पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण का साया, 2 मार्च को जलेगी होलिका... राज्यों में अलग-अलग अवकाश
‘धर्म सिंधु’ और ‘निर्णय सिंधु’ के मतानुसार पूर्णिमा के साथ ग्रस्तोदित चंद्र ग्रहण हो तो एक दिन पूर्व होलिका दहन करना उचित माना गया है.

Published : February 23, 2026 at 4:45 PM IST
भरतपुर/अजमेर: इस बार होली पर्व पूर्णिमा पर लग रहे चंद्र ग्रहण के साये में मनाया जाएगा. ज्योतिषीय गणना और शास्त्रीय मतों के अनुसार 2 मार्च को प्रदोष काल में होलिका दहन होगा, जबकि 3 और 4 मार्च को धुलंडी पर रंगोत्सव मनाया जाएगा. उधर, अलग-अलग राज्यों में घोषित अवकाश की भिन्न तिथियों ने आमजन के बीच असमंजस की स्थिति भी बना दी है.
पंडित मनु मुद्गल ने बताया कि इस वर्ष पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को शाम 5 बजकर 29 मिनट से प्रारंभ होगी. ‘धर्म सिंधु’ और ‘निर्णय सिंधु’ के मतानुसार यदि पूर्णिमा के साथ ग्रस्तोदित चंद्र ग्रहण का संयोग हो तो एक दिन पूर्व, पूर्णिमा काल के प्रदोष समय में ही होलिका दहन करना उचित माना गया है. इसी आधार पर 2 मार्च को शाम लगभग 6:30 बजे से 8:29 बजे तक प्रदोष काल में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रहेगा. इस बार पूर्णिमा के साथ भद्रा का आरंभ भी हो रहा है, लेकिन भद्रा मुख्य काल में प्रभावी नहीं होने से दहन में कोई बाधा नहीं मानी गई है. इधर, पुष्कर के ज्योतिषियों के अनुसार यह चंद्र ग्रहण इस ग्रहण का असर कला, मनोरंजन, खेल जगत से जुड़े लोगों पर अशुभ रहेगा. वहीं कपड़ा और टेक्सटाइल व्यवसाय में वृद्धि के आसार हैं.
पढ़ें: Holi 2026: होलिका दहन के बाद नहीं मनाया जाएगा रंगों का त्योहार, जानें कब खेलेंगे होली
3 मार्च को ग्रस्तोदित चंद्रग्रहण: मनु मुद्गल ने बताया कि 3 मार्च को पूर्णिमा तिथि दिनभर रहेगी, लेकिन इसी दिन ग्रस्तोदित चंद्र ग्रहण का संयोग रहेगा. ज्योतिषीय गणना के अनुसार विरल छाया ग्रहण दोपहर 2:30 बजे से प्रारंभ होगा. भारत में यह ग्रहण चंद्रोदय के साथ दृश्य होगा, यानी शाम 6:13 बजे चंद्रमा उदित होगा और लगभग 6:39 बजे तक ग्रहण दिखाई देगा. ग्रस्तोदित चंद्र ग्रहण होने के कारण सूतक काल 12 घंटे पूर्व, यानी सुबह 6:45 बजे से मान्य होगा. सूतक काल में मंदिरों के पट बंद रहेंगे और पूजा-पाठ व मांगलिक कार्य सामान्यतः निषिद्ध माने जाते हैं, हालांकि जप, ध्यान और भजन करना शास्त्रसम्मत माना गया है. गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी और संयम बरतने होंगे.
होली भाई दूज 5 को : पंडित मुद्गल ने बताया कि 3 मार्च को सूर्योदय के साथ धुलंडी पर रंग खेला जाएगा और रंगोत्सव पर किसी प्रकार का दोष नहीं रहेगा. लोग 4 मार्च को भी धुलंडी मना सकते हैं. यानी 3 और 4 मार्च को दोनों दिन धुलंडी का पर्व मनाया जा सकेगा. हालांकि ग्रहण के कारण दिनभर संयम और सावधानी बरतने की आवश्यकता है. 5 मार्च को भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा.
क्या कहते हैं पुष्कर के पंडित: तीर्थराज पुष्कर के पंडित व ज्योतिषी कैलाश नाथ दाधीच के अनुसार फाल्गुन शुक्ल चतुर्दर्शी पर प्रदोष वेला में शाम 6 बजकर 36 मिनट से रात 9 बजे तक होलिका दहन का श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा. यह मुहूर्त लगभग 2 घंटे 24 मिनट का रहेगा. उन्होंने बताया कि 2 मार्च को शाम 5 बजकर 56 मिनट से पूर्णिमा प्रारंभ हो रही है, जो 3 मार्च को शाम 5 बजकर 8 मिनट तक रहेगी. भद्रा का साया भी इस दिन शाम 5.56 बजे से अगली सुबह तक रहेगा, लेकिन प्रदोष काल में भद्रा का मुख नहीं होने से होलिका दहन शास्त्रसम्मत होगा. वहीं, 3 मार्च मंगलवार को फाल्गुन पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण लगेगा. यह ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शाम 6 बजकर 45 मिनट तक रहेगा. इसका सूतक सुबह 6 बजकर 20 मिनट से प्रारंभ हो जाएगा. ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में होने से इसका विशेष प्रभाव सिंह राशि पर रहेगा.
जानिए, किस पर कैसा रहेगा चंद्रग्रहण का का असर : कला, मनोरंजन, खेल जगत से जुड़े लोगों पर अशुभ रहेगा. वहीं कपड़ा और टेक्सटाइल व्यवसाय में वृद्धि के आसार हैं. ग्रीष्मकालीन फसलों पर भी इसका प्रभाव पड़ने की संभावना है. सभी राशियों के लोगों को चंद्र मंत्र और महामृत्युंजय जाप का महत्व बताया गया है.
राज्यों में अलग-अलग अवकाश से भ्रम: सरकारी अवकाश को लेकर भी अलग-अलग राज्यों में भिन्न व्यवस्था की गई है. हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में 4 मार्च को होली का राजकीय अवकाश रहेगा. राजस्थान और मध्य प्रदेश में 2 मार्च को होलिका दहन तथा 3 मार्च को धुलंडी का अवकाश घोषित किया गया है. राजस्थान में 28 फरवरी (शनिवार) और 1 मार्च (रविवार) के साप्ताहिक अवकाश के साथ 2 और 3 मार्च का राजकीय अवकाश घोषित होने से 28 फरवरी से 3 मार्च तक सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे.

