लखनऊ की होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि गंगा-जमुनी तहजीब की जीवंत मिसाल है
नवाब खानदान के लोग आज भी पूरे उत्साह के साथ होली मनाते हैं.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : March 3, 2026 at 9:06 PM IST
लखनऊ: रंगों और मिठाइयों का त्योहार होली उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सबसे अलग अंदाज में मनाया जाता है. होली के दिन शहर ए लखनऊ के गलियों और चौराहों पर ढोल-नगाड़ों की थाप पर आज भी लोग झूमते-गाते नजर आते हैं. पुराने लखनऊ के चौक स्थित गोल दरवाजा, अमीनाबाद, निशातगंज, राजाजीपुरम और डालीगंज समेत कई इलाकों में पारंपरिक होली की बारात निकाली जाती है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं.
इस साल होली के मौके पर पहले से ही बाजार पूरी तरह सज धज कर तैयार है. अमीनाबाद, याहयागंज, नखास, निशातगंज और निराला नगर के बाजारों में पिचकारी, अबीर-गुलाल के अलावा तरह-तरह की सामग्री दुकानों की खुबसूरती में चार चांद लगा रहीं हैं. इस बार सिलेंडर और अग्निशमन उपकरण की तर्ज पर बनी पिचकारियां बच्चों और युवाओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जिनकी कीमत 300 से 800 रुपये है. इसके अलावा प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री थीम वाली पिचकारियां भी बाजार में उपलब्ध हैं, जिनको लेकर खरीदारों में उत्सुकता देखी जा रही है. ऑपरेशन सिंदूर और तिरंगा डिजाइन वाली पिचकारियां भी लोगों को आकर्षित कर रही हैं.
हालांकि व्यापारियों का कहना है कि इस बार बिक्री पिछले साल की तुलना में कुछ धीमी है. व्यापारी संतोष के मुताबिक, इस बार होली और रमजान एक साथ पड़ने से मुस्लिम समाज के लोग रंगों से दूर रह रहे हैं, जिससे पिचकारियों की बिक्री पर असर पड़ा है.
लखनऊ की होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि गंगा-जमुनी तहजीब की जीवंत मिसाल भी है. यहां एक दिन पहले फूलों की होली खेलने की परंपरा है. नवाब मसूद अब्दुल्ला बताते हैं कि एक बार नवाब के दौर में होली और मोहर्रम एक साथ पड़ा था, कहा जाता है कि मोहर्रम की मजलिस से निकलकर उन्होंने वस्त्र बदले और होली के उत्सव में शामिल हो गए. आज भी यह प्रसंग लखनऊ की सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल के तौर पर सुनाया जाता है. नवाबी खानदान के लोग आज भी पूरे उत्साह के साथ होली मनाते हैं.
नवाब दो पल्ले वाली टोपी पहनते थे और कहा करते थे कि एक पल्ला हिंदू भाइयों का और दूसरा मुस्लिम भाइयों का है. वह दोनों धर्मों का समान सम्मान करते थे. लखनऊ से सटे में हाजी वारिस अली शाह की दरगाह पर आज भी फूलों की होली खेलने की परंपरा है. इसी तरह दिल्ली स्थित हजरत निजामुद्दीन में भी होली पूरे उत्साह के साथ खेली जाती है.
पुराने लखनऊ के चौक इलाके में शाही अंदाज में होली मनाई जाती है. यहां घोड़े, ऊंट और हाथियों के साथ जुलूस निकलता है और लोग पारंपरिक वेशभूषा में रंगों का उत्सव मनाते हैं. इसमें धर्म और जाति से ऊपर उठकर सभी समुदायों के लोग शामिल होते हैं. चौपटिया क्षेत्र में पूर्व डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा भी होली उत्सव में शामिल होकर लोगों के साथ रंग खेलते हैं. वहीं चौक क्षेत्र में डिप्टी सीएम बृजेश पाठक के भी होली कार्यक्रम में शामिल होने की तैयारी है. नवाबी शहर की यही खासियत है कि यहां होली सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे, सांस्कृतिक समरसता और परंपराओं का उत्सव बनकर सामने आती है
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