भरतपुर के बांके बिहारी मंदिर में उड़े गुलाल, शुरू हुआ 5 दिन का उत्सव
भारतपुर में फागोत्सव पांच दिनों तक अलग-अलग रंगों और परंपराओं के साथ मनाया जाएगा.

Published : February 27, 2026 at 2:46 PM IST
भरतपुर : जब ठाकुर जी ने थामी पिचकारी, तो पूरा दरबार आस्था के रंग में भीग उठा. शहर के प्राचीन श्री बांके बिहारी मंदिर में जैसे ही बांके बिहारी और राधा रानी के हाथों में सजी पिचकारी और गुलाल की पोटली के दर्शन हुए, भक्तों की भीड़ होली है के जयकारों से गूंज उठी. अबीर-गुलाल की उड़ती रंगत, इत्र और टेसू की खुशबू और भजनों की मधुर ध्वनि के बीच बिहारी जी का दरबार रंगों में नहा गया. पांच दिवसीय होली महोत्सव की शुरुआत के साथ ही मंदिर परिसर भक्ति, उल्लास और ब्रज परंपरा के अद्भुत संगम का साक्षी बन गया.
मंदिर को विशेष रूप से रंगोत्सव के अनुरूप सजाया गया है. ठाकुर जी को आकर्षक रंगीन परिधान और साफा धारण कराया गया है. राधा रानी का श्रृंगार भी मन मोह लेने वाला है. दोनों के हाथों में सजी पिचकारी मानो भक्तों को प्रेम और आनंद के रंग में सराबोर करने को आतुर दिखी. मंदिर में प्रवेश करते ही उड़ते अबीर-गुलाल, इत्र और गुलाब जल की महक ने वातावरण को दिव्यता से भर दिया.
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मंदिर के पुजारी देवेंद्र भारद्वाज ने बताया कि होली का यह उत्सव पांच दिनों तक अलग-अलग रंगों और परंपराओं के साथ मनाया जाएगा. पहले दिन रंग और गुलाल से होली खेली जा रही है. इसके लिए अबीर, गुलाल, केसरिया जल, टेसू के फूलों से तैयार प्राकृतिक रंग, गुलाब जल और इत्र की विशेष व्यवस्था की गई है. इन सभी सामग्रियों को थैलियों में पैक कर श्रद्धालुओं और आमजन में वितरित किया जा रहा है, ताकि हर कोई इस पावन उत्सव में सहभागी बन सके.

महोत्सव के दौरान प्रसाद वितरण की भी व्यवस्था की गई है. लगभग एक क्विंटल लड्डू वितरण का संकल्प लिया गया है. भक्तों को रंग के साथ मिठास का भी प्रसाद मिल रहा है. तीसरे दिन मंदिर में फूलों की होली का विशेष आयोजन होगा, जिसमें रंगों के स्थान पर विभिन्न पुष्पों की वर्षा के बीच ठाकुर जी के दर्शन होंगे. चौथे दिन मिष्ठान वितरण और भजन-संध्या का कार्यक्रम रखा गया है, जबकि पांचवें दिन विधिवत समापन समारोह आयोजित होगा.
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विशेष बात यह है कि इस बार मथुरा से उच्च गुणवत्ता का गुलाल मंगवाया गया है, जिससे ब्रज की परंपरा का वास्तविक रंग यहां भी झलके. साथ ही मंदिर की ऐतिहासिक संरचना को सुरक्षित रखने के लिए दीवारों और खंभों पर पॉलीथिन की विशेष परत चढ़ाई गई है, ताकि रंगों से कोई क्षति न पहुंचे. मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा और स्वच्छता के व्यापक इंतजाम किए हैं. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सुचारु प्रवेश और निकास व्यवस्था बनाई गई है.


