होली 2026: बाजारों में छाए स्पेशल हैंपर, मॉडर्न गिफ्ट बॉक्स से लेकर पारंपरिक पूजन किट तक शामिल
जयपुर में होली की तैयारी जोरों पर हैं. आम लोगों के साथ ही व्यापारी और नए स्टार्टअप्स भी होली को मॉर्डन बनाने में जुटे हैं.

Published : February 28, 2026 at 6:34 AM IST
जयपुर: गुलाल की खुशबू, ठंडाई की मिठास, परम्परा और रिश्तों का महापर्व होली इस बार जयपुर में सिर्फ खेली नहीं जाएगी, बल्कि खास अंदाज में गिफ्ट की जाएगी. दीपावली की तरह अब होली पर भी अपनों को हैंपर देने का चलन तेजी से बढ़ रहा है. शहर के बाजारों में मॉडर्न फेस्टिव हैंपर से लेकर पारंपरिक पूजन किट तक की भरमार है. युवा स्टार्टअप्स से लेकर परंपरा से जुड़े कारीगरों तक, हर कोई इस होली को यादगार बनाने में जुटा है.
रंगों के साथ ट्रेंड का तड़का: शहर के युवा उद्यमी रोहित शर्मा ने इस बार होली को नए अंदाज में सेलिब्रेट करने के लिए आकर्षक गिफ्ट हैंपर तैयार किए हैं. रोहित बताते हैं कि जिस तरह दीपावली पर लोग कॉरपोरेट गिफ्ट और फैमिली हैंपर देते हैं, उसी तर्ज पर होली को भी खास बनाने का प्रयास किया गया है. ये हैंपर 200 से 1500 रुपए की रेंज में लोकल मार्केट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं. कॉरपोरेट सेक्टर में इनकी विशेष मांग देखी जा रही है. कई कंपनियां अपने कर्मचारियों और क्लाइंट्स को ये हैंपर गिफ्ट कर रही हैं. वहीं, परिवार और दोस्त भी अपनों के लिए इन्हें खरीद रहे हैं.
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गोबर आधारित पूजन हैंपर: होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और परंपरा का पर्व भी है. इसी भावना को जीवित रखने के लिए पूजन सामग्री से जुड़े भीमराज शर्मा ने पारंपरिक होली पूजन हैंपर तैयार किए हैं. इस बॉक्स के साथ व्यक्ति को केवल पानी से भरा एक लोटा लेना है और वो सीधे होली पूजन के लिए जा सकता है. हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में जहां आज भी लोग खुद गोबर के बड़कुले बनाकर होली पूजन करते हैं, वहीं शहरों में ये परंपरा धीरे-धीरे खत्म हो रही थी. ऐसे में ये विशेष हैंपर नई पीढ़ी को परंपरा से जोड़ने का माध्यम बन रहे हैं. ये पारंपरिक पूजन हैंपर 850 से 1150 रुपए तक उपलब्ध हैं. खास बात ये है कि ये हैंपर ऑनलाइन भी मिल रहे हैं.

गोबर से बनी ऑर्गेनिक गुलाल: भीमराज शर्मा बताते हैं कि गोबर से तैयार किया जाने वाला ये ऑर्गेनिक गुलाल किसी भी प्रकार से सामान्य रंगों जैसा नहीं होता, बल्कि ये पूरी तरह पारंपरिक और सुरक्षित विधि से तैयार किया जाता है. सबसे पहले देशी गाय के ताजे गोबर का चयन किया जाता है. इसे सीधे उपयोग में नहीं लिया जाता, बल्कि स्वच्छ स्थान पर फैलाकर धूप में कई दिनों तक सुखाया जाता है, ताकि इसमें मौजूद नमी पूरी तरह समाप्त हो जाए. गोबर जब पूरी तरह सूख जाता है तो उसे मशीन या हाथ से बारीक पीसा जाता है. इसके बाद उसे महीन कपड़े से छाना जाता है, जिससे कोई भी मोटा कण या अशुद्धि अलग हो जाए और पाउडर एकदम मुलायम बन जाए. सबसे अहम बात इसमें कोई दुर्गंध न रहे इसके लिए इस पाउडर में अरारोट मिलाया जाता है, जो इसे और अधिक स्मूद टेक्सचर देता है. रंग देने के लिए केवल फूड-ग्रेड प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि त्वचा पर किसी प्रकार की एलर्जी या जलन की संभावना न रहे.

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जेल के कैदी बना रहे बड़कुले: भीमराज ने बताया कि पहले जहां होली के कंडे गोबर से बनाए जाते थे, वहीं समय के साथ ये परंपरा कम होती गई. धीरे-धीरे लोग लकड़ी से तैयार होली का दहन करने लगे, लेकिन अब फिर से गोकाष्ठ और गोबर आधारित सामग्री की ओर रुझान बढ़ रहा है. गोबर से बने बड़कुले मध्य प्रदेश के नीमच जेल के कैदियों की ओर से तैयार किए जा रहे हैं, जिससे न सिर्फ परंपरा जीवित है बल्कि सामाजिक पुनर्वास को भी बल मिल रहा है.

बहरहाल, हवा में उड़ती गुलाल और चंग-ढाप की थाप के बीच जयपुर इस बार होली को और भी खास बनाने जा रहा है. रंगों के साथ रिश्तों को भी सहेजने का ये नया चलन शहर की संस्कृति को नया आयाम दे रहा है. चंद दामों में खुशियों से भरे ये हैंपर इस बात का प्रमाण हैं कि बदलते दौर में भी परंपरा और आधुनिकता साथ-साथ चल सकते हैं। इस होली, जयपुर सिर्फ रंगों से नहीं बल्कि रिश्तों और परंपराओं से भी सराबोर नजर आएगा.

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