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वाराणसी: भांग, पान, ठंडई और संगीत के साथ रंगों में घुली बनारसी होली की बात ही अलग है

बनारस की होली बाबा विश्वनाथ के दरबार से शुरू होती है और मसान में खत्म होती है.

बनारस की होली
बनारस की होली (Photo Credit; ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : March 3, 2026 at 9:09 PM IST

2 Min Read
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वाराणसी: बनारस की होली अल्हड़ता, मौज-मस्ती के लिए जानी जाती है, भांग, पान, ठंडई और जुगलबंदी के साथ हुल्लड़बाजी के रंगों में घुली बनारसी होली की बात ही निराली है, सब में बनारसी रंग नजर आता है. कहते हैं कि काशी नगरी की परंपराएं अनूठी, प्यारी और न्यारी है, बनारस की होली बाबा विश्वनाथ के दरबार से शुरु होकर और मसान में खत्म होती है.

रंग बिरंगे रंगों के बीच संगीत साधक भी फागुन में ढोल-नगाड़ों की थाप पर खूब झूमते-गाते नजर आते हैं. इस मौके पर बनारस की महलाएं भी आपने घरों में मां सरस्वती की आराधना करती बड़ी आसानी से दिख जाती हैं.

बनारस की होली (Video Credit; ETV Bharat)

होली पर संगीत गायिका डॉक्टर श्रुति कहती है कि हर त्यौहार की अपनी एक अलग महत्व होती है. होली की भी अपनी एक अलग मान्यता है. बनारस में एक ही होली अलग-अलग तरीके से कई रोज मनाई जाती है, लेकिन हम संगीत साधकों की होली अलग होती है. हम संगीत के जरिए होली मनाते हैं, फूलों की होली खेलते हैं और एक दूसरे को बधाई देते हैं. आज भी हम सभी अपने गीतों के जरिए मां सरस्वती को नमन कर रहे हैं. मां गंगा को प्रणाम कर रहे हैं और बाबा महादेव के लिए गीत गा रहे हैं. देखें वीडियो....

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