महाकाल की नगरी में होली की धूम, महादेव के सामने लखबीर सिंह लक्खा ने की सुर साधना
बाबा महाकाल को लगाया हर्बल गुलाल, महाकालेश्वर में देर रात होलिका दहन से महापर्व की शुरुआत, 4 मार्च को देशभर में खेली जाएगी होली

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : March 3, 2026 at 1:19 PM IST
|Updated : March 3, 2026 at 1:37 PM IST
उज्जैन : धर्म नगरी अवंतिका उज्जयिनी में प्रत्येक पर्व को सबसे पहले मनाए जाने की सदियों पुरानी परंपरा है. इसी कड़ी में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में होली पर्व धूमधाम से मनाया गया. भस्म आरती के बाद मंदिर परिसर में जमकर होली खेली गए, वहीं देर रात होलिका दहन किया गया इस दौरान प्रसिद्ध भजन गायक लखबीर सिंह लक्खा ने भक्ति गीतों से जमकर समा बांधा. खास बात यह कि कालों के काल महाकाल के मंदिर में अल्पकालीन गृहण का असर नहीं मान्य होगा और भक्त 3 मार्च को भी मंदिर में दर्शन कर रहे हैं.
5100 कंडों से बनी होलिका का दहन
सोमवार शाम संध्या आरती में भगवान श्री महाकाल को हर्बल गुलाल अर्पित कर आंगन में होलिका का दहन हुआ. मंगलवार सुबह श्री महकालेश्वर: की विशेष भस्म आरती सम्पन्न हुई. भगवान को फिर हर्बल गुलाल लगाया गया और पर्व की शुरुआत की गई. सोमवार-मंगलवार की देर रात तक प्रसिद्ध गायक कलाकार लखबीर लक्खा ने महाकाल इंटरनेशनल चौराहे पर देश दुनिया से आने वाले दर्शनार्थियों के बीच भजन प्रस्तुति दी. इस दौरान 5100 कंडो से बनी होलिका का ब्रह्म मुहूर्त में दहन किया गया.

मंदिर के आशीष पुजारी ने बताया, '' श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार संध्या आरती के पहले नैवेद्य कक्ष में श्री चन्द्रमोलेश्वर भगवान, कोटितीर्थ कुंड पर श्री कोटेश्वर-श्री रामेश्वर व सभा मण्डप में श्री वीरभद्र को गुलाल अर्पण किया गया. इसके बाद संध्या आरती में भगवान श्री महाकालेश्वर जी को परम्परानुसार शक्कर की माला धारण करवाई गई, जिसके बाद भगवान को हर्बल गुलाल अर्पित किया गया. मंदिर परिसर में ओंकारेश्वर मंदिर के सामने शासकीय पुजारी घनश्याम शर्मा द्वारा कंडों व लकड़ी से निर्मित होलिका का विधिवत पूजन-आरती कर होलिका दहन किया गया.

गृहण के दौरान भगवान को स्पर्श नहीं करेंगे पुजारी
मंदिर के पुजारी राघव शर्मा ने बताया, '' मंगलवार को भगवान का पंचाभिषेक किया गया, भगवान को अन्न की जगह शक्कर व फलाहार भोग लगाया गया. इसके साथ ही भगवान का आकर्षक श्रृंगार हुआ जिसमें भगवान को रजत मकुट, शेषनाग, मुंडमाला, रुद्राक्ष एवं फूलों से बनी माला भेंट की गई. इसके बाद नंदी का जलाभिषेक हुआ और गुलाल अर्पीत किया गया. दर्शन के लिए गृहण के दौरान सिर्फ भगवान का स्पर्श नहीं होगा और पुजारी गर्भ गृह में मंत्रोच्चार करते रहेंगे. साथ ही गृहण के बाद मंदिर का शुद्धिकरण भी किया जाएगा.''

चकमक पत्थर से जली सिंह पूरी की होलिका
पंडित अमर डब्बेवाला ने बताया, '' ये होलिका इसलिए विशेष है क्योंकि यहां प्रह्लाद रूपी ध्वज लगाया जाता है, जो कभी नहीं जलता और जिस दिशा में जाता है उस अनुसार परिणाम देता है, साल भर. इस बार उत्तर दिशा में ध्वज का गिरना सुख समृद्धि का संदेश दे रहा है. खास बात यह है कि होलिका दहन में माचिस का उपयोग भी नहीं किया गया, चकमक पत्थर की चिंगारी से होलिका जलाई गई. साथ ही सम्राट विक्रमादित्य और राजा भर्तहरि के समय से चली आ रही परंपरा को बखूबी तिथि अनुसार ही निभाया गया.''

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देरा रात प्रसिद्ध भजन गायक कलाकार लखबीर लक्खा ने महाकाल इंटरनेशनल चौराहे पर भक्ति मय समा बांधे रखा. आयोजक श्री महाकाल मंदिर के डमरू वादक ऋषभ बाबू यादव ने बताया, ''श्री लक्खा ने "मैं हूं महाकाल का चेला मेरा रंग ढंग अलबेला'', ''हिमालय से ऊंची...'' व फाग गीत गाकर माहौल भक्ति मय कर दिया.''

