गोविंददेवजी मंदिर में रचना झांकी के साथ होली महोत्सव का भव्य आगाज़, फाग के रंगों में रंगे 'ठाकुरजी'
गोविंददेवजी मंदिर का यह फागोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और परंपरा का उत्सव है.

Published : February 12, 2026 at 1:29 PM IST
जयपुरः छोटी काशी गुलाबी शहर के आराध्य देव गोविंददेवजी मंदिर में रचना झांकी के साथ होली महोत्सव का भव्य शुभारंभ हो गया है. मंदिर परिसर में फागोत्सव की शुरुआत के साथ ही भक्तों में उल्लास और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है. होली तक प्रतिदिन ठाकुरजी की मनोहारी लीलाओं के दर्शन रंग-बिरंगी गुलाल से सजी विशेष झांकियों के माध्यम से कराए जाएंगे, जिससे मंदिर का वातावरण पूरी तरह उत्सवमय हो गया है.
रचना झांकी मंदिर की पारंपरिक और अत्यंत आकर्षक प्रस्तुति मानी जाती है. इसमें 'ठाकुरजी' को विशेष रंग-बिरंगी गुलाल से सजी पोशाक पहनाई जाती है और सूती कपड़े पर प्राकृतिक रंगों से अलग-अलग मंडाणे बनाए जाते हैं. झांकी में श्रीकृष्ण और राधारानी के संग होली खेलने का प्रतीकात्मक दृश्य दर्शाया जाता है, जो भक्तों को ब्रज की फाग परंपरा का सजीव अनुभव कराता है.

रोज़ाना विशेष झांकियों में दर्शनः मंदिर प्रशासन के अनुसार 12 फरवरी से 1 मार्च तक रचना झांकी के विशेष दर्शन कराए जा रहे हैं. श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए राजभोग झांकी का समय 15 मिनट बढ़ाया गया है. अब राजभोग झांकी सुबह 10:45 से 11:45 बजे तक रहती है और इसके बाद रचना झांकी के दर्शन होते हैं. इस व्यवस्था से दूर-दराज से आने वाले भक्तों को ठाकुरजी की विशेष झांकी देखने का पर्याप्त समय मिल रहा है. उत्सव के पहले दिन विशेष रचना झांकी में 25 प्रकार की प्राकृतिक गुलाल का उपयोग कर ठाकुरजी की विविध लीलाओं का दर्शन कराया गया. प्राकृतिक रंगों की सुगंध और साज-सज्जा ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया. श्रद्धालु बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचकर दर्शन कर रहे हैं और भक्ति भाव से फागोत्सव का आनंद ले रहे हैं.

राजभोग के साथ रचना झांकीः मंदिर में महंत अंजन कुमार गोस्वामी के सानिध्य में प्रतिदिन सुबह के समय विशेष रचना झांकी सजाई जा रही है. राजभोग के साथ इस झांकी का समय तय किया गया है. व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए मंदिर प्रशासन ने दर्शन पंक्तियों और समय प्रबंधन की विशेष व्यवस्था की है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो. गोविंददेवजी मंदिर का यह फागोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और परंपरा का उत्सव है. रंग-गुलाल से सजे ठाकुरजी के दर्शन भक्तों के लिए आध्यात्मिक आनंद का अनुभव बन रहे हैं. होली पर्व तक चलने वाला यह उत्सव जयपुर सहित आसपास के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.

