएं और युवा भगवान की भक्ति में लीन होकर झूमते दिखाई दिए, जिससे पूरा मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा और हर तरफ गुलाल की चादर सी बिछ गई.

Holi in Jagdish Temple in Udaipur
खेरवाड़ा में जलती होली से लकड़ी निकालते युवक (Etv Bharat Udaipur)

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खेरवाड़ा में देर रात जलाई होली: खेरवाड़ा में मंगलवार रात करीब 1:30 बजे शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया गया. इससे पहले ही होली चौक पर ग्रामीणों का जमावड़ा शुरू हो गया था. आसपास के गांवों से लोग ढोल लेकर पहुंचे और लगभग एक दर्जन ढोल की थाप पर पारंपरिक गैर नृत्य किया गया. उत्साह और उमंग से भरे इस आयोजन ने पूरे माहौल को भक्तिमय और रंगीन बना दिया. होलिका दहन के बाद सबसे रोमांचक दृश्य तब देखने को मिला, जब ग्रामीण युवा धधकते कंडों पर दौड़ पड़े. इस दौरान जलती होली के बीच खड़ी प्रह्लाद स्वरूप लकड़ी को निकालकर पास की नदी में विसर्जित किया गया.

मेनार में बारूद की होली: वहीं, जिले के मेनार गांव में आज होली का विशेष आयोजन होने जा रहा है, जो अपनी अनोखी परंपरा के लिए देशभर में प्रसिद्ध है. मेनार में बारूद की होली खेली जाती है, जहां बड़ी मात्रा में बारूद के धमाकों के बीच उत्सव मनाया जाता है. इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए दूर-दूर से लोग यहां पहुंचते हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है. मान्यता है कि जलती होली से प्रह्लाद स्वरूप लकड़ी को निकालकर विसर्जित करने से क्षेत्र में शांति, समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है. मेनार की होली केवल रोमांच ही नहीं, बल्कि परंपरा और साहस का प्रतीक भी मानी जाती है. प्रशासन की निगरानी में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम हर वर्ष हजारों लोगों को आकर्षित करता है.