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होली 2026: धमनी गांव की दीदियां बना रहीं पालक और चुकंदर से हर्बल रंग और गुलाल

स्व सहायता समूह की महिलाओं को उम्मीद है, नए कलेक्टर उनके हर्बल गुलाल और रंग खरीदने जरूर आएंगे.

HOLI 2026
पालक और चकुंदर से हर्बल रंग और गुलाल (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : March 3, 2026 at 5:27 PM IST

6 Min Read
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चंद्रकांत वर्मा की रिपोर्ट

बलौदा बाजार: रंगों के त्योहार को लेकर बाजार में जबरदस्त रौनक है. लोग तेजी से केमिकल वाले रंग और गुलाल से दूर हो रहे हैं. हर कोई होली में हर्बल गुलाल से होली खेलना चाहता है. इसी कड़ी में बलौदा बाजार के धमनी गांव की महिलाएं हर्बल गुलाल बना रही हैं. ये हर्बल गुलाल पलाश और गेंदे के फूलों से बना रही हैं. पालक और चुकंदर का भी इस्तेमाल रंग बनाने के लिए किया जा रहा है. होली के मौके पर हर्बल रंग गुलाल की भारी डिमांड इन महिलाओं के पास पहुंच रही है.

‘वंदनी स्व सहायता समूह’ बना रही हर्लब रंग और गुलाल

पलारी विकासखंड के ग्राम धमनी की ‘वंदनी स्व सहायता समूह’ की 11 महिलाएं फूलों से सब्जियों से हर्बल रंग गुलाल तैयार कर रही हैं. इनके बनाए रंग और गुलाल की भारी डिमांड बाजार में है. इस वजह से ये महिलाएं दिन रात मेहतन कर रंग और गुलाल तैयार कर रही हैं.

पालक और चकुंदर से हर्बल रंग और गुलाल (ETV Bharat)

फूलों और सब्जियों से तैयार हो रहा रंग

  • पलाश के फूलों से गुलाबी रंग तैयार किया जा रहा
  • गेंदे के फूलों से पीला रंग तैयार हो रहा
  • पालक से हरा रंग तैयार किया जा रहा
  • चुकंदर से लाल रंग बनाया जा रहा

जानिए कैसे बनाए जाते हैं हर्बल रंग और गुलाल

  • पहले बागों से तोड़े जाते हैं फूल
  • फिर की जाती है फूलों सफाई
  • फिर सुखाए जाते हैं फूल
  • फूल के सूखने पर उसकी होती है पिसाई
  • स्व सहायता समूह की महिलाएं करती हैं यह काम
  • फूलों के बनाए पाउडर में मिलाए जाते हैं अरारोट
  • खूशबू के लिए गुलाबजल एड किया जाता है
  • फिर होती है इनकी बाजार में ले जाने के लिए पैकिंग




तीन क्विंटल गुलाल तैयार, बाजार में भारी मांग

इस सीजन में अब तक ग्राम धमनी की महिलाएं करीब 6 क्विंटल हर्बल गुलाल तैयार कर चुकी हैं. स्थानीय बाजारों में स्टॉल लगाकर इसकी बिक्री की जा रही है. खरीदारों का रुझान साफ तौर पर प्राकृतिक और हाइजीनिक उत्पादों की ओर बढ़ा है. कई लोग खास तौर पर बच्चों के लिए यही गुलाल खरीदना पसंद कर रहे हैं. महिलाओं का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस बार मांग ज्यादा है. ग्राहक बार-बार आकर यही पूछते हैं कि “गांव वाली दीदियों का हर्बल गुलाल कहां मिलेगा?”



‘बिहान’ योजना से बदली तस्वीर

इन महिलाओं की सफलता के पीछे बड़ा योगदान राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की ‘बिहान’ योजना का है. इस योजना के तहत समूह को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और विपणन सहयोग मिला. पहले जो महिलाएं घर की चारदीवारी तक सीमित थीं, आज वे स्वयं उत्पादन, पैकेजिंग और बिक्री का काम संभाल रही हैं. समूह की सदस्य बताती हैं कि इस पहल ने उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाया है. अब वे परिवार की आय में बराबर योगदान दे रही हैं. कमाई से बच्चों की पढ़ाई, घर के खर्च और छोटी-छोटी जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं.


स्किन फ्रेंडली कलर

होली के समय अक्सर रासायनिक रंगों से त्वचा और आंखों में जलन की शिकायतें सामने आती हैं. ऐसे में प्राकृतिक गुलाल एक सुरक्षित विकल्प बनकर उभरा है. ग्राम धमनी की महिलाओं का बनाया गुलाल पूरी तरह प्राकृतिक है. इसमें न तो कोई कृत्रिम डाई है और न ही हानिकारक केमिकल. यही वजह है कि शहर के लोग अब जागरूक होकर ऐसे उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं. स्थानीय दुकानदार भी बताते हैं कि हर्बल गुलाल की मांग लगातार बढ़ रही है. ग्राहक कीमत से ज्यादा गुणवत्ता और सुरक्षा को महत्व दे रहे हैं.



आत्मनिर्भरता की मिसाल

‘वंदनी स्व सहायता समूह’ की 11 महिलाएं आज गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं. उन्होंने यह साबित कर दिया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत और सही मार्गदर्शन से सफलता हासिल की जा सकती है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में चल रही योजनाओं का लाभ ग्रामीण महिलाओं तक पहुंच रहा है. समूह की सदस्य कहती हैं कि उन्हें पहली बार ऐसा लगा कि वे भी कुछ कर सकती हैं, अपना व्यवसाय खड़ा कर सकती हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं. उनके मुताबिक, पहले होली सिर्फ त्योहार थी, लेकिन अब यह उनके लिए आय का बड़ा जरिया भी बन गई है.



स्टॉल से पहचान तक

महिलाएं अलग-अलग बाजारों और मेलों में स्टॉल लगाकर गुलाल बेचती हैं. आकर्षक पैकिंग और “हर्बल, केमिकल फ्री” जैसे टैग लोगों का ध्यान खींचते हैं. कई ग्राहक एक बार खरीदने के बाद दोबारा लौटकर आते हैं. कुछ तो थोक में भी ऑर्डर दे रहे हैं. महिलाएं भविष्य में अपने उत्पाद की ब्रांडिंग और ऑनलाइन बिक्री की भी योजना बना रही हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस प्राकृतिक गुलाल तक पहुंच सकें.



पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों सुरक्षित

रासायनिक रंग जहां त्वचा, आंख और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं, वहीं यह प्राकृतिक गुलाल पूरी तरह सुरक्षित है. पानी में घुलने के बाद भी यह प्रदूषण नहीं फैलाता. जानकार भी मानते हैं कि फूलों और सब्जियों से बने रंग पारंपरिक और सुरक्षित विकल्प हैं। इससे न केवल स्वास्थ्य की रक्षा होती है, बल्कि स्थानीय संसाधनों का उपयोग भी बढ़ता है. ग्राम धमनी की महिलाओं के हाथों से बना यह गुलाल सिर्फ एक उत्पाद नहीं है. इसमें उनकी मेहनत, लगन और आत्मनिर्भर बनने की जिद शामिल है. जब कोई ग्राहक यह गुलाल खरीदता है, तो वह सिर्फ रंग नहीं खरीदता, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण को समर्थन देता है.



इस होली चुनें प्राकृतिक रंग

होली खुशियों और मेल-मिलाप का त्योहार है. ऐसे में अगर रंग भी सुरक्षित और प्राकृतिक हों, तो त्योहार का आनंद दोगुना हो जाता है. बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की ग्राम धमनी की महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं.

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