केमिकल रंगों से होली खेलना पड़ सकता है भारी, वाटर बैलून से करें तौबा : डॉ. लिनेश्वर हर्षवर्धन
डॉ. लिनेश्वर हर्षवर्धन से जानिए होली कैसे सुरक्षित रहकर भी उत्साह के साथ मना सकते हैं...

Published : February 25, 2026 at 5:01 PM IST
जयपुर : रंगों का त्योहार होली खुशियों और उत्साह का पर्व है, लेकिन बाजार में बिक रहे केमिकल युक्त रंग, खुशियों के रंग में भंग डाल सकते हैं. वरिष्ठ डॉ. लिनेश्वर हर्षवर्धन ने चेतावनी दी है कि केमिकल युक्त रंग-गुलाल सेहत पर भारी पड़ सकते हैं, इसीलिए होली पर ऑर्गेनिक और हर्बल रंगों का ही इस्तेमाल करें, ताकि त्योहार की खुशियां किसी बीमारी में न बदले.
होली रंग, उमंग और आपसी भाईचारे का पर्व है, जो समाज में प्रेम और सौहार्द का संदेश देता है. इस दिन लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाकर पुराने गिले-शिकवे भुलाते हैं और नई शुरुआत करते हैं. हालांकि, उत्साह के इस माहौल में स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है, क्योंकि केमिकल युक्त रंगों और गंदे पानी के इस्तेमाल से त्वचा रोग, एलर्जी, आंखों का संक्रमण (कंजक्टिवाइटिस), सांस संबंधी दिक्कतें और अस्थमा जैसी बीमारियां बढ़ सकती हैं, इसलिए होली खुशी से मनाएं, लेकिन सुरक्षित और प्राकृतिक रंगों का चयन कर अपनी सेहत की रक्षा भी जरूरी है.
स्किन और बालों के लिए बेहद खतरनाक : पंडित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल के सुपरिटेंडेंट डॉक्टर लिनेश्वर हर्षवर्धन ने बताया कि बाजार में मिलने वाले कई रंग-गुलाल में हानिकारक रसायन मिलाए जाते हैं. इनमें लेड ऑक्साइड, क्रोमियम और कॉपर सल्फेट जैसे तत्व शामिल होते हैं. ये त्वचा पर एलर्जी, लाल चकत्ते, खुजली, जलन और सूजन जैसी समस्याओं का कारण बनते हैं. संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में डर्मेटाइटिस और एक्जिमा की शिकायत बढ़ सकती है. केमिकल युक्त रंग बालों की प्राकृतिक नमी छीन लेते हैं, जिससे बाल रूखे, बेजान और टूटने लगते हैं. स्कैल्प में खुजली और संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है.

आंख और सांस के मरीज रहें सतर्क : उन्होंने बताया कि सूखे रंगों की महीन परत सांस के साथ अंदर चली जाती है, जिससे अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है. वहीं, रंग आंखों में जाने से जलन, लालिमा और कंजक्टिवाइटिस (आई फ्लू) का खतरा रहता है. कई मामलों में कॉर्निया को भी नुकसान पहुंच सकता है. उन्होंने बताया कि बच्चों की त्वचा, आंख, कान बेहद संवेदनशील होती है, इसलिए उन्हें खासतौर पर हर्बल और प्राकृतिक रंगों से ही होली खेलनी चाहिए. बुजुर्ग और पहले से त्वचा या सांस संबंधी रोग से ग्रस्त लोग भी सावधानी बरतें.

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वाटर बैलून सबसे खतरनाक : डॉ. लिनेश्वर हर्षवर्धन ने चेतावनी दी कि होली के दौरान वाटर बैलून (पानी से भरे गुब्बारे) फेंकना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. तेज रफ्तार से फेंका गया गुब्बारा आंख, कान या चेहरे पर लगने से गंभीर चोट, कॉर्निया डैमेज, कान के पर्दे पर असर और नाक से खून आने जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है. कई मामलों में सिर पर लगने से चक्कर, सूजन और अंदरूनी चोट तक हो जाती है. छोटे बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए ये विशेष रूप से खतरनाक है, क्योंकि अचानक गुब्बारा लगने से वे संतुलन खो सकते हैं और दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं. उन्होंने अपील की है कि होली उत्साह से मनाएं, लेकिन किसी की सुरक्षा से खिलवाड़ न करें.

