फागुन का चढ़ गया खुमार, महिलाओं ने खेली होली, फिल्मी गीतों पर जमकर थिरकीं
रोहतास में महिलाओं ने जमकर होली खेली. महादेव के आंगन में गूंजते गीतों ने पूरे इलाके को रंग और श्रद्धा से सरोबार कर दिया. पढ़ें..

Published : March 2, 2026 at 3:49 PM IST
सासाराम: फागुन का महीना हवाओं में खुली महक, अबीर और गुलाल की उड़ती फुहारे. होली की खुमार अब चरम पर है. हर गली, हर चौक और हर मोहल्ले में रंग उत्सव का रंग चढ़ चुका है. इसी उत्साह के बीच बिहार के रोहतास जिले में एक अनोखी और मनमोहक तस्वीर देखने को मिली. जहां महिलाएं पारंपरिक गीतों के संग महादेव के साथ होली खेलती नजर आई.
मंदिर प्रांगण में होली: दरअसल डेहरी स्थित एनी कट महादेव मंदिर के प्रांगण में महिलाओं के हुजूम ने भव्य होली मिलन समारोह का आयोजन किया. मंदिर परिसर रंगों और भक्ति के शुरू से सरोबार हो उठा. सुबह से ही महिलाएं साड़ी और पारंपरिक परिधानों में सजी धजी मंदिर पहुंचने लगीं. हाथों में अबीर-गुलाल, थालियां में फूल और चेहरे पर उत्साह की चमक साफ झलक रही थी.
पहले महादेव का आशीर्वाद लिया: सबसे पहले महिलाओं ने विधिवत पूजा-अर्चना कर महादेव का आशीर्वाद लिया. इसके बाद झारखंडी महादेव को अबीर गुलाल अर्पित कर होली मिलन की शुरुआत की गई. फाग और कजरी के पारंपरिक गीतों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय और रंगमय बना दिया.

फिर होली गीतों पर थिरकीं महिलाएं: 'फागुन आयो रे, होली खेले रघुवीरा', जैसे गीतों पर महिलाएं झूम उठीं. यह दृश्य केवल रंगों का नहीं बल्कि परंपरा, आस्था और सामूहिक उल्लास का प्रतीक बन गया. मंदिर परिसर में उपस्थित महिलाओं एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं.

हर साल होली मिलन समारोह: हंसी ठिठोली गीत संगीत और भक्ति का ऐसा संगम देखने को मिला मानो खुद महादेव भी इस रंगोत्सव में शामिल होकर भक्तों पर कृपा बरसा रहे हो. स्थानीय महिला सुनीता यादव ने बताया कि हर वर्ष फागुन के महीने में यहां होली मिलन समारोह आयोजित किया जाता है. इस आयोजन में युवा से लेकर बुजुर्ग महिलाएं तक बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं, जिससे नई पीढ़ी भी अपनी संस्कृति से जुड़ी रहती है.

"वैसे तो हर बार हमलोग होली मनाते हैं लेकिन इस बार पहली बार अनोखी होली महिलाओं के साथ खेली गई. इसका उद्देश्य केवल पर्व मनाना नहीं बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को सहेज कर रखना भी है."- सुनीता यादव, स्थानीय
प्रेम सौहार्द और भाईचारे का पर्व: वहीं, सरोज अग्रवाल ने कहा कि रंगों के इस पावन उत्सव में संदेश भी दिया की होली केवल रंगों का त्यौहार नहीं बल्कि आपसी प्रेम सौहार्द और भाईचारे का पर्व है. जब भक्ति और परंपरा के रंग एक साथ घुलते हैं तो उत्सव और भी खास बन जाता है.
"वृंदावन की तरह होली होनी चाहिए. होली हमारे परंपरा को जीवित रखती है. भगवान शिव पार्वती, राधा-कृष्ण जिस तरह से होली खेला करते थे, उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को बचाना है शिव मंदिर में होली खेलकर होली की शुरुआत की है."- सरोज अग्रवाल, स्थानीय

फूहड़ता नहीं सादगी से मनाएं होली: गंगा ने बताया कि पहली बार झारखंडी महादेव मंदिर में महिला मंडली ने महादेव के संग होली खेली है. साफ तौर पर यह संदेश है कि होली का पर्व फूहड़ता से नहीं सादगी के साथ मनाई जाए. इस पर्व पर अश्लील गाने और हो-हुल्लड़ की कही भी जगह नहीं है. लोग एक दूसरे को रंग और अबीर-गुलाल लगाए और आपसी भेदभाव को दूर करें, यही इस पर्व का मकसद है.
"होली रंगों का त्यौहार है. यह पर्व आपस में एकता और भाईचारे का संदेश देता है. जिस तरीके से होली पर्व पर अश्लील गीत बजाए जाते हैं और पुरुष शराब पीकर हो हंगामा करते हैं, यह सब नहीं होना चाहिए. आज के युवाओं को भी पारंपरिक तरीके से होली माननी चाहिए."- खुशबू कुमारी, स्थानीय
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