देशभर में फिर अव्वल आया हिमाचल, समग्र शिक्षा के इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों में जीरो पेंडेंसी
समग्र शिक्षा के तहत तय समय में इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य पूरे करने पर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने थपथपाई हिमाचल की पीठ.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 19, 2026 at 3:20 PM IST
शिमला: देशभर में समग्र शिक्षा के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने को लेकर पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश एक बार फिर अव्वल रहा है. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से साल 2021-22 और 2025-26 के बीच समग्र शिक्षा के तहत मंजूर किए गए इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों के आंकड़ों में हिमाचल का प्रदर्शन शानदार रहा है. प्रदेश में इन पांच सालों के दौरान मंजूर किए कार्यों की ओवरऑल पेंडेंसी जीरो प्रतिशत दर्ज की गई है, यानी केंद्र से मंजूर इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों में एक भी कार्य पेंडिंग नहीं है.
हिमाचल से काफी पीछे रहा केरल
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने भी हिमाचल के इस शानदार प्रदर्शन की सराहना की है. स्कूलों के लिए मंजूर इंफ्रास्ट्रक्चर वर्क को समय पर पूरा करने के मामले में हिमाचल प्रदेश देश में अग्रणी राज्यों में शामिल है. हिमाचल के साथ-साथ गोवा और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की पेंडेंसी भी जीरो है. हिमाचल की यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस मामले में केरल भी हिमाचल से काफी पीछे है. केरल में इंफ्रास्ट्रक्चर वर्क की पेंडेंसी 75.57 प्रतिशत दर्ज की गई है. इसके अलावा दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव में 65.06 प्रतिशत और जम्मू-कश्मीर में 59.21 प्रतिशत पेंडेंसी दर्ज हुई है. यह अंतर हिमाचल में स्वीकृत कार्यों के समयबद्ध क्रियान्वयन की तस्वीर को और स्पष्ट करता है.
"समग्र शिक्षा के तहत स्कूलों के लिए मंजूर इंफ्रास्ट्रक्चर वर्क में जीरो पेंडेंसी और शत-प्रतिशत स्मार्ट क्लासरूम का फंक्शनल होना हिमाचल प्रदेश के लिए गौरव की बात है. यह उपलब्धि समग्र शिक्षा की पूरी टीम, विशेषकर सिविल कोऑर्डिनेटर रंजना चौहान और उनकी टीम सहित अन्य कोऑर्डिनेटरों के सहयोग का परिणाम है." - राजेश शर्मा, निदेशक, समग्र शिक्षा
इन कार्यों में ओवरऑल पेंडेंसी जीरो
वहीं, हिमाचल की उपलब्धि सिर्फ ओवरऑल पेंडेंसी जीरो होने तक ही सीमित नहीं है. समग्र शिक्षा के तहत साल 2021-22 से 2025-26 के दौरान जिन विभिन्न इंफ्रास्ट्रक्चर वर्क को मंजूरी दी गई, उनके प्रत्येक घटक में हिमाचल प्रदेश की पेंडेंसी जीरो प्रतिशत रही है. एक्स्ट्रा क्लासेस के निर्माण से लेकर आर्ट एंड क्राफ्ट रूम, बाउंड्री वॉल, बिल्डिंग निर्माण और कंप्यूटर रूम तक सभी मंजूर कार्यों को समय पर पूरा किया गया है. इसी तरह से जर्जर भवनों के पुनर्निर्माण/सुधार, पेयजल सुविधा, विद्युतीकरण और विभिन्न प्रकार की प्रयोगशालाओं से जुड़े कार्यों में भी हिमाचल की पेंडेंसी जीरो है.
इसमें भी किया 100 प्रतिशत काम
वहीं, बायोलॉजी लैब, केमिस्ट्री लैब, फिजिक्स लैब और साइंस लैब के सभी मंजूर कार्य भी समय पर पूरे हुए हैं. स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण के लिए स्वीकृत लाइब्रेरी रूम और मेजर रिपेयर के कार्य भी समय पर पूरे किए गए हैं. नए स्कूल खोलने रैंप एवं हैंडरेल उपलब्ध करवाने और सोलर पैनल स्थापित करने जैसे कार्यों में भी हिमाचल प्रदेश ने 100 प्रतिशत काम किया है. इसके अलावा विद्यार्थियों की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों में भी यही स्थिति देखने को मिली है. बॉयज टॉयलेट, गर्ल्स टॉयलेट और रिपेयर से संबंधित स्वीकृत कार्यों में हिमाचल प्रदेश की पेंडेंसी जीरो रही है, यानी इन सभी इंफ्रास्ट्रक्चर घटकों के तहत मंजूर कार्य समय पर पूरे किए गए हैं.
"समग्र शिक्षा की कोशिश केवल कार्यों को समय पर पूरा करना नहीं, बल्कि स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण और बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करना है. स्मार्ट क्लासरूम सहित सभी मंजूर इंफ्रास्ट्रक्चर वर्क का प्रभावी क्रियान्वयन इसी प्रतिबद्धता को दर्शाता है." - राजेश शर्मा, निदेशक, समग्र शिक्षा
डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में हिमाचल की उपलब्धि
इंफ्रास्ट्रक्चर वर्क के साथ-साथ डिजिटल एजुकेशन के क्षेत्र में भी हिमाचल ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है. प्रदेश में 100 स्मार्ट क्लासरूम फंक्शनल हैं. वहीं, केरल में करीब 50 प्रतिशत स्मार्ट क्लासरूम ही फंक्शनल हैं. ऐसे में स्मार्ट क्लासरूम के प्रभावी संचालन के मामले में हिमाचल की उपलब्धि और महत्वपूर्ण हो जाती है. समग्र शिक्षा के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में जीरो पेंडेंसी और स्मार्ट क्लासरूम का 100 प्रतिशत फंक्शनल होना इस बात को दर्शाता है कि शिक्षा के लिए चलाई जा रही योजनाओं एवं कार्यों का धरातल पर समयबद्ध तरीके से क्रियान्वयन हो रहा है. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से इसकी सराहना की गई है.

