2026 का पहला चंद्रग्रहण : जयपुर में 20 मिनट दिखा अंतिम चरण, गोविंद देव जी में विशेष ग्रहण झांकी
जयपुर में चंद्रग्रहण शाम 6:27 से 6:47 बजे तक करीब 20 मिनट के लिए आंशिक रूप से दिखाई दिया...

Published : March 3, 2026 at 8:04 PM IST
जयपुर: साल का पहला चंद्रग्रहण पूर्ण हुआ. राजधानी जयपुर में ये ग्रहण शाम 6:27 से 6:47 बजे तक करीब 20 मिनट के लिए आंशिक रूप से दिखाई दिया, या यूं कहें ग्रहण का अंतिम चरण देखा गया. पूर्णिमा के दिन लगे इस ग्रहण के कारण प्रदेशभर में धार्मिक गतिविधियों और मंदिरों की व्यवस्थाओं में बदलाव देखने को मिला. जयपुर के आराध्य गोविंद देव जी मंदिर में ग्रहण दर्शन के विशेष व्यवस्था की गई. यहां ग्रहण काल में हरि नाम संकीर्तन होता रहा.
सुबह से शुरू हुआ सूतक, गोविंद देव जी के कपाट रहे खुले : ग्रहण शुरू होने से करीब 9 घंटे पहले सुबह 6:55 बजे सूतक काल शुरू हो गया था. परंपरा के अनुसार अधिकांश मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए और नियमित पूजा-अर्चना स्थगित कर दी गई. हालांकि, जयपुर के आराध्य गोविंद देव जी मंदिर में ग्रहण के दौरान भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया. मंदिर के मुख्य सेवादार मानस गोस्वामी के अनुसार ग्रहण काल को मंत्र जाप और भक्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है. इसी मान्यता के चलते दोपहर 3:15 बजे से शाम 6:50 बजे तक विशेष दर्शन की व्यवस्था की गई.
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हालांकि, ग्रहण के कारण ग्वाल, संध्या और शयन आरती दर्शन नहीं हुए. ग्रहण पूर्ण होने के बाद मंदिर परिसर और विग्रह का विशेष शुद्धिकरण, अभिषेक और गंगाजल से स्नान कराया गया. उन्होंने बताया कि ठाकुर जी पर किसी भी खगोलीय घटना का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता, क्योंकि वे स्वयं सृष्टि के स्वामी हैं. इसलिए उनके दरबार में दर्शन वर्जित नहीं होते. श्रद्धालुओं की अटूट आस्था को देखते हुए ग्रहण काल में भी पट खुले रखे जाते हैं. सामूहिक भजन-कीर्तन को भी विशेष महत्व दिया जाता है.
चंद्रग्रहण एक खगोलीय घटना : खगोलीय विज्ञान के अनुसार जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्रग्रहण घटित होता है. ये घटना केवल पूर्णिमा के दिन संभव होती है. जयपुर एस्ट्रोनॉमी सोसाइटी की अध्यक्ष कीर्ति वैष्णव के अनुसार चंद्रमा की कक्षा (ऑर्बिट) पृथ्वी की कक्षा से थोड़ी झुकी हुई होती है. इसलिए हर पूर्णिमा पर ग्रहण नहीं लगता. जब तीनों खगोलीय पिंड बिल्कुल एक सीध में आ जाते हैं, तभी पूर्ण या आंशिक ग्रहण बनता है.

