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होली पर बेफिक्र होकर उड़ाएं रंग-गुलाल, बस रखें स्किन का ध्यान...जानिए क्या कहते हैं चर्म रोग विशेषज्ञ

अगर आप भी होली खेलने के शौकिन हैं तो अपनी त्वचा को ध्यान में रखते हुए सूखी होली खेलें.

Holi skin care tips 2026
होली पर स्किन केयर (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : February 27, 2026 at 10:17 AM IST

5 Min Read
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पंचकूला: देश में 4 मार्च बुधवार को होली का पर्व मनाया जाना है. जहां इस पर्व पर पाठ-पूजा और अन्न अर्पण करने की परंपरा है, वहीं हर उम्र वर्ग के लोगों लिए होली का दिन हंसी-खुशी, ठिठौली करने का भी होता है. हर कोई एक-दूसरे के चेहरे पर रंग, गुलाल लगाकर बधाई देता है. लेकिन बदलते दौर के साथ होली का त्यौहार मनाने में भी अंतर आता गया है.

फिलहाल बाजारों में होली खेलने के लिए तरह तरह के रंग और गुलाल सज गए हैं. बाजार में अनेक केमिकल युक्त रंग-गुलाल और अन्य प्रोडक्ट भी मौजूद हैं, जिनसे त्वचा को नुकसान पहुंचता हैं. यहां तक की गंभीर चर्म रोग की संभावनाएं भी बनी रहती हैं. ऐसे में आप सभी अपने त्वचा का ध्यान कैसे रखें, इसके लिए ईटीवी भारत ने चर्म रोग विशेषज्ञ, पंचकूला जिला अस्पताल के सरकारी डॉक्टर से बातचीत की. यहां जानिए चर्मरोग विशेषज्ञ की राय...

जानिए क्या कहते हैं चर्म रोग विशेषज्ञ (ETV Bharat)

प्राकृतिक रंगों से खेलें होली: पंचकूला सेक्टर 6 स्थित जिला अस्पताल में चर्म रोग विभाग के एचओडी डॉक्टर संदीप सिंह साहनी ने कहा कि, "लोगों को होली सुरक्षित ढंग से खेलनी चाहिए. बच्चे, बड़े या महिलाएं, हर उम्र वर्ग के लोगों को होली पर प्राकृतिक गुलाल का इस्तेमाल करना चाहिए. बाजार में विभिन्न तरह के केमिकल युक्त रंग व नुकसानदेह प्रोडक्ट मौजूद हैं. लेकिन जिन रंग और गुलालों में कांच या अन्य नुकसान करने वाले केमिकल मौजूद हैं, उनकी खरीदारी से लोगों को बचा चाहिए."

होली पर सूती कपड़े पहनें: डॉ. संदीप सिंह साहनी ने कहा कि, "होली पर केमिकल युक्त रंगों और रंगों में कांच का इस्तेमाल होने से लोगों को स्किन एलर्जी और इंजरी होने का खतरा अधिक बढ़ जाता है. इससे बचाव के लिए सभी को पूरे शरीर को सूती कपड़ों से ढक कर होली खेलनी चाहिए. हानिकारक रंगों से बालों के नुकसान (हेयर डैमेज) का खतरा भी अधिक रहता है. नतीजतन लोगों को सिर पर टोपी या कपड़े से पूरी तरह कवर करके करके होली खेलनी चाहिए."

मॉइश्चराइजर व तेल का इस्तेमाल करें: डॉ. साहनी ने बताया कि, "लोगों को होली खेलने से पहले शरीर पर मॉइश्चराइजर लगाना (अप्लाई) करना चाहिए या फिर तेल लगाना चाहिए, ताकि रंग सूक्ष्म छिद्रों से त्वचा में न पहुंच सकें. इसके लिए शरीर पर नारियल तेल, वैक्सीन या कोई भी अच्छा मॉइश्चराइजर लगाना चाहिए. ऐसा करने से होली खेलने के बाद भी सभी रंग आसानी से उतर जाते हैं और एलर्जी व खारिश से बचाव रहता है. क्योंकि रंग सूखी (ड्राई) स्किन पर अधिक नुकसान करते हैं. लेकिन यदि अधिकांश शारीरिक अंगों पर मॉइश्चराइजर लगाया गया हो तो नुकसान से बचा जा सकता है. इसके अलावा लोगों को अपनी आंखों का भी ध्यान रखना चाहिए. नुकसानदेह रंगों से बचाव के लिए आंखों पर चश्मा पहनना चाहिए. जिन लोगों को धूप से एलर्जी है, उन्हें होली खेलने से पहले और बाद में भी सनस्क्रीन लगानी चाहिए."

एलर्जिक लोग होली खेलने से बचें: डॉ. संदीप सिंह साहनी ने कहा कि, "जिन किन्हीं भी लोगों को पहले से एलर्जी या इंफेक्शन है, उन्हें होली खेलने से बचना चाहिए. ऐसे लोगों के लिए केमिकल युक्त, आर्टिफिशियल कलर से अपना बचाव करना जरूरी है. कई लोग मुगलेल या ग्रीस व अन्य नुकसानदेह पदार्थ तक इस्तेमाल करते हैं, जिससे त्वचा को भारी नुकसान पहुंचता है, जोकि गलत है. प्राकृतिक रंगों, वेजिटेबल कलर व गुलाल का इस्तेमाल करना ही उचित है."

होली के बाद मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी: डॉ. साहनी ने कहा कि, "गलत तरीके से होली खेलने के कारण होली के अगले ही दिन से चर्म रोगियों की संख्या बढ़ जाती है. क्योंकि गलत तरीके से होली खेलने के कारण एलर्जी, खुजली, इरिटेशन व इन्फेक्शन के मरीजों की संख्या काफी अधिक रहती है, जिनकी संख्या एक सप्ताह तक बढ़ी रहती है. अगले ही दिन से रोजाना 15-20 अतिरिक्त चर्म रोगी इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते हैं."

शरीर गुनगुने पानी से धोएं: डॉक्टर साहनी ने बताया कि, "होली खेलने के तुरंत बाद हल्के गुनगुने पानी और साबून के साथ पूरे शरीर को अच्छे से धोना चाहिए. जितना जल्द रंग को त्वचा से उतार लेंगे, नुकसान उतना ही काम होता है. इसके बाद शरीर पर दोबारा अच्छे से मॉइश्चराइजर लगाना जरूरी है, ताकि संभावित नुकसान भी न हो सके."

इन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टरी परामर्श लें: डॉ. साहनी ने बताया कि, "होली खेलने के बाद यदि अधिक खुजली या जलन होती है तो ऐसी स्थिति में तुरंत अपने नजदीकी चर्म रोग विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए. समय की महत्वता का ध्यान रखना चाहिए, ताकि संभावित खतरा टाला जा सके."

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