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हिमाचल में मानसून का इंतजार, 422 पेयजल योजनाओं पर सूखे की मार, गंभीर संकट में 31 स्कीमें

हिमाचल में मानसून की देरी से गहराया पेयजल संकट. नए पानी के कनेक्शन पर रोक जारी और पानी बर्बाद करने पर कटेगा कनेक्शन.

माचल में मानसून की देरी से गहराया पेयजल संकट
माचल में मानसून की देरी से गहराया पेयजल संकट (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : June 27, 2026 at 8:33 AM IST

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शिमला: हिमाचल में मानसून की दस्तक में हो रही देरी अब पेयजल व्यवस्था पर भारी पड़ने लगी है. जलस्रोतों का जलस्तर लगातार घटने से जल शक्ति विभाग की सैकड़ों पेयजल योजनाएं सूखे की चपेट में आ गई हैं. ताजा रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश की 422 पेयजल योजनाएं सूखे से प्रभावित हैं, जबकि 31 योजनाओं में जल प्रवाह 75 प्रतिशत से अधिक घट चुका है, जिससे कई क्षेत्रों में जलापूर्ति पर संकट गहराने लगा है. हालांकि सरकार ने प्रभावित इलाकों में वैकल्पिक स्रोतों से पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था शुरू कर दी है, लेकिन यदि मानसून ने जल्द दस्तक नहीं दी तो आने वाले दिनों में पेयजल संकट और गंभीर रूप ले सकता है.

राज्य सरकार ने पेयजल योजनाओं की लगातार निगरानी के लिए मुख्यालय स्तर पर अलग से नोडल अधिकारी नियुक्त किया है. विभागीय अधिकारी प्रत्येक सप्ताह प्रदेशभर से योजनाओं की स्थिति की रिपोर्ट सरकार को भेज रहे हैं. सरकार ने पहले ही निर्देश जारी कर दिए हैं कि जहां जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज हो रही है, वहां वैकल्पिक जल स्रोतों से पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए. साथ ही पाइपलाइन लीकेज पर विशेष निगरानी रखने और पानी की बर्बादी रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं.

बारिश में कमी हुई दर्ज
बारिश में कमी हुई दर्ज (ETV Bharat)

इतनी पेयजल योजनाएं सूखे से प्रभावित

जल शक्ति विभाग की 20 जून तक की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश की 10,658 पेयजल योजनाओं में से 422 योजनाएं सूखे से प्रभावित हैं. इनमें 196 योजनाओं पर शून्य से 25 प्रतिशत, 164 योजनाओं पर 25 से 50 प्रतिशत, 31 योजनाओं पर 50 से 75 प्रतिशत, 31 योजनाओं पर 75 प्रतिशत से अधिक सूखे का असर दर्ज किया गया है. सबसे अधिक प्रभावित योजनाएं सोलन जिले की 23 और सिरमौर जिले की 8 हैं, जहां जलस्रोतों में पानी का स्तर काफी नीचे पहुंच गया है.

विभागीय आंकड़ों के अनुसार 12 जून तक केवल 179 योजनाएं ही शून्य से 25 प्रतिशत तक प्रभावित थीं, लेकिन कुछ ही दिनों में प्रभावित योजनाओं की संख्या बढ़कर 422 पहुंच जाना हालात की गंभीरता को दर्शाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून के आगमन में और देरी होती है तो जलस्रोतों का जलस्तर और गिर सकता है, जिससे कई क्षेत्रों में पेयजल संकट गहरा सकता है. फिलहाल प्रदेश की निगाहें मानसून पर टिकी हैं, क्योंकि समय पर अच्छी बारिश ही सूखते जलस्रोतों और डगमगाती पेयजल व्यवस्था को राहत दे सकती है.

सामान्य से कम बारिश के कारण बिगड़े हालात

हिमाचल प्रदेश में मानसून सीजन के दौरान अभी तक सामान्य से 31 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार एक जून से 26 जून तक प्रदेश में कुल 55.3 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य तौर पर 79.8 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी. प्रदेश के 12 जिलों में से केवल किन्नौर में ही सामान्य से 15 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई है. इसके अलावा शेष सभी जिलों में मानसून सीजन के दौरान सामान्य से कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है. बारिश की कमी का असर अब पेयजल योजनाओं और प्राकृतिक जलस्रोतों पर भी दिखाई देने लगा है. जलस्तर घटने से कई क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है. यदि आगामी दिनों में अच्छी बारिश नहीं होती है तो जल संकट और गहरा सकता है.

पानी के नए कनेक्शन पर रोक जारी

हिमाचल में फिलहाल नए पानी के कनेक्शन जारी नहीं किए जाएंगे। प्रदेश में मानसून सीजन में अच्छी बारिश न होने तक पानी के कनेक्शन पर लगा प्रतिबंध अभी जारी रहेगा. वहीं पानी की कमी को देखते हुए जल शक्ति विभाग ने बर्बादी रोकने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं. यदि कोई व्यक्ति पेयजल का उपयोग गैर-जरूरी कार्यों जैसे गाड़ी धोने, किचन गार्डन की सिंचाई, भवन निर्माण या टैंक ओवरफ्लो में करता पाया गया, तो उसका कनेक्शन बिना किसी पूर्व सूचना के काट दिया जाएगा. टुल्लू पंप के इस्तेमाल पर भी सख्ती बरती जाएगी. विभाग का मानना है कि हर बूंद की बचत जरूरी है.

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