बेटे की मौत के बाद हिंदू परिवार ने मुस्लिमों के कब्रिस्तान के लिए दान की जमीन, जानें कारण
बक्सर में बेटे की मौत के बाद एक परिवार ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए कब्रिस्तान के लिए 1 बीघा जमीन दान कर दी.

Published : December 2, 2025 at 12:30 PM IST
बक्सर: जिले के चौसा प्रखंड के रामपुर पंचायत अंतर्गत डेवी डीहरा गांव में एक हिंदू परिवार ने अपनी अपार पीड़ा को इंसानियत की मिसाल में बदल दिया है. सड़क दुर्घटना में बेटे की असमय मौत से टूटे परिवार ने बेटे की स्मृति में मुस्लिम समाज के लिए एक बीघा जमीन कब्रिस्तान के रूप में दान कर ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसकी पूरे जिले में चर्चा है.
सड़क दुर्घटना में बेटे की मौत: 18 नवंबर को देहरादून में हुए हादसे में डेवी डीहरा निवासी जनार्दन सिंह के बड़े पुत्र शिवम कुमार की दर्दनाक मौत हो गई थी. युवक परिवार का सहारा था और अपने दम पर देहरादून में तीन फैक्ट्रियां संचालित कर रहा था. घरवालों के अनुसार, इस वर्ष उसकी शादी की तैयारी चल रही थी, लेकिन अचानक आई मनहूस खबर ने माता–पिता, भाई और परिजनों को झकझोरकर रख दिया.
क्या कहते है परिजन ?: शिवम के चाचा बृजराज सिंह ने बताया कि शिवम न सिर्फ परिवार की रीढ़ था, बल्कि गांव और समाज के प्रति उसकी सोच बेहद सकारात्मक थी. वह हमेशा जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे रहता था. उसकी मौत से परिवार ही नहीं, पूरा गांव शोक में डूबा है.
कब्रिस्तान के लिए दान किया 1 बीघा जमीन: संताप के इस दौर में सोमवार को आयोजित श्राद्ध कार्यक्रम के दौरान जनार्दन सिंह ने बेटे की याद को अमर बनाने के लिए एक मानवता भरा फैसला लिया. परिवार ने मुस्लिम समुदाय के लिए एक बीघा जमीन कब्रिस्तान बनाने के लिए दान कर दी. जनार्दन सिंह के छोटे भाई बृजराज सिंह ने बताया कि यह जमीन पूरी तरह से मुस्लिम समाज के सुपुर्द रहेगी.
"कब्रिस्तान का नामकरण शिवम उर्फ अहीर धाम कब्रिस्तान के नाम से किया जाएगा. शिवम के विचारों में हमेशा आपसी सौहार्द और भाईचारे की भावना थी. उसी सोच को आगे बढ़ाने के लिए परिवार ने यह निर्णय लिया है, ताकि शिवम की स्मृति आने वाली पीढ़ियों के बीच इंसानियत की कहानी बनकर जिंदा रहे."- बृजराज सिंह, मृतक के चाचा
हादसा जिसने सबकुछ बदल दिया : 18 नवंबर को शिवम दफ्तर के कार्य से अपनी बाइक पर जा रहा था. तभी अचानक एक तेज रफ्तार कार ने जोरदार टक्कर मार दी, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई. इस दुखद हादसे ने पूरे परिवार पर मानो पहाड़ तोड़ दिया. हालात ऐसे थे कि परिवार का कोई सदस्य उसकी असमय मौत को स्वीकार नहीं कर पा रहा था, लेकिन बेटे की अंतिम विदाई के बाद परिवार ने दर्द को परोपकार में बदलने का रास्ता चुना.
पौधा रोपण कर संकल्प: श्राद्ध के दिन परिवार ने न सिर्फ जमीन दान की, बल्कि शिवम की स्मृति में पौधा रोपण भी किया. परिजनों का कहना है कि ये पौधे शिवम के आदर्शों और उसके सौहार्दपूर्ण स्वभाव का प्रतीक बनकर बढ़ते रहेंगे.
हिंदू परिवार द्वारा मुस्लिम समुदाय के लिए जमीन दान करने का मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है. लोग इस कदम को मानवता, आपसी प्रेम और सामाजिक एकता का अनोखा संदेश बता रहे हैं.
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