7 दिन पहले क्यों मनाई जाती है यहां होली, जानिए कोरिया के बसवाही गांव की अनोखी परंपरा
गांव पर किसी तरह की दैवीय आपदा नहीं आए, किसी तरह का अपशकुन नहीं हो इसके लिए सालों से परंपरा निभाई जा रही है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 24, 2026 at 3:55 PM IST
मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर: फागुन का त्योहार आने वाला है. कोरिया जिले में इस बार 3 मार्च को होली मनाई जाएगी. लेकिन कोरिया के सोनहत विकासखंड के बसवाही गांव में आज ही होली मनाई गई. जिस तरह से होली के दिन लोग रंग गुलाल लगाते हैं, ठीक उसी तरह से यहां आज रंग गुलाल लगाकर और फाग गीत गाकर होली मनाई गई.
1 हफ्ते पहले मनाई जाती है होली
गांव में दशकों से चली आ रही निर्धारित परंपरा के अनुसार सबसे पहले विधि-विधान से सम्मत (होलिका दहन) किया गया. इसके अगले दिन ग्रामीणों ने रंग-गुलाल के साथ जमकर होली खेली. इस दौरान गांव की गलियां रंगों से सराबोर नजर आई. बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी ने बढ़-चढ़कर होली खेली और पारंपरिक फाग गीतों पर जमकर झूमे.
हमारे गांव में यह परंपरा पुरखों के समय से चली आ रही है. हम लोग हर साल एक सप्ताह पहले ही सम्मत जलाकर होली मनाते हैं. गांव के देवता की मान्यता है, इसलिए पूरे गांव के लोग मिलकर इस परंपरा को निभाते हैं. हम मानते हैं कि अगर परंपरा के अनुसार होली नहीं मनाई गई तो गांव में अनहोनी हो सकती है. इसलिए सभी ग्रामीण एकजुट होकर पूरे उत्साह के साथ होली मनाते हैं: राम सिंह, ग्रामीण, बसवाही गांव

पूर्वजों के समय से चली आ रही परंपरा
ग्रामीणों के अनुसार बसवाही गांव में एक हफ्ते पहले होली खेलने यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है. गांव के लोग कैलेंडर में निर्धारित तिथि से ठीक एक सप्ताह पहले सम्मत जलाकर होली मनाते हैं. उनका मानना है कि यह परंपरा उन्हें अपने पूर्वजों से विरासत में मिली है, जिसे निभाना उनका कर्तव्य है.


फाग गीतों पर झूमे गांववाले
होली के अवसर पर गांव में पारंपरिक फाग गीतों की गूंज सुनाई दी. मांदर की थाप पर युवक-युवतियां और बुजुर्ग थिरकते नजर आए. रंग-गुलाल के बीच आपसी भाईचारे और सौहार्द का माहौल पूरे गांव में देखने को मिला. महिलाओं ने भी उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई और पारंपरिक गीतों से माहौल को उत्सव जैसा बना दिया. बसवाही गांव की यह अनोखी परंपरा न केवल सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम कर रही है. बसवाही गांव की यह परंपरा आधुनिकता के दौर में भी इस तरह की परंपराएं ग्रामीण संस्कृति की जीवंतता का परिचय देती हैं.

