छत्तीसगढ़ के इस गांव में हफ्ते भर पहले ही उड़े रंग गुलाल, लोगों ने जमकर खेली होली, जानिए वजह
कोरिया के इस गांव में विधि विधान से होलिका दहन किया गया. दूसरे दिन सुबह सभी ने रंग गुलाल के साथ जमकर होली खेली.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 27, 2026 at 1:25 PM IST
|Updated : February 27, 2026 at 1:55 PM IST
कोरिया: छत्तीसगढ़ के कोरिया जिला में स्थित अमरपुर गांव अपनी अनूठी परंपरा के लिए पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध है. जहां एक ओर देशभर में होली भारतीय पंचांग के अनुसार मनाई जाती है, वहीं अमरपुर में दशकों से एक अलग परंपरा निभाई जा रही है. यहां होली मुख्य तिथि से पहले मनाई जाती है.
गांव में पहले पूजा कर होलिका दहन किया गया. फिर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने रंग-गुलाल के साथ जमकर होली खेली. ढोलक, मंजीरे और फाग गीतों की थाप पर पूरा गांव झूम उठा. आसपास के ग्रामीण भी इस अनोखी परंपरा को देखने और होली खेलने अमरपुर पहुंचे.
अनहोनी के डर से शुरू हुई परंपरा
गांव के बुजुर्गों के अनुसार वर्षों पहले गांव में कुछ अप्रिय घटनाएं हुई थीं, तब पूर्वजों ने मान्यता के आधार पर होली मनाने की शुरुआत की. मान्यता है कि यदि समय से पहले होली नहीं मनाई गई तो गांव में किसी न किसी प्रकार की अनहोनी हो सकती है.
गांव में वर्षों पहले कुछ अप्रिय घटनाएं हुई थीं. तब से हमारे पूर्वजों ने एक सप्ताह पहले होली मनाने की परंपरा शुरू की। आज भी पूरा गांव एकजुट होकर इसे निभा रहा है-लाल मन सिंह, सरपंच
बुजुर्ग बताते हैं कि उन्होंने अपने पूर्वजों को इस परंपरा का निर्वहन करते देखा है और अब नई पीढ़ी भी उसी श्रद्धा और विश्वास के साथ इसे आगे बढ़ा रही है. गांव में होली से पहले बैठक आयोजित कर सामूहिक रूप से तैयारियां की जाती हैं. इसके बाद पूरे गांव की सहभागिता से त्योहार मनाया जाता है.

12 किलोमीटर दूर से जुटती है भीड़
जिला मुख्यालय बैकुंठपुर से लगभग 12 किलोमीटर दूर स्थित अमरपुर में होली का यह आयोजन क्षेत्र में विशेष पहचान रखता है. पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ ग्रामीण जुलूस निकालते हैं, देवल्ला में पूजा-अर्चना कर एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर शुभकामनाएं देते हैं. इस वर्ष जहां भारतीय कैलेंडर के अनुसार 3 मार्च को होली मनाई जाएगी, वहीं अमरपुर में एक सप्ताह पूर्व ही रंगों की बौछार शुरू हो चुकी है.

अनहोनी टालने की आस्था
ग्रामीणों का मानना है कि पहले होली मनाने से गांव में किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं होती. यही कारण है कि दशकों से चली आ रही इस परंपरा को आज भी पूरी निष्ठा से निभाया जा रहा है.

पूर्वजों द्वारा बनाई गई इस परंपरा का पालन गांववासी आज भी कर रहे हैं. गांव की सुख-समृद्धि और शांति के लिए यह परंपरा जारी रहेगी-लाल मन सिंह, सरपंच
हम बचपन से देख रहे हैं कि हमारे गांव में होली एक हफ्ते पहले मनाई जाती है। बुजुर्गों का कहना है कि इससे गांव में कोई अनहोनी नहीं होती। हम सब मिलकर इस परंपरा को निभाते हैं-राधिका, ग्रामीण
प्रसिद्ध है अमरपुर की होली
कोरिया जिले में अमरपुर की होली विशेष रूप से चर्चित है. आसपास के गांवों के लोग यहां की परंपरा को देखने आते हैं। फाग गीतों पर युवा और बुजुर्ग एक साथ थिरकते नजर आते हैं. गांव की यह सामूहिकता सामाजिक एकता और परंपराओं के प्रति आस्था का प्रतीक बन गई है.

