ना पीने का पानी..ना शौचालय..ना फुट ओवरब्रिज, विकास की बाट जोह रहा ऐतिहासिक नालंदा रेलवे स्टेशन
देश-विदेश के पर्यटक जब नालंदा स्टेशन उतरते हैं तो उन्हें मायूसी हाथ लगती है. स्टेशन पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव है जिससे यात्री परेशान हैं-

Published : April 10, 2026 at 7:13 AM IST
नालंदा : एक ओर केंद्र और राज्य सरकारें 'स्वच्छ भारत' मिशन के तहत खुले में शौच मुक्त गांव बनाने का डंका पीट रही हैं, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले का ऐतिहासिक नालंदा रेलवे स्टेशन बदहाली का आंसू बहा रहा है. विश्व धरोहर और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल होने के बावजूद, यहां के रेलवे स्टेशन पर लाखों की लागत से बने नए-नवेले शौचालय में महीनों से ताला लगा हुआ है.
अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल वाले स्टेशन का बुरा हाल : स्टेशन पर पीने के साफ़ पानी न तो इंतजाम है और न ही गर्मी से बचाव के लिए प्लेटफार्म पर पंखे लगे हैं. एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाने के लिए ओवरब्रिज की सुविधा भी यहां मयस्सर नहीं है. इस घोर लापरवाही के कारण आए दिन यात्री ट्रेन की चपेट में आकर जान गंवा रहे हैं.
शाम होते ही सन्नाटे में डूब जाता है प्लेटफॉर्म : ईटीवी भारत की टीम ने जब नालंदा स्टेशन पर पहुंचकर हालात का जायज़ा लिया तो रेलवे कर्मियों से लेकर यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे दिखी. स्थानीय महिला रेखा देवी और सुनीता देवी ने बताया कि शाम 7 बजे के बाद यह स्टेशन एकदम सन्नाटे में डूब जाता है. यहां रेलवे पुलिस का कोई थाना नहीं है.
''नालंदा स्टेशन पर एक भी पुलिसकर्मी तैनात नहीं रहता, जिससे असामाजिक तत्वों और चोरों का खौफ बना रहता है. डर के मारे रात के समय यहां कोई रुकना नहीं चाहता. यहां किसी प्रकार की कोई सुविधा नहीं है.''- रेखा देवी, स्थानीय रेल यात्री

कभी बॉलीवुड में था नालंदा स्टेशन का जलवा : यह वही ऐतिहासिक स्टेशन है, जहां बॉलीवुड की सुपरहिट फिल्म 'जॉनी मेरा नाम' के मशहूर गाने "ओ मेरे राजा" की शूटिंग देवानंद और हेमा मालिनी पर फिल्माई गई थी. लेकिन आज इस स्टेशन की दुर्दशा किसी डरावनी फिल्म जैसी हो गई है.

टॉयलेट पर लटका रहता है ताला : नालंदा स्टेशन पर मेमो ट्रेन का इंतज़ार कर रहीं छात्रा मुस्कान स्टेशन पर टॉयलेट खुला न होने के कारण परेशान हैं. उनका कहना है कि वह पावापुरी अस्पताल इलाज के लिए जा रही हैं. स्टेशन पर शौचालय तो बना है, लेकिन उसमें हमेशा ताला लटका रहता है.

कब चालू होगा सार्वजनिक शौचालय : भाजपा के नालंदा मंडल अध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार ने भी अपना दर्द बयां करते हुए कहा, यहां 6 महीने पहले 20 से 25 लाख रुपए के सरकारी मद से शौचालय बना था, लेकिन चालू नहीं हुआ. उसपर हमेशा ताला लगा रहता है. पाने के पानी की भी यहां कोई व्यवस्था नहीं है, जबकि गर्मी बढ़ती जा रही है.

''प्लेटफार्म नंबर 2 पर तो हालात और भी बदतर है. स्टेशन के आसपास सिर्फ जंगल और कचरा भरा पड़ा है. स्टेशन जाने आने वाले रास्ते में सड़क तक व्यवस्थित नहीं है. बरसात के समय में यात्रियों को ट्रेन पकड़ना बेहद मुश्किल भरा होता है.''- धर्मेन्द्र कुमार, नालंदा मंडल अध्यक्ष, बीजेपी
फुट ओवरब्रिज नहीं होने से खतरा : स्टेशन की सबसे जानलेवा समस्या ओवरब्रिज का न होना है. यात्री टनटन सिंह ने बताया कि जब ट्रेन आने का अनाउंसमेंट होता है, तो लोग हड़बड़ी में रेलवे ट्रैक पार करके दूसरे प्लेटफॉर्म पर भागते हैं. जिसके चलते हमेशा हादसे का खतरा बना रहता है.

"ओवरब्रिज नहीं होने के कारण यहां आए दिन हादसे होते हैं. आज ही श्रमजीवी एक्सप्रेस की चपेट में आकर एक यात्री घिसटा गया. देश-विदेश से पर्यटक यहां आते हैं, लेकिन यहां टिकट से लेकर पानी तक की कोई व्यवस्था नहीं है."- टनटन सिंह, रेल यात्री
'स्टेशन प्लेटफॉर्म पर मिले बुनियादी सुविधा' : नालंदा विश्वविद्यालय और राजगीर जैसे अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थलों के करीब होने के कारण नालंदा स्टेशन का महत्व बहुत ज्यादा है. लेकिन जब पर्यटक स्टेशन पहुंचते हैं तो उन्हें मायूसी मिलती है. अव्यवस्थाओं के बीच उनका वेलकम होता है. स्थानीय लोगों ने सरकार और रेलवे प्रशासन से तत्काल ओवरब्रिज बनाने, शौचालय चालू करने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की गुहार लगाई है.

स्टेशन प्रबंधक ने बताया हकीकत : यात्रियों की समस्या के बारे में जब स्टेशन प्रबंधक से फोन पर जानकारी ली तो उन्होंने वो बताया जो यात्री नहीं बता पा रहे थे. उन्होंने बिना लाग लपेट के कहा कि स्टेशन पर शौचालय की व्यवस्था है लेकिन ठेकेदार बिना लाइट का काम कराए चाबी सौंप रहा था. इसलिए मेरी ओर से कहा गया कि चाबी हैंडओवर तभी करें जब काम पूरा हो जाए.

''स्टेशन प्रबंधक ने कहा कि हम लोग खुद जान हथेली पर लेकर ड्यूटी करते हैं. जीआरपी थाना यहां पर है ही नहीं. स्थानीय दबंगों के द्वारा हम लोगों को धमकी तक दी जा चुकी है. यहां से आम यात्री तत्काल टिकट कटा ही नहीं पाते.''- मो. रिजवान, स्टेशन प्रबंधन, नालंदा
नालंदा स्टेशन का सफरनामा : नालंदा में पहली बार 1903 में मार्टिन लाइट रेलवे की ट्रेन दौड़ी थी. फ़िर 1911 में इसे राजगीर तक बढ़ाया गया. इसके बाद 1962 में इसे ब्रॉड गेज में बदला गया. यह स्टेशन मुख्य तौर पर प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय और बौद्ध महाविहार स्थल से लगभग 3 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है.

कब भारतीय रेलवे लेगा स्टेशन की सुध : यात्री तो यात्री खुद स्टेशन प्रबंधक भी यहां बदइंतजामी के शिकार हैं. सवाल ये है कि ये व्यवस्था कब तक दुरुस्त होगी? कब तक यात्री बुनियादी सुविधाओं जैसे शौचालय, ओवरब्रिज का अभाव स्टेशन पर झेलते रहेंगे. अब देखना है कि यात्रियों की सुविधाओं का ख्याल रेलवे कब तक पूरा कर पाती है.
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