उत्तराखंड में होली की धूम, पहाड़ों में दिखने लगे सांस्कृतिक रंग, झूम रहे होल्यार
होली मिलन कार्यक्रम में महिलाएं बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रही हैं. खड़ी और बैठकी होली की सांस्कृतिक विरासत देखने को मिल रही है.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : February 27, 2026 at 1:26 PM IST
चमोली/खटीमा/रामनगर: देशभर में होली का खुमार चढ़ने लगा है. इसी कड़ी में उत्तराखंड के अलग अलग जिलों से होली मिलन कार्यक्रम की अलग अलग तस्वीरें आ रही हैं. पहाड़ी इलाकों में खड़ी होली, बैठकी होली की धूम है. होली मिलन कार्यक्रम में पुरुष, महिलाएं जमकर झूम रहे हैं. होल्यार होली के रंगों से सराबोर हैं.
काली कुमाऊं की होली: काली कुमाऊं की होली का अपना समृद्ध इतिहास है. पूरे प्रदेश में कुमाऊं के चंपावत में खेली जाने वाली होली अपनी अलग पहचान रखती है. लोहाघाट में होली महोत्सव का आयोजन खड़ी होली के उस खूबसूरत रूप एवम परंपरा को प्रस्तुत करता है जो कुमाऊं की काली कुमाऊं की होली परंपरा की सांस्कृतिक विरासत का सजीव उदाहरण है. होली महोत्सव के माध्यम से लोहाघाट के बुजुर्ग,महिलाए युवा एवं बच्चे अपनी सांस्कृतिक होली आयोजन की विरासत को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बड़ाने का काम कर रहे हैं. लोहाघाट रामलीला मैदान में हर वर्ष आयोजित होने वाला होली महोत्सव पूरे जिले में आयोजित होने वाले होली आयोजन में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है. इस वर्ष भी इसका शुभारंभ भव्यता और उत्साह के साथ हुआ. रामलीला मंच परिसर में आयोजित दो दिवसीय महोत्सव में नगर व ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिला होलियारों का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया.
थराली में होली मिलन कार्यक्रम: थराली के बनरढौन में स्थित वन विभाग के गेस्ट हाऊस में होली मिलन का कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस मौके पर बधाणी सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष प्रेम देवराड़ी, होली गायक सेवानिवृत्त फार्मासिस्ट मोहन राम आर्या, रमेश देवराड़ी ने स्थानीय भाषा में मतमारो मोहन पिचकारी...,चली बसंत ब्यार,आई फूलों में मयार...,मत जाओ पिया, होली आई रही..., कैसे रंग चढ़ा फागुन में...,आयो फागुन महिनों होली...,आदि होली के गीतों पर झूम उठे. इस मौके थराली के उपजिलाधिकारी पंकज भट्ट ने सभी को होली की बधाई देते हुए इस त्योहार को शांतिपूर्ण तरीके से मनाने की अपील की.
खटीमा में रंगों की धूम: उधम सिंह नगर जिले के तराई क्षेत्र खटीमा में भी होली पर्व की धूम है. कुमाऊंनी होली के साथ विभिन्न स्थानों में थारू जनजाति की होली के आयोजन हो रहे हैं. खटीमा में विधायक भुवन कापड़ी की धर्मपत्नी कविता कापड़ी ने मातृ शक्ति होली मिलन समारोह का आयोजन किया. इस आयोजन में कुमाऊंनी होल्यारों के साथ साथ थारू जनजाति के होलियारों ने बेहतरीन प्रस्तुति से समां बांध दिया. प्रेम सद्भाव भाईचारे के इस त्योहार में विभिन्न रंग देखने को मिले.
रामनगर में खड़ी होली की धूम: रामनगर में भी इन दिनों होली का उल्लास चरम पर है. गलियों से लेकर सामुदायिक सभागारों तक, हर ओर रंग, संगीत और पारंपरिक स्वरों की गूंज सुनाई दे रही है. खास बात यह है कि इस बार महिलाओं की भागीदारी ने होली के उत्सव को और भी जीवंत बना दिया है. महिलाएं घरों की जिम्मेदारियां निभाने के बाद टोली बनाकर होली गायन कार्यक्रमों में पहुंच रही हैं. खड़ी होली व बैठकी होली के जरिए परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं. रामनगर में महिला होल्यारों ने पारंपरिक परिधानों में सजे-धजे मंच संभाला तो पूरा वातावरण भक्तिमय और उत्साहपूर्ण हो उठा. रामनगर में खड़ी होली और बैठकी होली की परंपरा विशेष रूप से लोकप्रिय है. खड़ी होली में महिलाएं गोल घेरा बनाकर खड़े होकर सामूहिक गायन करती हैं, जबकि बैठकी होली में शास्त्रीय रागों पर आधारित गीत बैठकर गाए जाते हैं.
तबला हारमोनियम और मृदंग की संगत में जब सुर छेड़े जाते हैं, तो पूरा माहौल आध्यात्मिक रंग में रंग जाता है. यह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि संगीत, भक्ति और लोकसंस्कृति का संगम है. कुमाऊं मंडल के अन्य जिलों—अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चंपावत—में भी होली का यही रंग देखने को मिल रहा है. यहां की होली उत्तर भारत की सामान्य रंगोत्सव परंपरा से अलग मानी जाती है. इसमें संगीत और शास्त्रीय रागों का विशेष महत्व है.
इतिहासकारों के अनुसार कुमाऊं की होली की परंपरा सैकड़ों वर्ष पुरानी है. इसकी जड़ें चंद्रवंशी राजाओं के शासनकाल से जुड़ी मानी जाती हैं. बाद में मुगलकालीन दरबारी संगीत और भक्ति आंदोलन का भी इस पर प्रभाव पड़ा. विशेष रूप से कृष्ण भक्ति की छाप कुमाऊंनी होली के गीतों में स्पष्ट दिखाई देती है. यही कारण है कि यहां की होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अनुभूति का अवसर भी बन जाती है.
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